उखड़त साँस-वेंटिलेटर पर आपूर्ति तन्त्र

उखड़त साँस-वेंटिलेटर पर आपूर्ति तन्त्र

जग जाहिर बा कि हमनीके देश मे प्राणवायु कहाये वाला ऑक्सीजन के माने मेडिकल ऑक्सिजन के उत्पादन खपत से अधिका होला, एक महीना पहिले के उत्पादन के आंकड़ा एकर प्रत्यक्ष प्रमाण बा। लेकिन अइसन का भइल की एकर किल्लत आजकाल देश के मीडिया के सुर्खी बनल बा। समय पर एकर उपलब्धता ना होखला के चलते करीब सैकड़न लोग के असमय जीवन के दिया बुता गइल। स्थानीय प्रसाशन से लेके आला अधिकारी मुख्यमंत्री से लेके प्रधानमंत्री तक के एकर आपूर्ति पर नजर बा।

उच्च न्यायालय भी समय समय पर आदेश पारीत क के सरकार के हर जरूरतमंद के प्राणवायु उपलब्ध करावे के कहतिया, बाधा पहुंचावे वाला पर सख्त से सख्त कार्यवाही करे के चेतावनी भी देले बिया। समय ही बताई की जमीनी हकीकत का बा ? एकरा पर केतना अमल हो रहल बा।

दू महीना पहिले तक कोरोना के विरुद्ध शानदार प्रदर्शन खातीर अपना देश के दुनियाँ भर से बधाई सन्देश मिले शुरू हो गइल रहे। कोरोना टीकाकरण के भी रफ्तार दिन पर दिन तेज होखत जात रहे,स्थिति में तेजी से सुधार होत रहे, कोरोना से मुक्ति के उम्मीद के किरिन पजरे सरकत लउकत रहे।

कई महीनन से चलत बन्दी के दंश झेल रहल बिरान स्कूल भी के केवाड़ी खुल गइल रहे, छात्र छात्रा के आगमन से रौनक वापस आवे शुरू हो गइल रहे। बाजार में रौनक अपना पुरनका जगह पर काबिज होखे के पुरजोर कोशिश में लागल लउके शुरू हो गइल रहे। शादी बियाह परब त्योहार के धूम फिर से खुशी के सौगात के साथ बन्धु बांधव हित गन सगा सम्बंधी से मिलन सुखद एहसास दे जात रहे। संक्रमण के आंकड़ा 13000 के निम्न स्तर पर पहुँच गइल रहे।

लेकिन पिछला तीन हफ्ता में स्थिति में आमूल चूल परिवर्तन हो गइल। कोरोना के दूसरा लहर पेट्रोल में आग नीयन तेजी से समूचा देश मे पूरा ताण्डव मचा रहल बा, का आम का खास का गाँव का शहर कस्बा केहू अछूता नइखे एकरा प्रकोप से । हर उमिर तबका के लोग के रगड़ के रख देले बिया ई महामारी।

अपना देश मे करीब 500 करखाना बान स जवन हवा से ऑक्सीजन लेके ओके मेडिकल ऑक्सिजन यानी कि तरल ऑक्सिजन में बदले के काम मे लागल बाण स। मेडिकल ऑक्सिजन के परिवहन खातीर एगो खास किसिम के क्रायोजनिक टैंकर के जरूरत पड़ेला जेकरा में माइन्स 183 डिग्री तापमान पर तरल ऑक्सीजन के भण्डारण कइल जाला । एह टैंकर के भरे में करीब करीब दू घण्टा के समय लागेला। ई गैस बहुते ज्वलनशील होला एकरा चलते बहुत तेज गति से एह टैंकर के नइखे चलावल जा सकत, आग लागे के अंदेशा रहेला । एहि से जरूरत मन्द तक पहुँचे में देरी हो रहल बा।

“पियास लगला के बाद इनार ना खनाला”, अधिक उत्पादन के बादो मरीज ऑक्सीजन के अभाव में मर रहल बाण । काहे ? आपूर्ति के ब्यवस्था ठीक नइखे? प्रबन्धन ब्यवस्था पर सवाल उठल लाजमी बा । उत्तम प्रबन्धन का होला? एकर ताजा उदाहरण केरल बा, कोरोना बेमारी ओहीजो फइलल बा, स्थिति दिन पर दिन भयावह होत जाता ओहिजो लेकिन ऑक्सीजन के किल्लत नइखे। खपत अधिका भइला के बादो उपलब्धता में कवनो कमी नइखे सब मरीज के आसानी से सुलभ बा। उ अपना खपत से अधिका ऑक्सीजन पड़ोसी राज्य तामिलनाडु, कर्नाटक, गोवा के भी दे रहल बा। बेहतर प्रबन्धन के उम्दा उदाहरण बा केरल।

अचानक माँग में भइल इजाफा के चलते स्थिति भयावह दिख रहल बा। किल्लत के चलते सामान्य आदमी जे ए बीमारी से पीड़ित नइखे उहो बाजार से ऑक्सीजन सिलेंडर किन के भविष्य खातीर रख देत बा, कालाबजारी भी बड़ समस्या बा । आपदा में भी कुछ लोग कमाए में लागल लउकता देख के लगता कि इंसानियत भी आईसीयू में चल गइल बिया ओहुके ऑक्सीजन के जरूरत बा, प्रसाशन त अपना काम मे लगले बा स्वयंसेवी संस्था सेवाभावी लोग के भी कमी नइखे । सभे अपना अपना स्तर से भयावह स्थिति से लड़ रहल बा। केहू धन से त केहू तन से त केहू दृढ़इच्छा शक्ति से पीड़ित के भयावह स्थिति से बाहर निकाले में लागल बा।

अचानक आइल माँग के चलते ब्यवस्था चरमरा जाला लेकिन आपन आँखी के सोझा ऑक्सीजन के अभाव में छटपटात परिजन के देखी के संयम बना के रखल बहुते मुश्किल त बटले बा लेकिन ई समय हालात पर काबू करे खातीर हो रहल प्रयास के समर्थन देवे वाला बा ।

ई समय डेरवावे आ आतंक के माहौल बनावे के नइखे। सकारात्मक रहल समय के जरूरत बा। प्रमुख राजनीतिक पार्टि आ सरकारन के प्राथमिकता में जन स्वास्थ्य त कहियो से ना रहे, शायद इहे कारण बा कि लोग लचर चिकित्सा ब्यवस्था के चलते दम तोरे खातीर मजबूर बाण। दिल्ली जइसन महानगर में महँगा से महँगा अस्पताल भी चिकित्सा के साधन के कमी से जूझ रहल बा।

ई भयावह दशा खातीर जिम्मेदार हमनियो के बानी जा, शिक्षा, स्वास्थय, पानी, बिजली, सड़क, रोजगार के मुद्दा पर वोट डलला के बजाय धर्म, जाती, क्षेत्र नीयन भावनात्मक मुद्दन के अहमियत देनी जा आ एहि पर आपन वोट डालेनी जा ।

आम आदमी के भगवाने मालिक बाण एक ओरी कोरोना रगड़ता त दूसरी ओर रोजी रोजगार पर लागत गरहन दिमाग के सुन्न क देता । भीषण संकठ के एह दौर में आम आदमी के हाँथ से कुल्हिये चीज छुटत चल जाता। लाचार बेबश इन्सान परिस्थिति के दास बन के रह गइल बा। चेतना जीवट आ जिये के जिजीविषा ही हमनीके एह बेमारी से छुटकारा दिवाइ।

तारकेश्वर राय “तारक”
गुरुग्राम, हरियाणा

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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