‘सूपवा बोले त बोले चलनियों बोले, जेम्मे बाटे बहत्तर छेद’

भोजपुरी साहित्य के सुप्रसिद्ध पत्रिका भोजपुरी साहित्य सरिता के  संपादक, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार के संगे संगे भोजपुरी भाषा के प्रखर पैरोकार श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी उर्फ जे.पी.भइया के लिखल एगो टटका व्यंग रचना के पढ़ीं आ भोजपुरिया बधार में उपस्थित लक्षणा आ व्यंजना के आनंद उठाईं। का जमाना आ गयो भाया,जेने देखी, भउका भर-भर के गियान बघारल जा रहल बा। गियान बघारे का फेरा में दरोगा, सिपाही से लेके जेब कतरा आ चोरन के सरदारो तक लागल बा लो। अपना लोक में एगो कहाउत पुरनिया लोग क़हत ना अघालें कि…

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बिहार के बढंती में नेता लोग के महान योगदान बा- एगो व्यंग्य

बिहार के वर्तमान दशा आ दिशा पर दिलीप पैनाली जी के एगो व्यंग्य बिहार का नेताजी लोगन आ कुछ विशिष्ट प्रजाति के जनमानस लोगन का अथक प्रयास से उन्नति के राह बंद होके एह राज्य का जवन अप्रतीम सफलता आ मान सम्मान मिलल बा ओह पर राष्ट्रे ना समस्त विश्व अचरज में बा। होखो काहे ना जी जहाँ से हर साल लावा घुली जस अनेको प्रतियोगी परीक्षा में हजारन प्रतिभागी उतीर्ण भइलो का बाद नोकरी छोड़ बिहारे में व्यपार करत होखस, तीन साल के डिग्री के कोर्स पाँच बरिस में…

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