रूपिया के गाछ

रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले कि “भाई रामसेवक, सुनऽ अब हमनी के लइका सेयान होतारे सं। एकनी खातिर कुछ जोड़ बिटोर करे के चाहीं। तु का कहतारऽ बतावऽ” सीताराम के ई बात सुन के रामसेवक कहले कि “हो भाई, बात त तुं नीमन कहतारऽ, हमनी के कुछ करे के चाहीं। अब तुं बताव का करे के तहार विचार बा?”  एह बात पर सीताराम कहले कि “सुनऽ हम कहेब…

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