अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

यदि साचों में हमनी के भोजपुरी भा अपनी मातृभाखा के ले के गंभीर बानी जा तऽ हमनी के सोशल मीडिया में भोजपुरी में भले लिखीं जा चाहें ना बाकिर हमनी अपना घर के लइकन से भोजपुरी में बतियावे के चाहीं। बदलल समाज बेवस्था में सरकार के बहुत बरियार जोगदान बा बाकिर सगरी दोख सरकार पऽ डालि दिहला से हमनी के जिम्मेदारी खत्म ना हो जाई। जदि लोग एह बेरा ना चेताई तऽ दोसर भाखा जल्दिए मातृभाखा बनि जइहन सऽ अउरी हमनी के देखते रहि जाइब जा। जदि संभव होखे तऽ हमनी के इवेंड मोड से बहरी निकसि के अपनी मातृभाखा (संस्कृति आ अथाह ज्ञान) के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी ले प्राकृतिक तरीका से हस्तांतरित करीं जा।

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भोजपुरी क सर्जनात्मकता

भोजपुरी समय के एह विशेष अंक में पढ़ीं हिंदी आ भोजपुरी के विद्वान, लेखक,विचारक आ कवि परिचय दास जी के आलेख। ’’हमरा लग रहल बा कि हम कवनो विजन देख रहल बानी अउर तू ओह विजन में ना बाड़ू । बाकिर वोह विजन के देखत-देखत हमरा मन में एगो तन्मय उन्माद उमड़ रहल बा जवन धीरे-धीरे हमरा पूरा देह, पूरी आत्मा में छा रहल जात बा अउर हम एगो एनरजेटिक बदरी से घिर गइल बानी। हमरा भीतर से प्रकाश के प्रभा मण्डल फूट रहल बा। एह दशा में शब्द बिल्कुल…

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