वैक्सीन ने बचाई कोरोना के संक्रमण से – सिविल सर्जन डॉ. जे. पी. सुकुमार

धर्मेंद्र पांण्डेय, भोजपुरी समय, मशरखः “वैक्सीन हीं कोरोना संक्रमण से बचायेगा” ई कहनाम बा बिहार के छपरा जिला के सिविल सर्जन डॉ. जेपी सुकुमार के। एगो पत्रकार वार्ता में डॉ. सुकुमार कहलन कि कोरोना टीकाकरण के लेके नागरिकन में जबरदस्त उत्साह देखल जा रहल बा। एकरा बावजूदो कुछ लोगन में भ्रम के स्थिति बनल बा। जिला में आ राज्यन में निःशुल्क टीकाकरण हो रहल बा। कोरोना से बचाव खातिर सबसे सशक्त उपाय टीकाकरणे बा। कोरोना के संभावित तीसरका लहर में टीकाकरण से लाभांवित लोगन में संक्रमण के आशंका बहुत कम…

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अच्छा खबर : जिला में बुधवार के खाली कोवैक्सीन के सेकेंड डोज़ वाला लाभार्थियन के लागी वैक्सीन

अच्छा खबर : जिला में बुधवार के खाली कोवैक्सीन के सेकेंड डोज़ वाला लाभार्थियन के लागी वैक्सीन जिला के मिलल कोवैक्सीन के 10 हजार डोज, प्रखंड मुख्यालयन सहित शहर में चार जगहा होखी टीकाकरण धर्मेंद्र पांडेय, भोजपुरी समय, मशरख, सारणः छपरा जिला में कोवैक्सीन के इंतजार करे वाला लाभार्थियन खातिर अच्छा खबर बा। आब जिला में बुधवार के कोवैक्सीन के सेकेंड डोज वाला लाभार्थियन के टीकाकरण कइल जाई। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविन्द कुमार  बतवले कि कोवैक्सीन के सेकेंड डोज खातिर काफी समय से लोगन के इंतजार रहल ह।…

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महेंन्द्र मिसिर के नाम पर ई-पुस्तकालय के स्थापना पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन के भइल आयोजन

राम प्रकाश तिवारी,भोजपुरी समय, छपरा: आज जब चारोें ओर भोजपुरी भाषा के मान सम्मान के पुर्नस्थापना, भोजपुरी भाषा में अश्लील गीतन पर रोक लगावे अऊरी एकर बहिष्कार करे के मुहिम चल रहल बा। अइसन में भोजपुरी भाषा के नवका पीढ़ी में रोपे के संगे-संगे पुरनका आ नयका समय के भोजपुरी के कवि, रचयिता,गीतकार आ कलमकार के मान सम्मान खातिर हरदम प्रयत्नशील रहेवाला मंच अखिल भारतीय भोजपुरी संघ भोजपुरी के महान गीतकार, भोजपुरी गीतन के पहचान पूर्वी के जनक आ स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक पंडित महेंनदर मिसिर के नांव पर स्थापित…

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“हमार बबुनी “

हमनी के आजी बहुत पढ़ल लिखल त ना रहली बाकि ठेठ भोजपुरी बोलत रही , हमार गांव गंगा के किनारे बा, जब हमनी सभे गांवे जाईं जा,  त गांव के शंकर के मिठाई, लकठो ( मीठा(गुड़) से निर्मित) , बताशा, फरही, भुंजा खाईं जा , जवन स्वाद एह सभ चीझन के खाए में आवत रहे , ऊ स्वाद चाऊमिन , बर्गर, पिज्जा में कहां? ई वाकया आज से चालीस बरिस पूर्व के बा, गरमी के छुट्टी में गांवे निकल जात रहनी हमनी सभ, ऊंहा पहुंचला के बाद हम दिन-रात धमाचौकड़ी…

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आद्रा नक्षत्र पर विशेष

*आद्रा नक्षत्र पर विशेष* सूरज के आद्रा नक्षत्र में जाए के साथ-साथ ,एह नक्षत्र के शुरुआत हो जाला।ई हर साल 22 जून के 24 घंटा में कवनो समय चाहे भोर में, चाहे दुपहरिया में, चाहे सांझि ले एह नक्षत्र के शुरुआत होला।ई 27 नक्षत्र में से छठवां नक्षत्र ह। जइसे लइकी के अइला पर खीर पूरी बना के स्वागत कइल जाला, ठीक ओसही एह नक्षत्र के भी खीर पुरी के साथ स्वागत कइल जाला। ई नक्षत्र 15 दिन तक रहेला। कवनो कवनो जगह पर अतना दिन तक उत्सव के रूप…

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संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार- डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ उत्तर भारत के मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के क्रांतिकारी संतकवि कबीर के जनम तिथि, जन्म स्थान, परिवार, भासा, मरन तिथि आदि के लेके बिद्वान लोग के एकमत नइखे। आ जदि कबीर अपने चाहे उनका समकालीन उनकर केहू भक्त नइखे लिखले त जनम तिथि, जनम स्थान, परिवार आ मरन तिथि के लेके ठोस सबूत जुटावल कठिन बा। अइसहूं पहिले सम्पन्न परिवार का लरिका के जनम पतरी ना बन पावत रहे। विरले केहू का घरे लरिका पैदा होखे त…

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‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

महान संत कवि कबिर दास जी के जयंती पर पढ़ीं डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ के कबिर दास के सगुनोपासना पर लिखल ई आलेख ‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ संत कबीरदास के बारे ई आम राय बा कि ऊ उत्तर भारत में निरगुन भक्ति धारा के पहिल संतकवि हवें। बाकिर हमरा समझ से कबीरदास खाली निरगुनिए भक्ति धारा के संत नइखन। ऊ सुगुन भक्ति धारा के भक्तो बाड़न। बाकिर ओह तरह से ना जइसे सगुन भक्ति धारा के संतकवि तुलसीदास बाड़न। तबो जे अपना नाम के पाछे दास लगवले…

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“माई-भउजी” भोजपुरी कहानी

“माई-भउजी” “दीपक अपना घर के दलानी में बइठल ,बैलवन के गर के घण्टी सुनत रहलन। मन अकुलाए–चल जाईं आ तनी बैलन के सुहरा आईं। पर लगले फेरु से बइठ जास,,,,,एहि उहापोह में रहलन की सामने से भउजी आवत लउक गइली आ इनकर रहल-सहल हिम्मत भी जबाब दे देलख। उ पाछा से उनका के जात देखत सोंचे लगलें,,इ उहे भउजी हई जे गोदी में खेलवले रहली ??? दीपक चारी बरिस के रहलें त उनकर भउजी बियाहे अइली।उ हरमेशा बइठल भउजी के निहारत रहस,उनके गोदी में सुतस, उनके से खाना खास,,उनके जरे…

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भोजपुरी भाषा के इतिहास

भोजपुरी बोली/भाषा वैदिक “ब्रीही”संस्कृति क उद्भव जउन क्षेत्र में भइल ओही क्षेत्र में शुद्धोधन क यशस्वी पुत्र गौतमबुद्ध,पालिभाषा के”भात”संस्कृत क्षेत्र में आपन चारिका पूर्ण कइलं,जेके आधुनिक भाषा में “भोजपुरी क्षेत्र”कहल जाला। हालांकि ग्रियर्सन,उदय नारायण तिवारी, डा०बुकान्न वगैरह बिहार स्थित भोजपुर नामक गाँव के नाम पर भोजपुरी भाषा क नामकरण स्वीकार कइले हं।भोजपुर गाँव, भोजपुर नगर अउर भोजपुरी राज्य के नामकरण क आधार इ सब विद्वान धारा नरेश राजा भोज के वंशकरन द्वारा आवर्त मान के भोजपुर नामक स्थान से भोजपुरी भाषा क पैदाइश मनले हं। भाषाई विश्लेषण से ज्ञात होला…

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चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस

चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस बेशक आपन देश के पहिचान दुनियाँ जहांन में गाँवन के देश के रूप में ही बा। बाकिर आजादी के सात दशक के बादो गाँव आपन बुनियादी जरूरत चिकित्सा, शिक्षा आदि खातीर जूझ रहल बा। गोरन से त आजादी मिल गइल बाकि अपना देश के आपन लोगन के दबंगई से ना मिलल। राम राज्य के कल्पना खाली सपने बनी के रह गइल। राजनीति जनसेवा ना आपन घर भरे के साधन बनी के रह गइल बा, अधिकतर नेता जी लोग खातीर। कुछ लोग अपवाद हो सकता। सरकारी मुलाजिम…

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