भोजपुरी क सर्जनात्मकता

भोजपुरी समय के एह विशेष अंक में पढ़ीं हिंदी आ भोजपुरी के विद्वान, लेखक,विचारक आ कवि परिचय दास जी के आलेख। ’’हमरा लग रहल बा कि हम कवनो विजन देख रहल बानी अउर तू ओह विजन में ना बाड़ू । बाकिर वोह विजन के देखत-देखत हमरा मन में एगो तन्मय उन्माद उमड़ रहल बा जवन धीरे-धीरे हमरा पूरा देह, पूरी आत्मा में छा रहल जात बा अउर हम एगो एनरजेटिक बदरी से घिर गइल बानी। हमरा भीतर से प्रकाश के प्रभा मण्डल फूट रहल बा। एह दशा में शब्द बिल्कुल…

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