सेल्फी

आज जब कोरोना महामारी के दोसरका लहर में विश्व के संगे-संगे आपन देश भारत जूझ रहल बा। अइसन विपत्त काल में जब सभे अपना अपना घर में रहे खातिर मजबूर बा, आ अकूला रहल बा त रउआ लोग खातिर भोजपुरी समय लेके आइल बा हास्य-व्यंग्य के रस में सराबोर समसामयिक विषय पर भोजपुरी आ हिन्ही के प्रसिद्ध साहित्यकार आ छंद विधा के जानकार श्री अमरेंद्र कुमार सिंह जी के ई लेख ”सेल्फी” सेल्फी हम चाहे रउआ कइसन लागत बानी, ,ई जाने के सुरूआत कइसे भइल, येकरा बारे में पूरा जानकारी…

Read More

रूपिया के गाछ

रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले कि “भाई रामसेवक, सुनऽ अब हमनी के लइका सेयान होतारे सं। एकनी खातिर कुछ जोड़ बिटोर करे के चाहीं। तु का कहतारऽ बतावऽ” सीताराम के ई बात सुन के रामसेवक कहले कि “हो भाई, बात त तुं नीमन कहतारऽ, हमनी के कुछ करे के चाहीं। अब तुं बताव का करे के तहार विचार बा?”  एह बात पर सीताराम कहले कि “सुनऽ हम कहेब…

Read More

टूट गइल कंठी माला

ओह दिन एतवार रहे, आ हरमेशा खा-पीके आराम करत रहनी कि अचानके एगो फोन आईल। जब हम देखनी कि ई हमार एगो खास करीबी मने नाता के भतीजा के फोन बा त ओकर नंबर मोबाइल पर देखके हम ओकरा से बात करे के शुरू कइनी। हमनी चाचा-भतिजा में सर-समाचार भइल तले बात बतकही के बीचे ऊ कहलस कि “चाचा हम छठा महिना में बियाह करतानी”। ई सुनते हमार आंख कान आ मुंह खुलल के खुलल रह गइल। हमरा लागल कि हम कवनो सपना देखऽतानी का भाई? एह से हम पट…

Read More