“हमार बबुनी “

हमनी के आजी बहुत पढ़ल लिखल त ना रहली बाकि ठेठ भोजपुरी बोलत रही , हमार गांव गंगा के किनारे बा, जब हमनी सभे गांवे जाईं जा,  त गांव के शंकर के मिठाई, लकठो ( मीठा(गुड़) से निर्मित) , बताशा, फरही, भुंजा खाईं जा , जवन स्वाद एह सभ चीझन के खाए में आवत रहे , ऊ स्वाद चाऊमिन , बर्गर, पिज्जा में कहां? ई वाकया आज से चालीस बरिस पूर्व के बा, गरमी के छुट्टी में गांवे निकल जात रहनी हमनी सभ, ऊंहा पहुंचला के बाद हम दिन-रात धमाचौकड़ी…

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“माई-भउजी” भोजपुरी कहानी

“माई-भउजी” “दीपक अपना घर के दलानी में बइठल ,बैलवन के गर के घण्टी सुनत रहलन। मन अकुलाए–चल जाईं आ तनी बैलन के सुहरा आईं। पर लगले फेरु से बइठ जास,,,,,एहि उहापोह में रहलन की सामने से भउजी आवत लउक गइली आ इनकर रहल-सहल हिम्मत भी जबाब दे देलख। उ पाछा से उनका के जात देखत सोंचे लगलें,,इ उहे भउजी हई जे गोदी में खेलवले रहली ??? दीपक चारी बरिस के रहलें त उनकर भउजी बियाहे अइली।उ हरमेशा बइठल भउजी के निहारत रहस,उनके गोदी में सुतस, उनके से खाना खास,,उनके जरे…

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सेल्फी

आज जब कोरोना महामारी के दोसरका लहर में विश्व के संगे-संगे आपन देश भारत जूझ रहल बा। अइसन विपत्त काल में जब सभे अपना अपना घर में रहे खातिर मजबूर बा, आ अकूला रहल बा त रउआ लोग खातिर भोजपुरी समय लेके आइल बा हास्य-व्यंग्य के रस में सराबोर समसामयिक विषय पर भोजपुरी आ हिन्ही के प्रसिद्ध साहित्यकार आ छंद विधा के जानकार श्री अमरेंद्र कुमार सिंह जी के ई लेख ”सेल्फी” सेल्फी हम चाहे रउआ कइसन लागत बानी, ,ई जाने के सुरूआत कइसे भइल, येकरा बारे में पूरा जानकारी…

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रूपिया के गाछ

रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले कि “भाई रामसेवक, सुनऽ अब हमनी के लइका सेयान होतारे सं। एकनी खातिर कुछ जोड़ बिटोर करे के चाहीं। तु का कहतारऽ बतावऽ” सीताराम के ई बात सुन के रामसेवक कहले कि “हो भाई, बात त तुं नीमन कहतारऽ, हमनी के कुछ करे के चाहीं। अब तुं बताव का करे के तहार विचार बा?”  एह बात पर सीताराम कहले कि “सुनऽ हम कहेब…

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टूट गइल कंठी माला

ओह दिन एतवार रहे, आ हरमेशा खा-पीके आराम करत रहनी कि अचानके एगो फोन आईल। जब हम देखनी कि ई हमार एगो खास करीबी मने नाता के भतीजा के फोन बा त ओकर नंबर मोबाइल पर देखके हम ओकरा से बात करे के शुरू कइनी। हमनी चाचा-भतिजा में सर-समाचार भइल तले बात बतकही के बीचे ऊ कहलस कि “चाचा हम छठा महिना में बियाह करतानी”। ई सुनते हमार आंख कान आ मुंह खुलल के खुलल रह गइल। हमरा लागल कि हम कवनो सपना देखऽतानी का भाई? एह से हम पट…

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