बसंत पंचमी

अभी कुछे दिन त भइल जब ठंडा के ठकुराहट ठोक-पिट पर उतारू रहे। एकरा चपेटा में सभे रहे, का मानुष पोस प्राणी जिया जन्तु चिड़िया चूरूग सभे। कान के जरी से लेके गोड़ के एड़ी तक के हिला के राख देत रहे ई ठंढा। का कहल जाव ठंढा आवते जइसे शरीर कर्फ्यू के चपेट में आ जाला। मजाल बा कि शरीर के कवनो अंग कपड़ा के बाहर तनी झांक लेवे। ताका झाँकी करते ठंडा के लाठी चार्ज शुरू। शीतलहर रूपी लाठी क अइसन प्रहार की नानी इयाद पड़ जाइ तुरन्ते।…

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