बसंत के नांवे पाती

बीतत जाड़ के संगे संगे प्रकृति में, ऋतु में बदलाव आवे लागेला। ई बदलाव माघ के अंजोरिया में पंचमी जवना के बसंत पंचमीयो कहल जाला के संगे आउर जादा लउके लागेला। बाकिर आजकाल ई बदलाव गांव जवार से लगभग नदारद हो गइल बा। त आईं आज भोजपुरी समय पर पढ़ीं भोजपुरी आ हिन्दी के छंद विधा के सशक्त नांव अमरेंद्र कुमार सिंह के बसंत से ई निहोरा भरल पाती।  हरियर धरती के दगदग पीयर रंग में रंगेवाला, ठूँठ फेंड़ में पचखी फेकावेवाला, सकल चराचर में नया जोस खरोस भर देबेवाला…

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