आद्रा नक्षत्र पर विशेष

*आद्रा नक्षत्र पर विशेष* सूरज के आद्रा नक्षत्र में जाए के साथ-साथ ,एह नक्षत्र के शुरुआत हो जाला।ई हर साल 22 जून के 24 घंटा में कवनो समय चाहे भोर में, चाहे दुपहरिया में, चाहे सांझि ले एह नक्षत्र के शुरुआत होला।ई 27 नक्षत्र में से छठवां नक्षत्र ह। जइसे लइकी के अइला पर खीर पूरी बना के स्वागत कइल जाला, ठीक ओसही एह नक्षत्र के भी खीर पुरी के साथ स्वागत कइल जाला। ई नक्षत्र 15 दिन तक रहेला। कवनो कवनो जगह पर अतना दिन तक उत्सव के रूप…

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लुप्त होखत फगुवा

माघ के बसंत पंचमी से शुरु होखे वाला फगुनी बयार आ ओकरा संगे शुरु फगुआ गावे के परंपरा अब बिला रहल बा। एही सभ पर अपना लेखनी के जरिए आपन चिंता जाहिर कर रहल बानी भोजपुरी के सुप्रसिद्ध ई पतिरिका सिरिजन के उपसंपादक श्री तारकेश्वर राय तारक जी। सभके परनाम आ जय भोजपुरी आज गांव के फगुआ के बड़ा इयाद आवता। कबो नीक फगुवा गावल गाँव के इज्जत बढ़ावत रहे, अब उ परम्परा हांफत बीया ओकर दम बन्द होखहीं वाला बा।  अपना अस्तित्व के बंचावे ख़ातिर हाँथ गोड़ पटकत लउकतीया।…

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फगुआ के बदलत स्वरूप

फगुआ के बदलत स्वरुप फगुआ कहते जवन चित्र दिमाग में उभरेला उ ह भोजपुरिया फगुआ के सामूहिकता के भाव । फागुन गजिबे महीना ह । फगुनी बयार एगो अलगे उमंग आ ख़ुशी के अहसास करावेली । प्रकृति से लेके जनावर आ अदिमी तक के ऊपर एकर खुमारी के असर लउके लागेला । अधपक गहूँ, हरियर मटर, पियराइल सरसो के फूल से सजल खेत….ओने आम के मोजर प इतरात भौंर आ एने महुवा के रसगर कोंच, फगुनी बयार के साथे कोल्हुवारे से आवत नावा गुर के सोन्ह सुबास … मन मस्त…

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