चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस

चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस बेशक आपन देश के पहिचान दुनियाँ जहांन में गाँवन के देश के रूप में ही बा। बाकिर आजादी के सात दशक के बादो गाँव आपन बुनियादी जरूरत चिकित्सा, शिक्षा आदि खातीर जूझ रहल बा। गोरन से त आजादी मिल गइल बाकि अपना देश के आपन लोगन के दबंगई से ना मिलल। राम राज्य के कल्पना खाली सपने बनी के रह गइल। राजनीति जनसेवा ना आपन घर भरे के साधन बनी के रह गइल बा, अधिकतर नेता जी लोग खातीर। कुछ लोग अपवाद हो सकता। सरकारी मुलाजिम…

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उखड़त साँस-वेंटिलेटर पर आपूर्ति तन्त्र

उखड़त साँस-वेंटिलेटर पर आपूर्ति तन्त्र जग जाहिर बा कि हमनीके देश मे प्राणवायु कहाये वाला ऑक्सीजन के माने मेडिकल ऑक्सिजन के उत्पादन खपत से अधिका होला, एक महीना पहिले के उत्पादन के आंकड़ा एकर प्रत्यक्ष प्रमाण बा। लेकिन अइसन का भइल की एकर किल्लत आजकाल देश के मीडिया के सुर्खी बनल बा। समय पर एकर उपलब्धता ना होखला के चलते करीब सैकड़न लोग के असमय जीवन के दिया बुता गइल। स्थानीय प्रसाशन से लेके आला अधिकारी मुख्यमंत्री से लेके प्रधानमंत्री तक के एकर आपूर्ति पर नजर बा। उच्च न्यायालय भी…

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लौह पाद से प्रवेश करत विक्रम संवत 2078

विक्रमी संवत 2078 के शुरुआत हो रहल बा आज से, एह दिन के सनातन परंपरा के लोग आपन नववर्ष कहेलें। भारत के संगे-संगे दुनिया के कोना-कोना में रहे वाला सनातनी लोग एह दिन के हर्ष आ उल्लास से मनावेलें। त आईं रउओ पढ़ीं नववर्ष पर तारकेश्वर राय तारक जी के लिखल ई आलेख। आज हमनी के हिन्दू रीती के अनुसार नवका साल के समहूत हो रहल बा | विक्रम संवत् 2078 चइत अंजोर एकम, 13 अप्रैल 2021 अर्थात आज पहिला दिन ह नव सवंत्सर के। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार आजे…

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लुप्त होखत फगुवा

माघ के बसंत पंचमी से शुरु होखे वाला फगुनी बयार आ ओकरा संगे शुरु फगुआ गावे के परंपरा अब बिला रहल बा। एही सभ पर अपना लेखनी के जरिए आपन चिंता जाहिर कर रहल बानी भोजपुरी के सुप्रसिद्ध ई पतिरिका सिरिजन के उपसंपादक श्री तारकेश्वर राय तारक जी। सभके परनाम आ जय भोजपुरी आज गांव के फगुआ के बड़ा इयाद आवता। कबो नीक फगुवा गावल गाँव के इज्जत बढ़ावत रहे, अब उ परम्परा हांफत बीया ओकर दम बन्द होखहीं वाला बा।  अपना अस्तित्व के बंचावे ख़ातिर हाँथ गोड़ पटकत लउकतीया।…

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स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति

इतिहास साक्षी बा आजादी के बादो राजभाषा हिन्दी के पूरा देश मन से सुविकार ना कइलस। हिन्दी के बढ़ावा देखे खातीर समय समय पर सरकार पखवाड़ा प्रोमोशन इनाम जइसन कदम उठावते रहेले। एकरा बावजूद देश के दक्षिणी हिस्सा एकरा के अपना पर बलजोरी थोपले मानेला आ गाहे बगाहे बिरोध के स्वर उठवते रहेला। अइसन माहौल में पश्चिम बंगाल के चुनावी सरगरमी के केंद्र में हिन्दी आ ओहसे जुड़ल मुद्दा बा, त ई संकेत बा बदलाव के। गैर हिन्दी क्षेत्र में हिन्दी से जवन सौतिया डाह रहे ओमें कमी आ रहल…

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वैलेंटाइन डे – एगो नवका तेवहार

एगो नावा टटका पढल लिखल एडभांस युवा होखत समाज में छुवा छूत के बीमारी नीयन फइलत सात दिन से चले वाला प्रेम के समर्पित तेवहार के 14 फरवरी के दिन “वेलेंटाइन डे” के रूप में मनावे के परिपाटी जोर पकड़ रहल बा अपना देश मे। प्यार के समर्पित ई जश्न के ई स्पेशल ऑकेजन अब सप्ताह भर के उत्सव बन गइल बा जेकरा के वेलेंटाइन वीक के नाँव दिहल गईल बा। वेलेंटाइन डे के केहुके प्रति भी अपना प्रीत के दरसावे के परम्परा रहे यूरोपीय देश मे। जरूरी ना रहे…

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बदलत परम्परा

ए जमुना? जमुना…. कहाँ बाड़े रे बचवा? ई त बड़की माई के आवाज ह। आव बड़की माई आ जो… गोड़ धरतानी ये बड़की माई । अरे ! छोटकू तू कब अइलsह बचवा ? बाड़ न ठीक ठाक दुल्हिन आ बाल बच्चा के ना ले अइल हs ? बड़की माई सभे आपन पढ़ाई लिखाई आ काम धन्धा में बाझल बा । अम्मा के तबियत खराब के समाचार मिलल ह देखे आ गइनी हs । बड़ा निमन कइल हs ये बचवा । भगवान जीव जाँगर बनवले राखँस… बड़की माई कहलस । जीजी…

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देशी आंदोलन में लागल बिदेशी तड़का

agriculture in India

देश के बुढ़वा लोकतंत्र में पढ़ल लिखल साहब कहाये वाला समाज से सम्बन्ध राखे वाला लोग के जाहिल नीयन हिंसा के तसवीर पूरा दुनियाँ देखलस आ खुबे किरकिरी आ शिकायत भइल एह कृत्य के। सत्ता हस्तांतरण के समय अइसन उत्पात के नाजिर कमें देखे के मिलेला इतिहास में। शर्मसार भइल अइसन देश जेकर सम्मान आजुवो पूरा दुनियाँ करेला। अभी एह घटना जेहन से मिटल ना रहे । तबे दुनियाँ के बड़हन लोकतंत्र में नावा कृषि कानून के बिरोध में महीनन से देश के राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर धरना पर…

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घर बदलल जर बदलल – बदल गइल रहन

ई साँच बा कि समय के साथ सोच शरीर आसपास आम खास कुल्हिये कुछ ना कुछ बदली जाला । ई बदलाव देंखि के जीनिगी प्रभावित त होखबे करेले । देंखि ना पिछला कुछ साल में हमनीके समाज खुबे बदलल बा। बदलाव के बयार से शहर पर भार बढ़ल त उ गाँव की ओर लपकल पहिले त सिवान खेत बघार के घोंटलस आ आगे मुहे बढ़े के काम अबहियो चालुये बा। गाँव शहर भइल त माहौल बदलल आ माहौल के बदलाव से अदमी के सोच समझ बदल गइल, धन ज्ञान जजात…

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महामारी से कर्म स्थल पर बदलाव

सागर से मिले खातीर अपना उद्गम के स्थान से सागर की ओर बहत नदी के धारा के गति के कवनो बाधा रोके में कामयाब त होखबे ना करे । बाधा केतनो बड़ियार होखे उ आपन रास्ता खुदे बना लेले । हँ बाकी जवार भाटा के चलते नदी के बहाव के दिशा में परिवर्तन जरूर देखें के भेटाला। लेकिन समय के पहिया के गति के दिशा में बदलाव सम्भव नइखे। उ आगहीं मुहें बढेला , चाहे समय केतनो कटाह बा मुश्किल होखे, बीतेला जरूर। देंखि ना हँसत बिहँसत सामान्य जीनिगी के…

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