“माई-भउजी” भोजपुरी कहानी

“माई-भउजी” “दीपक अपना घर के दलानी में बइठल ,बैलवन के गर के घण्टी सुनत रहलन। मन अकुलाए–चल जाईं आ तनी बैलन के सुहरा आईं। पर लगले फेरु से बइठ जास,,,,,एहि उहापोह में रहलन की सामने से भउजी आवत लउक गइली आ इनकर रहल-सहल हिम्मत भी जबाब दे देलख। उ पाछा से उनका के जात देखत सोंचे लगलें,,इ उहे भउजी हई जे गोदी में खेलवले रहली ??? दीपक चारी बरिस के रहलें त उनकर भउजी बियाहे अइली।उ हरमेशा बइठल भउजी के निहारत रहस,उनके गोदी में सुतस, उनके से खाना खास,,उनके जरे…

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