संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार- डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ उत्तर भारत के मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के क्रांतिकारी संतकवि कबीर के जनम तिथि, जन्म स्थान, परिवार, भासा, मरन तिथि आदि के लेके बिद्वान लोग के एकमत नइखे। आ जदि कबीर अपने चाहे उनका समकालीन उनकर केहू भक्त नइखे लिखले त जनम तिथि, जनम स्थान, परिवार आ मरन तिथि के लेके ठोस सबूत जुटावल कठिन बा। अइसहूं पहिले सम्पन्न परिवार का लरिका के जनम पतरी ना बन पावत रहे। विरले केहू का घरे लरिका पैदा होखे त…

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‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

महान संत कवि कबिर दास जी के जयंती पर पढ़ीं डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ के कबिर दास के सगुनोपासना पर लिखल ई आलेख ‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ संत कबीरदास के बारे ई आम राय बा कि ऊ उत्तर भारत में निरगुन भक्ति धारा के पहिल संतकवि हवें। बाकिर हमरा समझ से कबीरदास खाली निरगुनिए भक्ति धारा के संत नइखन। ऊ सुगुन भक्ति धारा के भक्तो बाड़न। बाकिर ओह तरह से ना जइसे सगुन भक्ति धारा के संतकवि तुलसीदास बाड़न। तबो जे अपना नाम के पाछे दास लगवले…

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भोजपुरी काव्य में बिम्ब विधान – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

लॉकडाउन के दौरान घर में बइठल बइठल रउआ मन में भी कुछ भाव आवत होखी, जवना के रउआ कविता के रुप में कागज भा लैपटॉप या मोबाइल पर लिखत होखेब। आ अगर रउआ एह में कहीं कवनो परेशानी बा आ चाहे कविता कइसे लिखल जाओ, कविता में बिम्ब के प्रयोग कइसे होखे कि ऊ आउर सुघर बन जाओ। त रउआ खातिर ही ई पोस्ट बा जवन लिखले बानी भोजपुरी के विद्वान आ लंगट सिंह कॉलेज मुजफ्फरपुर में भोजपुरी भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष आदरणीय डॉ. श्री जयकांत सिंह ‘जय’ त पढ़ीं…

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