चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस

चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस बेशक आपन देश के पहिचान दुनियाँ जहांन में गाँवन के देश के रूप में ही बा। बाकिर आजादी के सात दशक के बादो गाँव आपन बुनियादी जरूरत चिकित्सा, शिक्षा आदि खातीर जूझ रहल बा। गोरन से त आजादी मिल गइल बाकि अपना देश के आपन लोगन के दबंगई से ना मिलल। राम राज्य के कल्पना खाली सपने बनी के रह गइल। राजनीति जनसेवा ना आपन घर भरे के साधन बनी के रह गइल बा, अधिकतर नेता जी लोग खातीर। कुछ लोग अपवाद हो सकता। सरकारी मुलाजिम…

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