“हमार बबुनी “

हमनी के आजी बहुत पढ़ल लिखल त ना रहली बाकि ठेठ भोजपुरी बोलत रही , हमार गांव गंगा के किनारे बा, जब हमनी सभे गांवे जाईं जा,  त गांव के शंकर के मिठाई, लकठो ( मीठा(गुड़) से निर्मित) , बताशा, फरही, भुंजा खाईं जा , जवन स्वाद एह सभ चीझन के खाए में आवत रहे , ऊ स्वाद चाऊमिन , बर्गर, पिज्जा में कहां? ई वाकया आज से चालीस बरिस पूर्व के बा, गरमी के छुट्टी में गांवे निकल जात रहनी हमनी सभ, ऊंहा पहुंचला के बाद हम दिन-रात धमाचौकड़ी…

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