अस्त हो गइल एगो नवहा सितारा: सुशांत सिंह राजपूत

केकरा मन में कौन खिचड़ी पाकता केहुके कइसे मालुम होई? काहे ना चेहरा बता देला दिल के हाल? ई चीला चीला के पूछ रहल बा प्रशंसक लोग हित मीत संगी साथी बहिन बाप आ अउरी परिजन लोग भी। जबतक दुनियाँ के पता चलो की का भइल कइसे भइल? तब तक ना खत्म होखे वाला सफर पर निकल गइलन सिने जगत के चमकत दमकत महेन्द्र सिंह धोनी के किरदार के पर्दा पर जीवन्त करे वाला सितारा सुशांत सिंह राजपूत। 34 साल के कमें उमीर में बम्बई के बाँद्रा में फँसरी लगाके जान दे दिहलन चार बहिन के इकलौता भाई, असमय माई के मउअत से अकेल पड़ल बाप के बुढौती के सहारा। एक बेर फिर अकेल क दिहलन दुःख के समुन्दर में डूबे खातीर। एगो जवान बेटा के चिता के आग लगावल केतना हृदय विदारक होला उ महसूस करे वाला चीज बा।

रील अउरी रियल लाइफ में जमीन आसमान के फरक होला ई बात कहे वाला ठिके कहेलन, ना त हर मुश्किल के हिम्मत से सामना करे के सिख देवे वाला, डटके परिस्थिति के सामना करे के परदा पर आपन फ़िल्म “छिछोरा” में अपना लइका के आत्महत्या के कोशिश पर बेर बेर समझावे वाला बाप अनिरुद्ध से अगर तनकियो भर सीखले रहितन त जिंदगी से हेतना जल्दी ना हार मान जइतन।

सुशांत के पहिचान मिलल भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के बायोपिक में उनकर किरदार निभाके, खुबे प्रसिद्धि बटोरलस ई कलाकार। सुशांत के कैरियर क ई पहिले फिल्म रहे जवन सौ करोड़ रुपिया इकठा कइलस। उनकर प्रोफेशनल लाइफ क बात कइल जाव त शो ‘किस देश में है मेरा दिल’ नाँव के शो से अपना कैरियर के समहूत कइलन  लेकिन पॉपुलैरिटी भेटाइल एकता कपूर के शो ‘पवित्र रिश्ता’ से जवन टिवी पर आवत रहे। छोट परदा से बड़हन परदा के सफर के पहिला फिलिम रहे ‘काय पो छे’ अउरी अन्तिम फिलिम साबित भइल ‘छिछोरे’।  ‘शुद्ध देसी रोमांस’, ‘एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘राबता’, ‘केदारनाथ’ अउरी ‘सोनचिड़िया’ जइसन फिल्मन में भी आपन भूमिका के अभिनय क्षमता से जीवन्त कइलन।

एम एस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी, से सोहरत बटोरे वाला बिहार के पूर्णिया जइसन छोट शहर से ताल्लुक रखे वाला सुशांत सिंह राजपूत के जन्म पटना में भइल रहे, बता दिहि की सुशांत सिंह राजपूत के शुरुआती दौर के पढ़ाई सेंट कैरेंस हाई स्कूल, पटना से भइल रहे आ आगे के पढ़ाई दिल्ली के कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल में भइल। दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिल इंजीनियरिंग के पढ़ाई कइलन। पढ़े में बड़ा मेघावी रहलन लेकिन जीनिगी के पढाई में शायद पाछे रहलन पाठ के ठीक से ना समझ पवलन, एहीसे जल्दीए हार मान गइलन।

जिंदगी त बहुत खूबसूरत होला लेकिन कड़वी सच्चाई इहो बा की एमें लगातार उतार चढ़ाव त आवते रहेला। कई बेर त आदमी खुद के खुबे बेबस लाचार महसूस करेला। अइसने कवनो कमजोर पल में उ जिंदगी से मुंह फेर लीहलन। अइसने कवनो मनोविकार से ही ग्रसीत होके ग्लेमर इंडस्ट्री के मशहूर अदाकार सुशांत आपन जान देवे क फैसला कइले होखीहन।

लेकिन काश! सुशांत रियल लाइफ में भी अनिरुद्ध बन बवतन। आत्महत्या से कवनो दर्द के अंत ना होला। हं उ दर्द दूसरा के जरूर दे जाला, उहो अपना परिवार के। आत्महत्या एगो कायराना कृत्य ह काश ई बात समझ पाइत समाज।

रियल लाइफ आ रील लाइफ में आकाश पाताल के अंतर होला, आत्महत्या ना करे खातीर आपन बेटा के परदा पर समझावे वाला किरदार काहें अइसन कदम उठवलस ई त पुलिसिया जाँच के बिषय बा? कवना तकलीफ के चलते ई कदम उठावे के परल? ई सवाल अनुत्तरित ही रह गइल । धन सम्पत्ति नाम ख्याति के अलावा भी कुछ अउर चीज के जरूरत बा शायद इन्सान के। समय के साथ मौत के रहस्य खुली का? हमनीके देखनी जा आ देखरहल बानी जा कोरोना महामारी के झेलत रोटी खातीर जद्दोजहद करत मेहनतकश समाज के लेकिन क लोग आत्महत्या कइल? काहे एतना कमजोर होखत जाता पढ़ल लिखल उन्नत सोच के मलिकार युवा पीढ़ी, सोचे वाली बात बा। बिघना के देहल पढ़ाई-लिखाई, सोहरत, बुलंदी, पइसा कुल्हिये पवला का बादो जिनगी में अन्हारा काहे बा? संगी-साथी, हित-नात आ करोड़ो लोगन के चहेता दुलरुआ, तबहुँ ई आदमी बेचारा काहे हो गइल। अन्त में दिल के कोना से आवाज उठता “अग्नि के हवाले करेले पहिले एक बार फेरू से नब्ज जाँच लेइब ये सरकार, कलाकार ई उम्दा ह कहि किरदार न निभावत होखे? ” कट कट के आवाज आई आ सुशान्त फेरू से हँसत उठ के खाड़ हो जइहन। असम्भव बा। जानतानी मौत त जीनिगी के अंतिम पड़ाव ह ओहिजा पहुँचला के बाद केहू वापीस नइखे आइल। इयाद में भले जियत रहो।

 

 

 

 

तारकेश्वर राय ‘तारक’

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