शिक्षक दिवस विशेष

शिक्षक दिवस पर पढ़ीं श्री संजय कुमार ओझा जी के ई आलेख
8 Fun Games And Activities To Celebrate Teacher's Day This Year
चित्रः गुगल से साभार
जय गुरु जी
आज शिक्षक दिवस ह। माने वोह व्यक्तित्व के इयाद करे के एगो दिन, जे हमनी के व्यक्तित्व के बनावे आ बढ़ावे में सबसे अहम भूमिका निभवले बा।
भारतीय संस्कृति में सबसे पहिला शिक्षक माई के मानल गइल बा। “माई” जे अपना बच्चन के भबिस बनावे खातिर आपन सब कुछ निछावर क देली। अंगुरी ध के चलावे से ले के उठल, बइठल, खाइल, नहाइल, इहां ले कि परिवार – समाज में हर इन्सान के चिन्हे, जाने अउर पहिचाने के सीख माइये से मिलेला। आज चाहे जबाना केतनो एडवांस हो गइल बा, जवना लइकन का माई से सीखे के नइखे मिलत, ओकरा व्यक्तित्व के संतुलित विकास नइखे होत। रउरा अपना आसपास नजर डालब त ई बात प्रमाणित हो जाई।
अगिला शिक्षा विद्यालय में मिलेला, जवन रोज का ज्ञान अउर बुद्धि विवेक के विस्तार में सहायक होला। आगे चल के तकनीकी भा प्रशासनिक दक्षता एही ज्ञान से मिलेला। ई ज्ञान गुरु जी लोग का माध्यम से मिलेला। चाहे आज स्कूल से लेके विश्वविद्यालय तक के गुरु जी लोग होखे भा पुरातन सभ्यता का गुरुकुल के महर्षि विश्वामित्र, महर्षि परशुराम, संदीपनी मुनी आ द्रोणाचार्य जइसन गुरु। गुरु का हमेशा समाज अउर समय का अनुरुप जागरुक रह के अपना शिष्य के निष्पक्ष भाव से शिक्षा देवे के चाहीं।
ई हमनी के सौभाग्य बा कि हमनी पूर्वांचल का धरती पर जन्म लेले बानी, जवन अपना ज्ञान खातिर जानल जाला।
ई पूर्वांचल के माटी ह,
ज्ञान जवना के थाती ह,
जब बढ़ेला अंहरिया चहूं ओर,
राह देखावत सुरुज के जोती ह।
ई उहे धरती ह जवन महाबली, महाज्ञानी लंकेश रावण का पाप से धरती के मुक्ति दिआवे खातिर भगवन श्री राम के ओह तरे से शिक्षा दिहलन कि रावण से हर मोमिला में आगे रहस। ओह उच्च शिक्षा के संस्कारे रहे जवन मृत्यु शय्या पर पड़ल रावणो से शिक्षा लेवे के प्रेरणा दिहलस।
दूसर तरफ चाणक्य जइसन गुरु जे एगो अनजान बालक के अइसन शिक्षित कइल कि उ भारत के विजय पताका दूर दूर ले फहरावल। कहां ले कि विश्व विजय का घमंड में चूर सिकन्दर के सपना चकनाचूर क दिहल। ई पूर्वांचल का ज्ञान के जोती ह जवन बौद्ध धर्म आ जैन धर्म का रूप में देश दुनिया में जगमगाता आ सिख धर्म में गुरु गोविंद सिंह जी का बाद केहू ओह स्तर के ज्ञानी ना भइल कि गुरु परम्परा आगे बढ़ो।
आज पूर्वांचल में ज्ञान का अलावे कुछ नइखे। ना औद्योगिक विकास, ना खेती के अनुकूल सुविधा भा सरकारी सहयोग। इहे कारण बा कि आज बहुत जादे पलायन हो रहल बा। तबहूं पूर्वांचल के लोग अपना ज्ञान का बल पर जहां बाड़न झण्डा गड़ले बाड़न। आजो पूर्वांचल के लोग, देश – विदेश में सबसे ज्यादा शिक्षक का रुप में ज्ञान बांट रहल बा। तकनीकी, प्रशासनिक, वाणिज्यिक हर क्षेत्र में पूर्वांचल के लोग अपना दक्षता के साबित क चूकल बा।
ई त कुछ थोड़हीं बा, जवन लिखा गइल। गुरु परंपरा के निभावे में हमनी पहिलहूं आगे रहनी, आजो बानी आ भबिसो में रहब। बस जहां तक सम्भव होखे, अपना जाने वाला लोग में आपन ज्ञान आ अनुभव बांटत रहीं। तबहीं ई सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ समृद्ध होखी।।
आज एतने, फेर कब्बो दोसरा विषय पर लिखाई।
 सब गुरु जी लोग के सादर प्रणाम
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संजय कुमार ओझा
गाँव+पोस्टः धनगड़हां
जिलाः छपरा, बिहार

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