भोजपुरी में शब्द के ठीक पहिचानल जाव आ ओही अनुसार लिखल जाव उहे ठीक रही- दिनेश पांडेय

भाषा विचार

ढेर लोग कहेलें कि भोजपुरी में जवन बोलल जाला ऊहे लिखल जाला। ई बात पूरा साँच ना ह। भाषा के संबंध मूलतः ध्वनि से ह। ध्वनि पदार्थ में कंपन से उत्पन्न उर्जा के एगो रूप ह। ई उत्पन्न होके फैलजाला, ससर जाला आ फेरु रूपांतरित हो जाला। भाषा बिचार के आदान-प्रदान के माध्यम ह। बिचार के सुरच्छित राखे के जरूरत से लिपि के बिकास भइल जवन मूल ध्वनि बदे रूढ़ि से प्राप्त लेखन चिन्ह ह। हर भाषा में बोले आ लिखे में एकदम से सटीकता ना रहे बलु ऊ नगीची आ बिकल्प के ममिला ह। अंग्रेजी में future, nature, calm, calf जइसन त हिंदी में राम, काम, दाम जइसन अकारांत शब्दन के परतुक बाड़न।
भोजपुरी लेखन में अइसन देखल जाला कि कुछलोग लेखन में हावा (हवा), दावा (दवा), हामार (हमार),
राती खानी (राति खन) जइसन प्रयोग अबाध रूप से करे लागत बाड़ें।
एकर ओजह ई लागऽता कि भोजपुरी के ‘अ’ ध्वनि ना हिंदी का तरे सपाट ह, ना बंगला का तरे वर्तुल (गोल)। बंगला में ‘अ’ बोलत खने ‘ओ’ जस ध्वनि सुनाई पड़ेला- ‘आमि खाबो (खाब)’। एगो रोचक प्रसंग ह कि एगो गैर बंगला भाषी सज्जन किहाँ उनकर बंगाली मित्र के नौकर निमंत्रण दे गइल कि मालिक घरे ‘पूजोन – भोजोन’ बा। रउआ सपरिवार निमंत्रित बानीं। अब इहाँ का बुझनीं कि आजु के सुजोग बड़ा नीमन बा पूजा के बाद भोजन। भजन प उनकर धेयान ना गइल। त का भइल होखी, अनुमान क लिहल जाव।
भोजपुरी के ‘अ’ ईषत् वर्तुल ह, यानि थोरहन गोल ‘अॅ’ जइसन, बिल्कुल बंगला आ हिंदी के बीच के चीज। एसे अकार ध्वनि के उच्चारण में आकार ध्वनि के भ्रम पैदा हो जाला। एही ओजह से हवा, दवा, हमार जइसन शब्द हावा, दावा, हामार सुनाई दे जाला। लेखन में एकर मूल सरूप राखल ही सही ह।
आ ना त हेहनी के के का लिखाई?
बात्। पन् रह। उज्बक्। रख्वारी। अज्माइस। चल्बाजी। अल्गर्जी। नकल्ची। चप्लूसी। डुब्की। चउथ्का। सुद्खोर। लड़क्पन। बुक्नी। अग्ला।
कतिना ले कहीं। उच्चारण के अनुसार त असहीं लिखाई नू।
ना हरगिज ना शब्द के ठीक पहिचानल जाव आ ओही अनुसार लिखल जाव उहे ठीक रही।

दिनेश पाण्डेय, पटना

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