सेल्फी

आज जब कोरोना महामारी के दोसरका लहर में विश्व के संगे-संगे आपन देश भारत जूझ रहल बा। अइसन विपत्त काल में जब सभे अपना अपना घर में रहे खातिर मजबूर बा, आ अकूला रहल बा त रउआ लोग खातिर भोजपुरी समय लेके आइल बा हास्य-व्यंग्य के रस में सराबोर समसामयिक विषय पर भोजपुरी आ हिन्ही के प्रसिद्ध साहित्यकार आ छंद विधा के जानकार श्री अमरेंद्र कुमार सिंह जी के ई लेख ”सेल्फी”

सेल्फी

हम चाहे रउआ कइसन लागत बानी, ,ई जाने के सुरूआत कइसे भइल, येकरा बारे में पूरा जानकारी हमरा नइखे, बाकिर नारद मोह में पानी में मुँह देखे के प्रसंग बा, येहसे ई बात क्लीयर हो जात बा कि आपन रूप देखेके प्रथा पौराणिक काल से चलत आवत बा। आगे चलिके ऐनक, मूर्ति , तैलचित्र, पेंटिंग्स, पोट्रेट, फोटो जस कतने उपाय आइल जवना के बारे में सभे जानत बा। जादा भूभिका बान्हल हम नइखीं चाहत, आ अब सीधे हम अपना सेल्फ बिसय वस्तु प आवत बानी••••••••••सेल्फी।

आपन फोटो अपने से खीचें के आविष्कार अमेरिका के राॅबर्ट कर्नेलियस 1830 ईस्वी सन् में सेल्फ (खुद) के सेल्फ से फोटो लेके कइले रहलनि। उनुकर सोच का रहे ई त पूरा पता नइखे, बाकिर ई बात सभे जानत बा कि आगे चलि के आदमी के चाल रहन सहन सभ बदलल । सेल्फ गते गते सेलफिश में बदल गइल , आ सेल्फिश लोग सेल्फी लेबे लागल।
सेल्फी सब्द अतना प्रसिद्ध बा कि रंगरेजी के ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी, 2013 ईस्वी सन् में, येकरा के ” वर्ड ऑफ द ईयर ” के खिताब दिहलक। येकर प्रभाव ? पूछीं जिन।
मंगरू के भँइस पाड़ा देले बिया, कालहु सँझिली बेर ह्वाट्स्प प उनुकर मेहरि शेयर कइले रही, झूलन अपना होखेवाली समधिन साथे फेसबुक प वायरल बारन। सरजू भइया सेवा समिति चलावेलनि, कवनो गरीब के फटही धोती दिहन तबो सेल्फी चाहीं उनुके। रमेशर बो भउजी रमेशर भइया साथे,  नेताजी कोरोना के मास्क बाँटत, अउर त अउर सिंटूआ अपना माई के आगि देत सेल्फी•••••••अब कतना गिनवाईं।

सेल्फी के महिमा अपरंपार बा, सेल्फी के बहार बा, सेल्फी प मार बा, सेल्फी फंक्सन के सार बा। कहे के मतलब ई बा कि सेल्फी आजु मर्द, औरत, सहरी, देहाती, लइका, जवान बुढ़ सभे के मन में घर क गइल बा, ई व्यापक चीझु बा, ग्लोबल जीनिस बा।  बिना येकरा के रउआ के जानी। आईं अब समझीं येकर अर्थशास्त्र । मोबाईल फोन कंपनीज आपन सेल बढ़ावे खातिर नाया नाया टूल्स/एप्स देबेलिन सन । येही क्रम में मोबाईल फोन में सेल्फी आइल। बाकिर लोग कम चाल्हाक नइखे नु, सेल्फी से सेल्फ के विज्ञापन होखे लागल आपन बिजनेस बढ़े लागल।
अब देखिना, हमरा बगले में रहेलनि बुधन चाचा, हमनी खातिर त ऊ चच्चे बारन, बाकिर फेसबुक , सोशल मीडिया बतावेला कि ऊ बड़का सिलेब्रेटी हउवन। गरदन में एक पंजा माला, कान्हि प लमहर गमछा, आ लाल पीयर चमकउआ कुरतावाला सेल्फी•••••
दसईं भइया भोजपुरी के नामी गिरामी कर्ता-धर्ता, ठेहूना के नीचे तक कुर्ता अउर चाकर पाढ़वाली धोती, हर दू दिन प एगो पोस्ट फेकलनि साथे साथ आपन सेल्फी। बुझाइबे ना करे कि आपन परचार करेलनि कि भोजपुरी के।
”पर उपदेस कुसल बहुतेरे”, छोड़ीं दोसरा के बात। अब हमरे के लीं, उलूल – जुलूल कविता, गीत, ग़ज़ल लिखत रहिना, पोस्ट करत रहिना, बाकि लाइक, काॅमेंट मिलत रहो येह खातिर सेल्फी जरूर डालिना कि लोगवा हमरो के जानो।

अमरेन्द्र कुमार सिंह
आरा

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