बहुते अनोखा बा बहत्तरवां गणतंत्र दिवस

कोविड-19 से उपजल समस्या अउरी कुफुत के बीच देश आपन 72वां गणतंत्र दिवस मना रहल बा। परम्परा के निभावे के त बटले बा लेकिन पारम्परिक भब्यता एह बेर देखे के ना मिलल । दिल्ली में आयोजित मुख्य परेड में सामिल होखे वाला जवान आ झांकी के गिनती भी पहिले के मुकाबला आधे बा अउरी परेड हर साल लाल किला पर खत्म होला एह बेर नेशनल स्टेडियम पर ही खतम हो गइल । जवन पूरा दूरी के आधे रहे। सरकारी फरमान के चलते दर्शक के संख्या भी सीमित रहे।

ए बेर के गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2021 बहुते चीज के चलते खास रहल। कई गो अनोखा रेकार्ड बनल। पांच दशक बाद कवनो बिदेशी मेहमान से महरूम रहल ई राष्ट्रीय पर्व, हं पड़ोसी देश बांग्लादेश के सैनिक दस्ता जरूर परेड में आपन जलवा देखवलस। सबेरे दुनियाँ राजपथ पर जवान के परेड देखलस त दुपहरिया बाद बाहरी दिल्ली में किसान संगठन द्वारा प्रायोजित ट्रैक्टर परेड भी देखलस।

अपना देश के इतिहास में ई पहिले मोका बा जब किसान के हेतना बड़ संख्या गणतंत्र दिवस के मोका पर आपन ट्रैक्टर परेड निकाल रहल बा । जेमा करीब 2 लाख ट्रैक्टर के साथे अन्य वाहन भी सामिल बा । दिल्ली पुलिस कुछ शर्त पर परेड के इजाजत दिहलस । शर्त रहे तय रूट पर ही परेड होखो । भड़काऊ भाषण अउरी हथियार के मनाही रही। 5 हजार ट्रैक्टर ही परेड में शामिल होखी। दुपहर 12 बजे से साँझी के पाँच बजे के समय नियत कइल गइल। ना त ट्रैक्टर खाड़ होखी ना त धरना प्रदर्शन होखी।

दिल्ली से लागत सीमा पर करीब करीब 28 किलोमीटर के लमहर दूरी पर ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर नजर आवता। लागता ट्रैक्टर के महाकुम्भ लागल बा। जहाँ पूरा देश 72वां गणतंत्र दिवस मना रहल बा ओहिजे बाहरी दिल्ली में किसान ट्रैक्टर परेड निकाल रहल बा। भारत के गणतंत्र के इतिहास में पहिले मोका बा जब राष्ट्रीय पर्व के दिन कवनो मांग के लेके बिरोध प्रदर्शन हो रहल बा।

किसान आंदोलन तय रुट से हट के अराजक हो गइल। लालकिला के एरिया जवन आज आम आदमी खातीर बन्द रहेला । ओहिजा आन्दोलनकारी कानून के तोर के ना सिर्फ ढुकलन बल्कि 15 अगस्त के प्रधानमंत्री जवना जगह पर झंडा फहरावेलन ओहिजा उपद्रवी बल पूर्वक चढ़ के किसान यूनियन के झण्डा फहरा दिहलस । डंडा तलवार भांजत प्राचीर पर चढ़ के तोड़ फोड़ के वीडियो समाचार न्यूज चैनल पर साफ देखल जा सकत बा। पुलिस बल प्रयोग क सकत रहे हथियार के प्रयोग कर सकत रहे लेकिन संयम के प्रयोग करत सहानुभूति के दामन छोडलस ना। देश खातीर अपना गणतंत्र लोकतंत्र खातीर ई बहुते शर्म के बात बा ।

एह पावन मोका पर देश आपन आन बान शान सैन्य शक्ति आधुनिक साजो सामान सुख समृद्धि के प्रदर्शन करेला जेकरा के पूरा बिश्व देखेला। किसान के एहतरह के बिरोध प्रदर्शन एकरा रंग के फीका कर रहल बा। इहे हमनीके संविधान के खूबसूरती ह की एकरा लागू होखे के दिन ही आंदोलन रत किसान शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करे के संवैधानिक अधिकार के बेजा इस्तेमाल कर रहल बाण। देश के ई पहिला बिरोध प्रदर्शन नइखे एकरा पहिले भी जेपी मोभमेट, महेन्द्र सिंह टिकैत के अगुवाई में किसान आंदोलन, अन्ना आंदोलन अउरी बहुते आंदोलन भइल रहे लेकिन कवनो आंदोलन में राष्ट्रीय पर्व के दिन के बिरोध के दिन के रूप में ना चुनल गइल रहे।

लोकतंत्र में बिरोध के हक बा लेकिन उ हठ ना बने के चाही। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एह कानून पर डेढ़ बरिस खातीर रोक लाग गईल। जांच खातीर कमेटी के गठन हो गइल। सरकार भी सहमत बा अगिला आदेश तक कानून लागू ना करे खातीर। फेरु आंदोलन जारी राखे के ज़िद्द हठ अधिका लागत बा । कायदा त ई कहता न्यायपालिका पर भरोसा क के शासन के समय दियाव आपन आश्वासन के पूरा करे बदे। ई ना क के खाली कानून रद्द करे के हठ पर अड़ल बा किसान संगठन।

आंदोलन के जल्दी खत्म होखे के त असार नजर नइखे आवत। बातचीत पर भी बिराम लाग गइल, सरकार गेना किसान संगठन की ओर डगरा देले बिया । किसान संगठन तय करी की अब बातचीत के एजेंडा का रही ? नीक बात त ई कहाइत की किसान संगठन 26 जनवरी के दिन के ट्रेक्टर रैली खातीर ना चुनित, एसे राष्ट्र के गरिमा अउरी आंदोलन के पवित्रता दुनो बनल रहित।

गणतंत्र दिवस के दिन ई जरूर चर्चा होखे के चाही की 26 जनवरी 1950 के लागू भइल संविधान के 71 बरिस पूरा हो गइल । कुल तय लक्ष्य भेटाइल का ? जबाब त ना ही बा। भारत आजुवो समाजिक लोकतंत्र आर्थिक लोकतंत्र के मूल स्वरूप के स्थापित करे में कामयाब नइखे भइल। राजनीतिक लोकतंत्र के ही हमनीके गणतंत्र मान लिहनी जा। सात दशक बाद जहवाँ एकता, बिकास, सम्पन्नता लउके के चाही न्याय सर्व सुलभ होखे के चाही। ओहिजे समाजिक विभाजन भइल बा । बिकास कुछेक क्षेत्र कुछेक वर्ग तक ही सिमटल बा । आर्थिक असमानता के खाई दिन प दिन चाकरे होत जाता। न्याय रसूखदार के पाकिट में बा । सभके नसीब नइखे। आम आदमी त मुड़ी नवाक़े झुकले बा कबो सबल रसूखदार के आगे, कबो सत्ता के, कबो शासन के आगे, कबो बेवस्था के आगे, कबो ……. । देंखि कहिया भेटाला सही मायने में गणतंत्र।

गण अउरी तंत्र दूनों स्वस्थ रहे, खुशहाल रहे,एक दूसरे के पर्याय रहे, एहि सदिच्छा के साथे गणतंत्र दिवस के अनगिनत शुभकामना अउरी बधाई।

 

 

 

तारकेश्वर राय ‘तारक’

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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