पहिला दिने करीं माई शैलपुत्री के पूजा

आज नवरात्र के पहिला दिन हऽ। एह अवसर पर भोजपुरी समय डॉट कॉम अपना पाठकल खातिर लेके आइल बा एगो विशेष श्रृंखला। एह श्रृंखला में हमनी रउआ के रोज बताएब देवी के नव स्वरुपन में से एगो स्वरुप के बारे में। एकरा संगे-संगे माई के ओह सरुप के कइसे पूजा कइल जाला, का मंत्र बा का विधान आ का फल बा ई सभ कुछ रउआ एजा पढ़े के मिली। त देर कवना बात के आईं आज जानल जाव माई के पहिलका सरुप देवी शैलपुत्री के बारे में।

जइसे कि रउआ सभे जानतानी कि आज नवरात्री के पहिलका दिन बा त एह दिने जगतजननी माई दुर्गा जी के पहिलका स्वरुप देवी शैलपुत्री के पूजा कइल जाला। देवी शैलीपुत्री पर्वतराज हिमालय के बेटी हईं। एही कारण से माई के एह स्वरूप के शैलपुत्री कहल जाला। शास्त्रन में अइसन लिखल बा कि देवी शैलपुत्री के आराधना कइला से हमनी के सभ मनोवांछित फल प्राप्त कर सकीले सं। माई शैलपुत्री के प्रसन्न करे खातिर ऊंहा के पूजा-अर्चना वैदिक मंत्रन से करे के चाहीं। माई के जवन ध्यान मंत्र बा ओकर जाप कइला से माई जल्दी से अपना साधक पर खुश होखीले आ उनकर सभ कामना पूरा करीले। नवरात्र के पहिलका दिने साधक के मन मूलाधार चक्र में रहेला। त आईं जानल जाव देवी शैलपुत्री के पूजा के बारे मेः

कइसन बा माई के स्वरुपः देवी शैलीपुत्री पर्वतराज हिमालय के बेटी हईं। एही कारण से माई के एह स्वरूप के शैलपुत्री कहल जाला। इहां के वृषभ माने बैल पर सवार अपना दहिना हाथ में त्रिशूल बा जवन रउआ भक्तन के अभयदान देवेला ओहिजा पापियन के विनाशो करेला। माई के बावां हाथ में जवन कमल के फूल शोभा दे रहल बा ऊ ज्ञान आ विश्व शांति के प्रतिक हऽ। चूंकि माई के उत्पत्ति शैल यानी पत्थर से भइल बा आ पत्थर के दृढ़ता आ स्थिरता के प्रतिक मानल गइल बा, एही से माई शैलपुत्री के मानव जीवन

 

में स्थिरता आ दृढ़ता प्राप्त करे खातिर पूजा कइल जाला।

पूजा विधिः  सबसे पहिले माई शैलपुत्री के फोटो स्थापित करीं आ ओकरा नीचे लकड़ी के चउकी पर सफेद(उजर) कपड़ा बिछाईं। एकरा ऊपर केशर से ‘शं’ लिखीं आ ओकरा ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका धरीं। एकरा बाद हाथ में उजर फूल लेके शैलपुत्री देवी के ध्यान करीं। ध्यान करे खातिर रउआ नीचे दिहल मंत्र के पढ़ीं। मंत्र एह प्रकार से बा-

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।

मंत्र के संगहीं ही हाथ के फूल मनोकामना गुटिका आ माई के फोटो के ऊपर चढ़ा दीं।

 

एकरा बाद माई के प्रसाद अर्पित करीं आ माई शैलपुत्री के मंत्र के जाप करीं। एह मंत्र के जाप कम से कम 108 बेर करे के चाहीं। मंत्र एह प्रकार से बा-

ॐ शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

मंत्र संख्या पूरा होखला के बाद माई के चरण में अपना मनसा के व्यक्त करीं आ माई से ओह मनसा के पूरा करे के प्रार्थना करीं। एकरा बाद माई के आरती आ कीर्तन करीं। इहंवा ध्यान राखए वाला विशेष बात ई बा कि मंत्र के जाप पूरा कइला आ प्रार्थना कइला के बाद माई के भोग जरुर अर्पित करीं।

माई के भोगः माई के उजर रंग बहुत पसंद बा। एह से माई के पूजा में साधक के माई के उजर सामान के भोग लगावे के चाहीं। जइसे दूध से बनल खीर, बर्फी, आदि। एकरा बाद रउआ माई के ध्यान मंत्रो के जाप कर सकत बानी जवन कि एह तरे बा-

ध्यान मंत्र

वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌। वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥

अर्थात- सभ इच्छित मनसा के पूरा करे वाली हे देवी रउआ के परनाम बा। हे मइया अर्धचंद्र रउआ मस्तक पर सुशोभित हो रहल बाड़े। हे देवी शैलपुत्री रउआ वृषभ पर विराजित बानी। आ रउआ दहिना हाथ में त्रिशूल बा आ बावां हाथ में कमल के फूल शोभा दे रहल बा। रउआ नवदुर्गा में प्रथम दुर्गा बानी। रउआ के नमस्कार बा।

नवरात्र के पहिला दिने माई शैलपुत्री के स्तोत्र के पाठ कइला से साधक माई के अत्यंत प्रिय हो जाले। माई के स्तोत्र पाठ एह प्रकार से बा-

प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।

धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥

त्रिलोकजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।

सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥

चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।

मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

आज खातिर एतने। काल्ह फेर मिलल जाई माई ब्रह्मचारिणी के उपासना विधी के संगे।

जय मइया

राम प्रकाश तिवारी

गाजियाबाद

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