निर्भया के दोषी नीर-भय के क़िस्सा खत्म

 निर्भया के चारु दोषियन के आज सबेरे फांसी भइला के बाद जहां सभ लोग एकरा के निर्भया के मिलल इंसाफ कह रहल बाड़न ओहिजा एगो प्रबुद्ध भोजपुरिया आ सिरिजन ई-पतिरिका के उपसंपादक तारकेश्वर राय जी के का विचार बा जानीं एह लेख में।

निर्भया केस

खिलाड़ी उ होला जे खेले में माहिर होला या त खिलाड़ी होलन नेता राजनेता जे राजनीति के अइसन माहीर खिलाड़ी होलन की जनता उनकरा भाषण पर लट्टू हो जाले । आ आपन बहुमुल्य मत उनकरा झोरी में डाल के जितावेले आ फेर पाँच बरिस उनकरा पाछे पाछे घुमेलें ओह सपना के यथार्थ में बदले ख़ातिर ।

लेकिन जीनिगी में पहिली बार ई देखे के हमरा मिलल की फाँसी पर लटके वाला भी बिना कवनो भय के नीर-भय बिना कवनो लाज के कानून के सहारे ही कानून के लटका सकता । खूबे लटकवलन स । निर्भया के साथ बर्बरता करेवाला ई जानत रह सं की एक न एक दिन त सूली पर चढ़हीं के बा एकरा बावजूद भारतीय संविधान के मार्फ़त मिलल कानूनी अधिकार के मोहरा बना के न्याय के साथ खूबे खेलवाड़ कइलन स खूबे घिंचलन स समय के । फास्टट्रैक कोर्ट में मामिला चलला के बावजूद करीब आठ बरिस खींचल । मिलार्ड पर,आ न्यायालय के मजबूरी प खूबे हँसलन स ।

निर्भया के माई बाबू परिजन के अलावा आम आदमी के भावना के भी ठेस अउरी कष्ट के कवनो सीमा ना रहे जब फाँसी तीन तीन बेर टल गइल । सात-आठ साल के श्रम परयास से मिलल जीत यथार्थ बनत बनत रह जात रहे । अपराधी अउरी उनकरा से जुड़ल वकिलन के खुशी निर्भया के आतमा के त छोड़ी जन मानस के भी आक्रोश से भर दे , आक्रोश के अलावा चारा भी त कवनो ना रहे । ओह अपराधिन के जीत के मुस्कराहट देखी के के अइसन पथर दिल होइ जेकरा चेहरा खुनुष के मारे लाल ना हो जात रहे । पर न्यायप्रिय समाज के कानून अपने बनावल मकड़जाल में उलझ के रह जात रहे । निर्भया के अपराधी नीरभय हो के कानून के पेचीदगी के फायदा उठवलन स । कानून से उ मनभर खेललन स, काहें ना खेलीहन स उ अधिकार भी हमनीके न्याय बेवस्था के ही दिहल ह । पीड़िता से अधिका दोषी के अधिकार के चिन्ता ?उहो एतना कसाई नियन अपराध करे वालन के साथ ? वाह रे कानून आ वाह रे कानून के बनावे वाला ।

जदी अपराधी के सुधरे खातीर बचे के मोका भेंटा जाव त उ अपराधी कइसन ? ई कुल्हिये त केतना क्रूर आ जघन्य अपराध के अंजाम देले बाड़न स फिर भी हमनीके बेवस्था एहनी के भी अइसन कानूनी सुविधा दे रहल बिया नमन बा कानून के ई महानता के देवत्व भाव के । अपराध साबित भइला के बादो जघन्य अपराध करेवालन के एतना सुविधा मोका काहें ?

कानून के बनावे वाला आ मिलार्ड के एह बिषय पर गमभीरता से सोंचल जरूरी बा । अइसन जानवरन के कानून ब्यवस्था से खेले के इजाजत बिल्कुल ना मिले के चाही । जेतना कानून के कमी बा उ जरूर दूर होखो । फिर कवनो निर्भया के न्याय ख़ातिर लम्बी लड़ाई ना लड़े के परो ।

बकरा के माई कब तक खैर मनाई एक ना एक दिन त कटही के बा । लेकिन बचे के कुल्हिये उपाय भइल । अपराधी के परिवारो भी जी जान से कोशिश कइलस की सजा कम हो जाव । लेकिन सच्चाई के सुविकार त करही के परी । परिवार के भी सोंचे के जरूरत बा कि उनकर परवरिश में ही कुछ कमी रह गइल की उनकर सन्तान ई कर्म क दिहलन स ।

राजनीति के गलियारे से ई आवाज अक्सर सुनाला की ” भारत के महान बनावे के बा” भारत कवनो आदमी ह का ? की आचरण सँस्कार डाल के महान बनावल जा । सही नारा त ई होखे के चाही की “हमनीके अपने आप के महान ” बनवला के जरूरत बा । देश के रहवइया महान होखीहन त देश खुदे महान बन जाइ । बेटी से अधिका बेटा पर धियान देवे के जरूरत बा ओकर रहन सहन संगी साथी के खेयाल रखला के ताक बा। घर परिवार से ही सँस्कार के बीज डलाव बेटन में ।

घरे के चिराग से घर मे आग लाग रहल बा । कानून के रखवाला पंडित जानकार ही अपराधी के बचावे में आपन कुल्हिये ज्ञान के झोंक दे तान । ई भुलाये के ना चाही की ई कचहरी के ऊपर भी ऊपरवाला मलिकार के कचहरी बा । उ न्याय जरूर करीहन । देर हो सकत बा लेकिन अंधेर ना होइ । ईहे बिश्वास निर्भया के परिजन के थाके ना दिहलस ।

निर्भया हमनीके बिल्कुल निराश नइखी जा तू त मलिकार के पास पहुंचे गइल बालु आ तोहके पहुंचाए वाला भी आज तोहरा किहे पहुँचे वाला बाड़न स । सात बरिस तीन महीना बाद आज हमनीके एहिजा इन्हन के फाँसी प झूलत देखत बानी जा आ तू ऊपर से ई नजारा जरूर देखत होइबू । देर जरूर कुछ भइल लेकिन अंत मे न्याय के जीत भइल । अपराधी के अपराध के उच्चतम सजा मिलल । आज तोहार आत्मा के शान्ति जरूर मिलल होखी । आज खाली चार आदमी के ही फाँसी ना भइल । चार गो माई के दूध बदनाम भइल । परवरिश पर धब्बा लागल । चार गो माई के भी फाँसी भइल । जाए वाला त पशु तमाम हरकत क के एह दुनियाँ से चल गइलन स पीछे छोड़ गइलन स एगो बदनाम ज़िन्दगी । जेके परिजन के जिन्दगी भर भोगे के परी । आज न्याय के जीत भइल ।

✍तारकेश्वर राय “तारक”

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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