महामारी पर भारी आस्था आ विश्वास, डूबत सुरुज के अरघ के बाद अब भोर में सुर्योदय के इंतजार

भोजपुरी समय डेस्क: जब बात आस्था आ विश्वास के होला त ओकरा आगे बड़ से बड़ बेमारी आ प्रतिबंधन के कवनो मतलब ना रह जाला। आस्था आ विश्वास के संगे शुरू भइल चार दिनी छठ महापर्व के तीसरका दिने पछिम में अस्तांचल में जात सू्र्य के अरघ के संगे व्रती लोग आज के पूजा कइल संपन्न। काल्ह सबेरे भगवान भास्कर से जल्दी उदित होखे के निहोरा के संगे घाट से लवटले व्रती आ श्रद्धालु। जब माथ पर अरघ के कलसुप आ सूप से भरल दउरा के संगे व्रती आ उनका परिवार के लोग घाटे जाए खातिर निकलल त घाट के ओर जाए वाला सभ रास्ता ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ आ ‘मरबो रे सुगवा धनुष से’ जइसन पारंपरिक छठ गीतन के संगे संगे नया गीतन से गांव गली आ छठ घाट गुंजायमान हो उठल ह।
ऊंहई व्रती आ श्रद्धालु लोग कोविड19 से  सबंधित सरकारी दिशानिर्देश के बहुत हद तक पालन करत छठ के संझा अर्घ्य के संपन्न कइले। जहां  ओर सगरी दुनिया कोविड 19के कारण आर्थिक रूप से कमजोर हो गइल बा ओही जा दुनिया भर में बसल पूर्वी उत्तर प्रदेश आ बिहार के लोग के छठ पूजा में उत्साह देखते बन रहल बा।

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