मढ़ौरा गोरा हत्याकांड

मढ़ौरा गोरा हत्याकांड 
ओने अंग्रेजन के गोली ऐने किसानन के टोली
गूंजे जय हिन्द के बोली उ मरहौरा में….
ई मास्टर अजीज द्वारा गावल खाली एगो गीत ना ह बलुक इतिहास के उ दस्तावेज ह जवन खाली अइसन कुछ गीत में दब के रह गइल बा। आज हमनी अइसने गुमनाम दस्तावेज में से भारतीय स्वाधीनता संग्राम के कुछ अइसन क्रांतिकारियन के याद कइल जाई जेकरा के भूला दिहल गइल बा।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम खातिर अगस्त महीना के बहुत मोल बा। 15 अगस्त के आजादी त मिलबे कईल बाकी एकरा अलावा अगस्त क्रांति केकरा भोर पड़ा सकेला। द्वितीय विश्व युद्ध में समर्थन लेला के बादो जब अंग्रेज़ भारत के स्वतंत्र करे खातिर तइयार ना भइलें तब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन के रूप में आजादी के अंतिम लड़ाई के बिगुल फूँक दियाईल जवना से ब्रितानिया हुकूमत में दहशत फइल गइल। बहुत जल्दी ई देशव्यापी आन्दोलन के रूप ले लेलस, ओही क्रम में सन 1942 में 18 अगस्त के दिन मढ़ौरा के मेहता गाछी में क्रान्तिकारियन द्वारा कुछ अइसन भइल जवन इतिहास के पन्ना में सोना के अछर से लिखा गइल। मढौरा के मेहता गाछी में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ चल रहल सभा के बिहार के रानी झांसी के नाम से प्रसिद्ध बहुरिया जी सम्बोधित करत रहली। अँगरेज़ सिपाही सभा में जलियावाला बाग जइसन घटना के अंजाम देवे के साजिश से सभा स्थल के ओर बढ़त रहे बाकी उल्टे अँग्रेजी सैनिक के ही छौ गो सिपाही के लाश गिर गइल। एहीसे एह तारीख के इतिहास में मढ़ौरा गोरा हत्याकांड के नाम से जानल जाला।
जहां मेहता जी के घर ओजा झगड़ा के जड़
गोली चले सरासर हो मरहौरा में
ई गीत ओह इतिहास के साक्षी बा जवना से अंदाजा लगावल जा सकेला कि ओह समय का का घटना घटल होई। जहां तक सभे के मालूम बा कि अगस्त क्रांति 1942 के बिगुल 7 अगस्त के ही कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के उद्घोषणा के साथे बाज गइल रहे। 9 अगस्त आवते-आवते सब बड़ राष्ट्रीय नेता आ क्रान्तिकारियन के जेल में ठूंस दिहल गइल रहे जवना से ई क्रांति नेतृत्व विहीन हो गइल । अइसन विकट समय में क्रांति के नेतृत्व छात्रन, नवहीयन आ किसानन के हाथ में आ गइल रहे। बिना नाथ-पगहा के बाछा हर के केने ले जाई ई हरवाहो के ना बुझाये ओहि तरह अब क्रांति के स्वरूप बदल गइल रहे। ई अहिंसा के रास्ता छोड़ के हिंसा के रास्ता पकड़ लेलस आ देश के साथे बिहार में भी एकर बहुत असर पड़ल। सारण जिला के छपरा मुख्यालय आ ओ समय के औद्योगिक नगरी मढ़ौरा में भी क्रांति के आग धू-धू करके लाफ़ मारत रहे। चुकी क्रांति के बागडोर नवही के हाथ मे रहे ऐसे ई आग के जइसन तेजी से फईलत रहे। अगस्त क्रांति मे 18 अगस्त के मढौरा मेहता गाछी मे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ एगो सभा चलत रहे, जेकरा के सम्बोधित करत रहली बिहार के रानी झांसी के नाम से प्रसिद्ध बहुरिया जी। सभा के सूचना अंग्रेज सरकार के पहिलहीं लाग गइल रहे ऐसे अँगरेज़ सिपाही भीड़ के चारो ओर से घेर के जलियावाला बाग लेखा हत्याकांड करे के साजिश से मढ़ौरा के सभा स्थल के तरफ बढ़त रहे। रामजनम सिंह के अंदाजा रहे ेकि अंग्रेज सैनिक सभा में खुरपात कर सकेलन स एहीसे ऊ 5-7 आदमी के दल के साथ सभा स्थल से थोड़ा दूर तैनात रहले। रामजनम सिंह नवही क्रान्तिकारियेन के सेनापति रहस। अंग्रेजी सैनिक जइसे आगे बढ़ल रामजनम के सिपाही टूट पड़ल लोग, एक तरफ अंग्रेज सैनिक के हाथ में बंदूक रहे त दोसरा ओर क्रांतिकारी लोग के हाथ में लाठी, भाला आ दाब। भारती के लाल के माटी में मिलावे में अंग्रेज सैनिक लो के लोहा के चना चबाये के पड़ल। एने रामजनम अपना दल के साथ अंग्रेज के बढ़े से रोकले बाड़ें आ ओने बहुरिया जी सभा में अपना भाषण के माध्यम से लोग के हिरदया में क्रांति के लुत्ती जरा के हावा देत रहस। अदम्य मनोबल आ अप्रतिहत शौर्य के साथ लड़त में रामजनम सिंह के छाती में अंग्रेजी गोली लाग त गइल बाकी तीन गो अंग्रेजी सिपाही भी नरक के रास्ता पर डेग बढ़ा देले रहे। सभा खतम होखही के चाहत रहे तले अंग्रेजी सेना सभा पर टूट पड़ल। बहुरिया जी के ललकार पर भीड़ लाठी-डंटा आ हसुआ-गंरासी से ही छौ गो सिपाही के मार गिरवलक । तुरंते सारा लास नदी में बहवा दियाईल, अंग्रेजी सेना नाव से भी खूब खोज लेलक बाकी लास के पाता ना लागल। मढ़ौरा आ आसपास के क्षेत्र कुछे घंटा में छावनी मे तब्दील हो गइल।

बहुरिया जीबहुरिया जी सड़क पर पेड़ कटवा के गिरवा देली जवना से पुलिस कारवाई धीमा पर गइल आ क्रांतिकारी लो के सुरक्षित स्थान पर जाए के समय मिल गइल। युवा क्रांतिकारी रामजनम सिंह के शहादत के बदला में छौ गो अंग्रेजी सिपाही ढ़ेर भइल बाकी कुछ लोग के इहो कहनाम बा कि दस गो से बेसी त रामजनम के दले साफ क देले रहे ओकरा बाद भीड़ जब मारे लागल त अंग्रेजी सिपाही लोग के ओजा से भागे के पड़ल तब तक पचासो गो सिपाही कटा गइल रहे जवना के लास ना मिलो एहीसे ओकनी के नदी में बहवा दियाईल आ आंकड़ा बतावल गइल की छौ गो सिपाही मराइल बा। ई सारण जिला के अइसन घटना रहे जवन ना खाली बिहार बाकी पूरा देश में तहलका मचा देले रहे। पूरा जिला में रामजनम सिंह आ बहुरिया जी रामस्वरूपा देवी के वीरता के गीत गवाए लागल रहे। बिहार के भागलपुर के तीरमुहान मे भूपनरायन सिंह के राजसी ठाट बाट मे पलल बढ़ल बिटिया रामस्वरूपा के बाल्यावस्था मे ही भोजपुरी अंचल सारण के अमनौर स्टेट के बहुरिया बन गईली। इनकर पति हरिमाधव सिंह छात्र जीवन से ही स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ल रहले । बाद में सविनय अवज्ञा आंदोलन के 1930 ई मे नमक सत्याग्रह के दौरान हरिमधाव सिंह के ब्रिटिश सरकार हाजारीबाग जेल मे बंद कर देलक तब बहुरिया जी आंदोलन के गति देवे खातिर हवेली के देहरी लांघ आजादी के लड़ाई मे कूद गईली। आजादी के बाद पहिला आम चुनाव मे वीरांगना बहुरिया रामस्वरूपा देवी भारी मत से बिहार विधान सभा खातिर चुन लिहल गईली। 29 नवम्बर 1953 के बहुरिया जी के स्वर्गवास हो गइल । मढ़ौरा गोरा हत्याकांड क के ब्रितानिया सरकार के हिला देवेवाला वाला अमर शहीद रामजनम सिंह के याद में 1970 के दशक में उच्च विद्यालय मढ़ौरा के लगे शहीद स्मारक के निर्माण कईल गइल। ओह स्मारक के उद्घाटन करत समय तत्कालीन मंत्री दारोगा प्रसाद राय कहले रहस कि रामजीवन के शहादत से उपजल जनाक्रोश के गूंज लंदन के संसद तक में गूंजल रहे। एही बात से अंदाज़ा लगावल जा सकेला की ई घटना अंग्रेज सरकार खातिर कतना जबरदस्त रहे। अगस्त महीना में स्वतंत्रता के महापर्व पर हमनी बड़-बड़ क्रान्तिकारियन आ स्वतंत्रता सेनानी के याद करिले स बाकी इतिहास के पन्ना में कहीं दबा गइल अनेक वीर सपूतन के लोग नामो भुला गइल बा, जरूरी बा ओह सब लोग के नाम भी नवका पीढ़ी के मालूम होखे के चाहीं।

लव कान्त सिंह

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