लुप्त होखत फगुवा

माघ के बसंत पंचमी से शुरु होखे वाला फगुनी बयार आ ओकरा संगे शुरु फगुआ गावे के परंपरा अब बिला रहल बा। एही सभ पर अपना लेखनी के जरिए आपन चिंता जाहिर कर रहल बानी भोजपुरी के सुप्रसिद्ध ई पतिरिका सिरिजन के उपसंपादक श्री तारकेश्वर राय तारक जी।

सभके परनाम आ जय भोजपुरी

आज गांव के फगुआ के बड़ा इयाद आवता। कबो नीक फगुवा गावल गाँव के इज्जत बढ़ावत रहे, अब उ परम्परा हांफत बीया ओकर दम बन्द होखहीं वाला बा।  अपना अस्तित्व के बंचावे ख़ातिर हाँथ गोड़ पटकत लउकतीया। गाँव के ढोलक बारहों महीने फटले रहता, ढोलक बजावे के केकरा फुरसत बा। सभे अपना दुख धनधीया में बाझल बा। हरमुनिया के भांथी त सीटहल बाबा के साथे बिला गईल। मंजीरा का नन्हका घुंघरू टूटके कगरी फेंकाइल बा, उ गांव के किस्मत पर फेकरे के सिवा ओकरा सोझा कवनो अउरी चारा लउकत नइखे। गाँव में जेकरा लगे पइसा रहे उ शहर की ओर निकल गइल आ जेकरा लगे ना रहे उ जुटावे में लागल बा। गाँव में बाँचल लइका शिवाला के साफ सुथरा कइके फगुवा गावे के तइयारी करत नइखन स लउकत। आज उ त यूट्यूब पर होली सुनके खुशी के मारे फुलौना नियन फूलल बाड़े सं ।

घूम-घूम के घर-घर फगुवा गावे अउरी रंग लगावे वाला गोल पर प जइसे मोरचा लाग गइल बा। ओकरा पर परत-दर-परत धुर चढ़ी गइल बा । पारंपरिक फगुवा के धसेर के कगरी लगा देंले बा आधुनिक फुहर गीत। खेत, ख़रीहान, सिवान, ताल-गड़ही, पोखरा, बारी-बगइचा अउरी गझिन बुढ़िया बारी खाली कविता कहानी में सुनाताड़ी सं। कुल बिलात चल जाता । लोग बिकास के पकड़े ख़ातिर दउरता आ उ त भागले जाता। अब त फगुवा से एक दिन पहीले बम्बई(आजु के मुम्बई),सूरत, अहमदाबाद,नोएडा, अउरी दिल्ली फरीदाबाद से कमासुत लोग जइसे-तइसे ट्रेन से बस से लटक-फटक के गाँवे आवेला। आ ओहि तरे फगुआ बीतते लदाके अपना मन के मारी के लवटी जाला। एकरा सिवा कवनो चरो त नइखे।

हे सिध्दि बाबा, ढ़ीह बाबा,बरह्म बाबा, चण्डी माई रवुवे सब अब आदमी के मती के बदले के उपाय बताईं । फगुवा के बाँचल जरूरी बा मनुष्यता ख़ातिर। आपन कुल्हिये परम्परा पर गरहन लागत चल जाता, कुल्हिये ढ़हत ढिमलात बिलात लउकता। ई कुल देखी के मन माहुर हो जाता, परब तेवहार त समुह के चीझ ह। आदमी अकेल होत चल जाता, कुफतन मर रहल बा अदमी।

तारकेश्वर राय “तारक”
ग्राम : सोनहरिया, पोस्ट : भुवालचक,
जिला : गाजीपुर, उत्तरप्रदेश

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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