लॉक डाउन से निफिक्र रसूखदार

फाइल फोटो

के जानता नियति के नियत के ? कोरोना बेमारी के बारे में इ कहल बेजाँय त नहिये कहाई आजु काल के हालात के देखि के । सगरी संसार के ई बेमारी ध के पटक देले बिया भुइँया लोट के छटपटइला के सिवा खाली एकही रस्ता बतावता दुनियाँ के जान बचावे में माहिर जनकार लोग की साफ़ सफाई से एकन्ता दुरी बना के रहे से ही जान बाँची । ना केहू बहरी से आवो ना बिना कवनो खूबे जरूरी काम के केहू घर के चौखट लाँघो। तबे बाँची जिनिगी । अइसन कटाह बिपत ना हमनीके होश में आइल बा ना हमनीके बूढ़ पुरनिया के मुहँ से सुनले बानी जा ।

दू-जून के रोटी जे के मोहाल बा उहो आपन दिल प पथर राख के घर के भीतरी अपना मन के मनवले बा । पेट के भूख कई बेर संयम के तुरे के उकसावता बाकी प्रशासन से भा आसा पडोसा के सहायता के हाँथ भेंटा जाता उबारे खातिर । मानवता के अजबे रूप के दर्शन हो रहल बा एह दुरूह समय में । सभे लागल बा एक दुसरा के बचावे में । “जान बा त जहान बा” ई सच्चाई कुल बिपत के काटे खातिर हथियार बनल बा ।

हमनीके देश गते गते संक्रमण के तीसरा पायदान की ओर बढ़ रहल बा, सासन प्रशासन सरकार एक से एक कठोर फैसला ले रहल बिया देशवासी के एह महामारी से बचावे खातिर । निर्देश के तन्मयता से मान भी रहल बिया अधिकांश जनता, का पढ़ल लिखल, का निरक्षर, गांव से लेकर शहर शहरात तक हर धर्म हर प्रान्त गरीब, अमीर, का खास, का आम सब लोग । पूरा देश में लॉक डाउन बा । ठहरल बा जिनिगी रुकल बा चौबीसो घंटा दौड़त रेल के पहिया, उड़न खटोला जमीन पर खाड़ बा, उद्योग धन्धा कल कारखाना स्कुल कॉलेज इबादत घर पर बंद ताला पर समय के धुर चढ़ रहल बा । खाली जरूरी सेवा में लागल कर्मवीर पुलिस प्रसासन के लोग अउरी उनकर गाडी ही नजर आवता बाकी सगरो बिरानी छवले बा । केहू के कवनो बहाना चलत नइखे ? पूरा देश एकवटल बा लॉक डाउन के सफल करे खातिर लेकिन कुछ लोग बा जे एह मजबूत इरादा में सेंध लगावे से बाज नइखे आवत लाख हंथ जोरिया के बावजूद । कुछ लोग स्थिति के भयावहता के हलुके में लेता आ मुवहिं पर उतारू बा ओके बचावल मुश्किलें बा लेकिन डर त ये बात के बा ना जाने केतना निरपराध के जान के भी दुश्मन बाड़न अइसन नासमझ लोग ।

तब्लीगी जमात के बात ना करब उ जाहिल उन्मादी बददिमाग के बातो कइला से पाप लागी । मानवता के बड़का दाहि बाड़न स ई, भले देखे में इंसाने नियन लउकतान स लेकिन इंसान के ना गुन बा ना हरकत । रहल बात इन्सानीयत के त तालीम ही अइसन मिलता की उ कहाँ से आई ? कवनो धर्म मानवता के भलाई खातिर ही बनल बा । मजहबी आग लगावे के कोशिस में लागल बा दुश्मन, धैर्य अनुसासन के बहुते जरूरत बा अबहीं ।

coronavirus कोरोना वायरस

जिनिगी गरीब भा अमीर हो सकत बा । लेकिन सबकर जिनिगी जिनिगिये न होला ? हमनीके अगर आदमी बानी जा त बिचारो कइल जाइ । बिचार होखी त तुलना भी कइल बेजायँ त नहिये कहाई । आंकलन भी होइ आ समीक्षा भी ।

हम बात करतानी महाराष्ट्रा के रसूखदार वधावन परिवार के । कहल जाला न “सईयां भईले थानेदार त अब डर काहें का ?” माई से दुधमुँहा लइका मिल नइखन स पावत काहें से की माई आपन फर्ज के अंजाम देवे में बाझल बिया । परिवार से बढ़ी के फर्ज बा एह समय । महामारी से लड़े में लागल कर्मबीर अपना घरे नइखन जात अपनन खातिर देश खातिर मानवता खातिर । अइसन दुरूह समय में हरानी के बात बा की खाली सैर सपाटा खातिर वधावन परिवार अपना रसूख के इस्तेमाल करिके लॉक डाउन के तोरे खातिर अधिकार पत्र हासिल करे में कामयाब हो गइलन । महाबलेश्वर के सैर सपाटा खातिर अधिकार पत्र मिलल ओह राज्य के अधिकारी से जहँवा संक्रमण आगि नियन फईल रहल बा । अधिकार पत्र ले के ई रसूखदार परिवार आपन नौकर चाकर के साथ २२-२३ लोग पांच गाडी में भरी के महाबलेश्वर चली आइल बिना कवनो रोक टोक के । ना त पुलिस के डंटा आजुकाल लॉक डाउन के तोरे वाला आम आदमी पर कहर ढहले बा, हजारो विडिओ वायरल बा एह कड़ाई के साक्षी के रूप में ।

ताजुब के बात बा, एह परिवार पर आर्थिक अनियमता के आरोप बा, एह आरोप के चलते जब एह लोग से अधिकारी के सामने हाजिर होखे के नोटिस दिहल गइल प्रसाशन के द्वारा त कोरोना महामारी के चलते ई लोग हाजिर होखे में अपना के असमर्थ बतावल । सैर सपाटा खातिर कवनो डर नइखे । ख़ुशी के बात बा की अधिकार पत्र देवे वाला अधिकारी के राज्य सरकार जबरदस्ती छुट्टी पर भेज देले बिया । लोकतंत्र में सभे बराबर बा राजा भोज के वोट के भी एक वोट ही मानल जाइ आ झींगुर के एक वोट के कीमत भी एके वोट के बा । इयाद राखे के ताक बा की जनता सरकार के जननी हिय, सरकार जनता के ना । नियम कानून छोट बड़ अमीर गरीब आम खास ना देखे सभकरा पर लागू होला होखहुँ के चाहि तबे लोकतंत्र ज़िंदा रही आबाद रही ।

राज्य सरकार के वधावन परिवार अउरी लॉक डाउन के तोरे के परमिशन देवे वाला अधिकारी पर सख्त से सख्त कार्यवाही करे के चाही, जे के देखि के बाकी रसूखदार परिवार अउरी उनकर सहायता करे वाला सरकारी अधिकारी अइसन काम करे में सौ बार सोंचो । अपना ढुल मूल रवैया के चलते ही दुनियाँ में लाखो लोग मौत के नींद सूत गइल आ बर्तमान में अर्थब्यवस्था पानी मांग रहल बिया । अइसना में देश के कोना कोना से उठत आक्रोश के स्वर के अस्वभाविक त नहिये कहाई ।

✍तारकेश्वर राय “तारक”
गुरुग्राम, हरियाणा

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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