देशी आंदोलन में लागल बिदेशी तड़का

देश के बुढ़वा लोकतंत्र में पढ़ल लिखल साहब कहाये वाला समाज से सम्बन्ध राखे वाला लोग के जाहिल नीयन हिंसा के तसवीर पूरा दुनियाँ देखलस आ खुबे किरकिरी आ शिकायत भइल एह कृत्य के। सत्ता हस्तांतरण के समय अइसन उत्पात के नाजिर कमें देखे के मिलेला इतिहास में। शर्मसार भइल अइसन देश जेकर सम्मान आजुवो पूरा दुनियाँ करेला। अभी एह घटना जेहन से मिटल ना रहे । तबे दुनियाँ के बड़हन लोकतंत्र में नावा कृषि कानून के बिरोध में महीनन से देश के राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर धरना पर बइठल किसान गणतंत्र दिवस के मोका पर आपन संख्या बल के प्रदर्शन करे खातीर ट्रैक्टर परेड करे के प्रस्ताव शासन के सामने रखलन जेके सरकार कुछ शर्त के साथ परेड निकाले के परमिशन दे दिहलस।

लेकिन एह ट्रैक्टर परेड के नाँव पर खुबे बवाल मचल राजधानी दिल्ली में। तय रूट के छोड़ी के कुछ उपद्रवी तत्व सुरक्षा के कुल्हिये उपाय के अँगूठा देखावत सुरक्षा बल पर भी लाठी डंडा आ अउरी हथियार के प्रयोग करत बेकाबू हो गइलन। गणतंत्र के पावन मोका पर तंत्र कस के संयम के दामन धइले रहे छुटे ना दिहलस ओहिजे गण जोश में होश खो दिहलन। वादा टुटल….भरोसा टुटल…. अउरी टुटल मर्यादा के अनगिनत देवाल।

हद त तब हो गईल जब कुल बाधा रुकावट के बलजोरी टारत खुड़चाली उपद्रवी के रेला लाल किला पर पहुँच गइल । ई भीड़ एहिजे ना रुकल दिल्ली के जंग के मैदान बनावत हजारो के संख्या में लाल किला के प्राचीर पर चढ़ गइलन, खुबे जम के तांडव करत धार्मिक झण्डा के फहरा दिहलन । सरकारी सम्पति के भी खुबे नुकसान पहुँचवलन।

आपन जान के बचावे खातीर सुरक्षा बल के जवानन के खाई में कुदत समय के वीडियो खुबे वायरल हो रहल बा । लेकिन अस्त्र के प्रयोग ना कइलन जवान जमात। खुबे बड़का धैर्य के परिचय दिहलस सुरक्षा बल ।

आंदोलन केतनो जायज काहें ना होखे ओके तबतक मोकाम ना भेटाई जब तक अनुशासन संगे ना रही। हिंसा आंदोलन के पंगु बना देला आ आम जनता के बिसवास त टुटबे करेला। दिल्ली में भइल तांडव से सबसे अधिका हानी “किसान” के नाँव के भइल। किसान नेता ई कुल बात के समझत रहलन जा एहिसे शान्ति से तय रूट पर ही परेड के अपील करत रहलन जा। लेकिन कुछ लोग पर अपील के असर ना पड़ल उ लोग एह कुकृत के अंजाम दे दिहलन जा। किसान नेता ओह लोग के किसान माने के राजी नइखन ओहिजे कुछ लोग के मत बा की भोला भाला किसान के कुछ नेता आपन राजनीति के चमकावे आ आपन उल्लू सीधा करे खातीर उकसा के ई काम करववले बा। कानून त आपन काम करबे करी आ जाँच ही बताई की सच्चाई का रहे।

देश के खेतिहर के मुद्दा सड़क संसद दुनो जगह खुबे हड़कम्प मचवले बा । बिपक्ष के त आपन राजनीति चमकावे के मोका मिलल बा। उ ई सुअवसर काहे छोड़े ? कोर्ट के एह कानून पर रोक लगवला के बावजूद किसान नेता आपन धरना प्रदर्शन के रोके के मूड में नइखन। उ कानून के रद्द करे खातीर जिद्द धइले बान। सरकार के साथे कई दौर के बातचीत से भी कवनो हल नाही निकलल।

अब आपन देशी किसान आंदोलन के फिकिर के आग बिदेश के नामी गिरामी हस्ती लोग के भी बेचैन क दिहले बा । के अधिका फिकिरमंद बा एके देखावे के बाजी लागल बा जइसे । खुबे तगड़ा प्रतियोगिता बा । ट्विटर पर किसान आंदोलन के समर्थन में बिदेश से हैशटैग कगुबे ट्रेंड कर रहल बा।

जनाता हमरा मन मे ई मलाले रही जाइ की यूपी बिहार के किसान जवन कबीली के घुघुरी आ सरसो के पियर फूल में ही भूलाइल बा । का अपना जीनिगी में जान पाई की ओकर चिन्ता खाली ओकर सरकारे नइखे करत ओकर चिन्ता में अमेरिकी पॉप सिंगर रिहान अउरी पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, मियाँ खलीफा जइसन जानल मानल हस्ती भी सूखा के किसमिस भइल जाता।

देश के अंदरूनी मामिला में विदेशी शख्सियत के दखल के हलुक में ना ले के विदेश मंत्रालय के भी बयान सामने आ गइल बा। विदेश मंत्रालय विदेशी टिप्पणिय पर ई साफ साफ कहले बा कि भारतीय संसद पूर्ण चर्चा अउरी बहस के बादे सुधारवादी कृषि कानून के पारित कइले बा। मंत्रालय इहो कहलस कि प्रदर्शन के भारत के लोकतांत्रिक प्रकृति अउरी लोकतांत्रिक राजतंत्र के संदर्भ में देखल जाए के चाहि।

जल्दबाजी में कवनों टिप्पणी करे से पहिले तथ्यन के पता लगा लेवे के चाही।  खासकर मशहूर हस्ति के सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग, टिप्पणि के लोभ उचित नइखे ना त ई जिम्मेदराना रवैया ही कहाइ।

आम जनता के त दुनो पक्ष से इहे अरदास रही कि हठ के छोड़ के बीच के रास्ता चुन लिहल ठीक रही। किसान नेता राकेश टिकैत गाजीपुर बॉर्डर पर जात जात टिक गइल बाण लेकिन नेताजी लोग आपन बात पर कहां टिकेला लोग नेतागिरी के पेशा में बात पर टिकल मुश्किल ही होला पर वाक कौशल से बात पर टिकत देखावे के त परबे करेला । टिकैत जी के मीडिया से बात करे के समय के आँस बिखरत आंदोलन के एक बार फेरु से बटोर दिहलस नावा जान फूंक दिहलस।

गाजीपुर बॉर्डर गरज रहल बा, सिंधु बॉर्डर बरस रहल बा। सब जइसे सद्बुद्धि से बैर राखे के कसम खइले बा।

तारकेश्वर राय ‘तारक’

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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