जिम्मेदारी के निर्वाहन में कोताही

जिम्मेदारी के निर्वाहन में कोताही- समसामयिक घटनाचक्र पर लिखल शशि अनारी जी के रचना

coronavirus कोरोना वायरस

एक बार एगो राजा के राज में महामारी फइल गइल चारो ओर लोग मरे लगले राजा महामारी रोके खाति बहुतेरे उपाय करववले बाकि महामारी के असर कम ना भइल लोगन के मुवल बन ना भइल !

दुखी राजा भगवान से प्रार्थना करे लगले कि हे मालिक अब हम का करी तले अचके मे आकाशवाणी भइल आसमान से आवाज आइल कि ऐ राजा ! तहरा रजधानी के बीचो बीच जवन इनार बा उ सूखि गइल बा अगर अमावसा के राति मे तहरा राज के हर घर से एक – एक बाल्टी दूध ओह इ़नार में डलाई त अगिले भिनुसार से इ महामारी ओरा जाई आ लोगन के मउवति बन हो जाई !

राजा फटाफट सगरे राज मे इ घोषणा करववले कि महामारी से बॉचे खाति राज के हर घर से अमावसा के राति ओह इनार मे एक एक बालटी दूध डालल अनिवार्य बा एह महामारी से बॉचे के बा त इ करे के परी !
अमावसा के रात जहिया सगरे लोगन के इनार में दूध डाले के रहे ओही राति ओह राज मे रहेवाली एगो किरिपिन आ चल्हाक बूढ मेहरारू अपना मन मे गुनलसि कि अमवसा के अन्हरिया राति मे सगरे राज के लोग त इनार मे दूध डलबे करी अगर हम एगो एक बल्टी पानिये डालि देबि त केहू के का पता लागी ! मन मिजाज बना के बुढिया राति खा अपना हिसा के एक बलटी दूध का जगहा एक बलटी पानी ओ इनार मे डालि के अपना चल्हाकी प अपने फूलत पचकत अपना घरे आ गइलि !

बिहान भइल ! बाकि इ का ! रोज के अपेक्षा दू अदिमी के मउवति अधिका हो गइल कुछ ना बदलल काहेंकि महामारी त खतम भइले ना रहे !!

राजा इनार प गइले झॉकि के देखलें त देखले कि मए इनार पानी से लबालब भरल बा ओमे दूध के इचिकियो धराइ छुवाइ नइखे माने एको बून दूध ओह इनार में ना रहे ! राजा के बुझा गइल कि एही से लोग आजुवो मुवल ह महामारी गइल नइखे !

अइसन एखाति भइल कि जवन विचार राति मे ओह बुढिया के मन मे आइल रहे उहे विचार सगरे राज के लोगन के मन में आ गइल सब इहे सोचल कि अन्हरिया राति बा के देखता आ केहू ओह इनार में दूध ना डालल !

कहे के मतलब बा कि जवन बाति एह कहानी में भइल बा ओइसन आजु हमनी के जिनगियो मे होता !

जब कवनो अइसन काम,
जवन सगरे देश के मिलि के एकजुट होके करे के रहेला त अकसर हमनी के अपना अपना जिम्मेदारी से इ सोचि के हटि जानी जा कि हम ना करबि त केहू ना केहू त करबे करी आ हमनी के एह सोच के नतीजा होला कि स्थिति जस के तस बनल रहेला !

अगर हमनी के दोसरा के भरोसा छोडि के आपन जिम्मेदारी निभावे लागिजा त पूरा देश मे भी अइसन बदलाव आ सकेला जवना के आज बहुत बहुत बहुत जरूरत बा !

करे के का बा त आपन सुरक्षा…
केकरा ???

 

 

 

 

शशि अनारी

बलिया (उ.प्र.)

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