8 मार्च एगो खास दिन अंतराष्ट्रीय महिला दिवस

 अंतराष्ट्रीय महिला दिवस 

समय का पहिया त घूमते रहेला इहे एकर नियति ह आ इहे एकर सुभाव । आज एह पहिया के सोझा खाड़ बा 8 मार्च। आठ मार्च, इ आम दिन ना ह एह दिन के खासियत बा कि एह दिन के समूचा संसार महिला दिवस के रूप ने मनावेला | एह दिन विशेष रूप से मेहरारुन के दशा दिसा पर बात होला ।महिला उत्थान के बात होला ।

हमनीके देश भारत भी समय के साथ ताल मेल बइठावत अपना करम कोशिश के चलते विश्व के उन्नती करेवालन देशन में आपन नाम अगली पाँत में दर्ज करावे में सफल भइल बा । समय सब कुछ बदल रहल बा चाहे जड़ होखे भा चेतन नर होखे चाहे नारी प्रकृति भी एसे अछूता नइखे । समय के नाचत पहिया के साथ आधुनिक समाज मे भी जागरुकता के अंकुर फूट रहल बा गाँव गिरांव से लेके शहर महानगर तक के समाज समझ रहल बा कि शिक्षा जरूरी बा आपन वजूद आपन शक्ति के जाने खातिर एहीसे सबकर कल्याण होई एहीसे विकाश सम्भव बा । सभे कोशिश में लागल बा अपना बाल बच्चन के शिक्षित करे ख़ातिर । लड़िका लडक़ी दुनो के पढ़ाई पर धियान दियाता चाहे वजह अलग अलग काहें ना होखे ।

साँच कही त मरद मेहरारु समाजिक रथ के दु गो पहिया जइसन होलन एक के बिना दूसर अधूरा बा एक दूसरा के पूरक कहल जाव त गलती ना होइ ।सृष्टि समाज अउरी परिवार के बीच सही संतुलन कायम रहे एकरा खातीर जरूरी बा दुनो के उपस्थिति । समाज मे सदा से एगो परिपाटी चलल आ रहल बा मरद के काम ह बाहर कमाइल परिवार ख़ातिर संसाधन के जोगाड़ कइल मेहरारुन के काम ह घर संभालल, परिवार के सब सवांग के भोजन के इंतजाम के साथे साथ बाल बच्चन के जन्म दिहल बंश बेल के आगे सरकावे के साथ परवरिश क जिमेदारी । जब ई काम के उ सही से निभाई तबे उ घर के लक्ष्मी के कहावत के चरितार्थ करी । नइहर सासुर दुनो कुल के मरजादा में इजाफा करी । नारी रूप में जनम लिहल ओकर सुफल कहाइ ।

एह मिथक के तोड़ के उ चारदीवारी से बहरी निकल रहल बिया आ जवन काम कबो मर्दन के कहल जात रहे उ काम के सफलता पुर्वक अंजाम दे रहल बिया । परिवार खातिर धन अर्जन त कई रहल बिया साथे साथ नारी अबला हिय एह मिथक के भी तोड़ रहल बिया । आज नारी का नइखे करत पुलिस के रूप में समाज मे शान्ति कायम कर रहल बिया, सेना में देश के सीमा के रक्षा करता बिया, सड़क पर वाहन के दौडावत बिया त आकाश के विमान से नापत भी बिया । सड़क से संसद तक, खेत से कारखाना तक जमीन से लेकर बदरी तक पुरुष के कान्ह से कान्ह मिला के हर जिम्मेदारी के निभा रहल बिया आज के मेहरारु । घर परिवार के जिम्मेदारी से भी मुहँ नईखे मोड़ले । आपन धूम मचावे में सफल बिया नारी आज सगरी क्षेत्र में ।
नारी जब आपन ऊपर थोपल बेड़ि भा कड़ि के तोरे लागी तब संसार के कवनो ताकत ओके रोक ना पाई l बर्तमान साक्षी बा कि नारी रूढ़िवाद के बेड़ि से आजाद होखे के मुहिम क श्री गणेश कर चुकल बिया । समय एकरा में अवरी तेजी ले आई । गते गते आदमियों के सोंच बदल रहल बा लेकिन गति धिरे बा अउरी परयास जागरुकता के जरूरत बा ।

आजादी के सात दशक बीतला के बादो नारी के स्थिति कवनो खास नइखे बदलल अपना समाज मे, आजुवो मेहरारुन के प्रति होखे वाला अपराधन के संख्या में बढ़ोतरी के गती उफाने पर बा । शासन प्रशासन कानून के डर अपराधी में लउकते नइखे । जटिल कानूनी प्रक्रिया के चलते समय से पीड़ित के न्याय मिलते नइखे मुकदमा साल दर साल खींचात चलल चल जाता । कड़ा कानून के बावजूद मेहरारुन के प्रति दरिंदगी रोजे के एगो सामान्य घटना बन के रह गईल बा । ई खाली सरकारे के जिम्मेदारी बा ? का हमनीके आपन मातृ शक्ति के बेखौफ घूमें बिचरे पहिने ओढ़े के आजादी वातावरण नइखी जा दे सकत ? एह विषय पर मनन जरुरी बा । शुरुआत परिवार से होखे ।

चाहे युग कवनों होखे नारी के आपन अस्तित्व के बचावे खातिर लड़ाई त लड़हिं के परल बा इतिहास गवाह बा चाहे उ सीता जी होखस चाहे उ होखे निर्भया, संघर्ष क रास्ते पर चलत नारी एगो लमहर रास्ता तय कइले बिया । चिन्ता क बात बा कि आजुवो नारी कुरीति क शिकार बिया । जब जब मेहरारु कुछ अलग कइल चाहताली स तब तब न जाने कितने रीति-रिवाजों, परम्परा के दुहाई देके ओके रोक दिहल जाता, गुमनामी के गड़हा में ढकेल दीयाता ।

समाज में नारी के देखे क नजरिया बदलही के परी । नारी के एगो देह से अलग एगो जियत जागत इंसान के रुप मे देखे क आदत डाले के परी । नारी के पहिनल कपड़ा के भीतर से नग्नता के जबर्दस्ती खींच-खींच के बाहर ले आवे के सोच से छुटकारा मिलही के चाही ।

का बिकाऊ बा अउरी के बिचाई एकर फैसला बजारे पर छोड़ल ठीक रही । हमनीके त केहुके बिचाये अउरी जबर्दस्ती बिकाये के बीच मे रोड़ा अटकावे के परी । केहुके मजबूरी केहु खातिर ब्यापार न बन जाव एकर धियान समाजे के राखे के परी ।

नारी के सही आजादी तबे भेटाई जब ओकर खूबसूरत रूप शरीर के जगहा ओकर दिमाग बुद्धि के अहमियत दीयाई ।

भारतीय नारी संसार के दोसर नारी नियन आपन समस्या के खुदे सुलझावे में सक्षम बिया जरूरत बा सही मोका के। भारतीय महिलन के अगर सही अवसर मुहैया कराबल जाय तो असीम सम्भावना बा उनका भीतर उ जरूर सफल होइहन स ई बात बिना संकोच के कहल जा सकता ।

आधी आबादी के अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क बहुत बहुत बधाई ।

✍तारकेश्वर राय “तारक”

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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