गोपालगंज के लइका कइले कमाल, गांवें में बनवले हेलीकॉप्टर

एस के साधु, भोजपुरी समय, गोपालगंजः अगर मन में हौसला होखे आ कुछ करे के जज्बा त आदमी कुछु कर सकत बा। फेर ऊ समुद्र पर पुल बान्हे के काम होखे चाहे हवा में उड़े वाला हेलीकॉप्टर बनावे के काम। एही बात के चरितार्थ करत बिहार के गोपालगंज जिला के बरौली प्रखण्ड के बेलसड़ गांव के दुगो अनपढ़ लइका कुछ अइसन काम कइले बाड़े जवना के बारे में जान के सभे दांते अंगुरी काट रहल बा। धुन के पक्का बेलसड़ गांव के रहे वाला अमरजीत पासवान आ उनकर संघतिया धर्मेन्द्र, कबाड़ आ जोगाड़ से गांवे में हेलीकॉप्टर बना के चर्चा के विषय बन गइल बा लोग। एगो साधारण किसान आ गृहिणी माई-बाप के बेटा अमरजीत जे नांव मात्र के इस्कूली शिक्षा पवले बाड़े। घर के आर्थिक दशा ठीक ना होखे के कारण अमरजीत के घर-परिवार से दूर रहके शहर में जाके कमाए के पड़ल। एकरा बाद ऊ सउदी अरब जच गइले जहां से तीन बरिस बाद लवट अइले। सउदी से अइला के बाद अमरजीत के मन में हेलीकॉप्टर बनावे के विचार आइल, जवन ऊ अपना परिवार के लग के बतवले बाकिर पहला प्रयास में केहू उनकरा बात के समर्थन ना कइल बाकि अपना धुन के पक्का अमरजीत घर के लोग के एगो दस  किलो के डेमो हेलीकॉप्टर बना के आ उड़ा के देखवले जेकरा बाद घर के लोग उनकरा के आगे बढ़े के मंजूरी दिहलस। भोजपुरी समय से बात करत अमरजीत के परिजन बतवले कि ऊ लग मेहनत मजदुरी करके घर चला रहल बाड़े आ संगे-संगे अमरजीत के सपना पूरा करे खातिर उनकरा के आर्थिक मदद दे रहल बाड़े। अमरजीत के बड़ भाई सरबजीत पासवान जे एगो अस्पताल में एनजीओ के माध्यम से डराइवर के नकरी कर रहल बाड़े ऊहो अमरजीत के सपना पूरा करे खातिर उनकरा के हिम्मत दे रहल बाड़े आ कहतारे कि “तुं आपन काम करऽ हमरा जहां से मन करी आ जेतना पइसा लागी हम तहरा के देम।“

अइसन नइखे कि ई हेलीकॉप्टर के अकेले अमरजीत ही बना रहल बाड़े, एह काम में उनकर लइकाईं के संघतिया धर्मेंद्र बाड़े। काम के धुन में लागल एह लोग के बड़हल दाढ़ी आ माथा पर केस देखके लागेला कि ई लोग नवका साधु हऽ लो तऽ कबो पागल जइसन बुझाला, एह दुनू जना के गांव के लोग जुगुल जोड़ी कहके बोला रहल बा। एह लोग के एह भेष के बारे पुछला पर कहल लोग कि हमनी के एगो हठ, जिद आ चाहे प्रण कहीं बा कि जब तक इ हेलीकॉप्टर उड़ी ना तबले हमनी के हजामत ना बनवाएब।

      हेलीकॉप्टर त बन के तइयार बा बस अब करा उड़े के इंतजार हो रहल बा। बाकि सबसे बड़ बात ई बा कि ई हेलीकॉप्टर ना डीजल, ना पेट्रोल, ना गैस आ ना कवनो इंधन से चली। ई कइसे चली एह बात के अबहीं ले ई लोग एकदम गुपुत रखले बा। एह लोग के एह काम के देख के बस ईहे कहल जा सकत बा कि

  “जीय हो बिहार के  लाला, कइलऽ तूं गजबे काला, सभे लोगवा ताकते बावे, हो गइले दुनिया में हाला।”

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