अफवाह के आग से घिरल कोरोना वैक्सीन

कोरोना महामारी के संक्रमण के चलते अदमी के जिंदगी कटाह बन गइल रहल ह आ अबहियो बिपत ओराइल नइखे। जिन्दगी पर उदासी के बदरी घनघोर घेरले बा। अपना देश मे आपन वैक्सीन ईजाद भइला से उमीद के किरण लउकल बा आ बदरी अब गते गते छँटे लागल बिया। भारत अपना बलबुते दुनिया के सबसे बड़हन टीकाकरण अभियान देश के प्रधानमंत्री मंत्री के हाथे “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे भवन्तु निरामयाः” के महामंत्र के साथे श्री गणेश क के कोरोना के खिलाफ निर्णायक जंग के एलान कई दिहलस। पहिला चरण में करीब 3 करोड़ फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर के ई टीका लागी । हेतना कम समय मे एक ना दू दू गो वैक्सीन कोविशिल्ड (सीरम इंस्टीट्यूट) आ कोवैक्सिन ( भारत बायोटेक) ईजाद क के पूरा दुनियां के बता दिहलस की भारत मे बैज्ञानिक प्रतिभा के भी कवनो कमी नइखे। स्वदेशी कम्पनी सीरम इंस्टीट्यूट अउरी भारत बायोटेक कम समय मे ना खाली टीका बनवलस बलकी भारतीय दवा कम्पनीयन के सहयोग से भरपूर मात्रा में उत्पादन क के आपन बल बुता के परिचय दिहलस। अगर अपना देश के वैक्सीन सुरक्षित रहल त आवे वाला समय मे एकर भरपूर मांग होइ। महामारी के खत्मा खातीर टीका रामबाण साबित होइ। संभावना अपार बा। भारत अपना पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, थाईलैंड आदि के भी वैक्सीन देवे के तैयारी में बा। अपना देश के पोलियो खसरा टेटनस जइसन 14 रोग के बेमारी के टीकाकरण के अनुभव बा ट्रेंड हेल्थवर्कर के जमात बा नेटवर्क भी बनावे के नइखे मौजूद बा। ई अनुभव आ नेटवर्क भविष्य में बहुते काम दिही। जवना समर्पण भावना से ई टीकाकरण अभियान के शुरुआत भइल बा निश्चित ही सफल होइ आ कोविड महामारी से मुक्ति मिली।

लेकिन कहल जाला ना कवनो काम आसानी से हो जाई त ओकर अहमियत का रही। टीकाकरण अभियान भी अफवाह के लपेटा में आ गइल बा। अफवाह के का लेले बानी, एकर कवनो सिर पैर होला ? ना न । ई हर जुग में रहे तनी कम तनी बेसी आजो बा। जब से हमनीके राजनिति अउरी राजनीति करेवाला में दिलचस्पी बढ़ल । नेता के भाग्यविधाता माने लगनी जा तबे से देश में ‘अफवाह के हावा’ के मार्केटिंग के धंधा अउरी जोर पकड़े लागल। आज अफवाह के लगे हावा बदले के अपार क्षमता बा। कुछलोग अफवाह फइलावे में एतना न माहिर होलन की उनकर हुनर के का कहे के । सफेद झूठ भी एकदम साँच लागे लागेला। सोशल मीडिया आ संचार में क्रांति भइला से जंगल के आग नीयन अफवाह फइल जाता। देंखि ना देश मे अफवाह फइलल बा की “सरकार जवन कोरोना के वैक्सीन लगवावे शुरू कइले बिया उ ठीक नइखे” । एहू पर राजनीति शुरू हो गइल बा। अफवाह के जोर देखि के सरकार के मुखिया के कहे के परल की “वैक्सीन बिल्कुल सुरक्षित बा ई दवाई ना संजीवनी बूटी नीयन काम करी। अफवाह पर धियान मत दिहीं।”।

ई कूल अफवाह के सुन के लोकमन दुविधा में बा । मन त हमेशा दोहरा रणनीति के साथ चलेला। सही वाजिब सलाह के साथे ई खूब भटकइबो करेला । मन के सोझा हमनी नीयन आम आदमी के का बिसात, धनुर्धर अर्जुन भी असहाय हो गइल रहलन। कुरुक्षेत्र के मैदान में कृष्ण जी से उनका कहे के परल “ए भगवान हमार मन बड़ा चंचल ह जिद्दी ह हावा नीयन तेज ह। धइल आ मनावल एके त बड़ा मुश्किल बा । हम का करीं।” ई यक्ष प्रश्न आजो हमनिके आपके सबका सोझा सुरसा नीयन मुँह बवले बा।

मन के घोड़ा के बेलगाम मत होखे दिहीं । ज्ञान के लगाम आ बिवेक के चाबुक से एके काबू में राखी। सुनी सभकर लेकिन बहकावला में जिन परी। अंध भक्ति में आँख रहते आन्हर जिन बनी। करी उहे जवना में राउर भलाई होखे राउर परिवार के भलाई होखे। जिन्दगी राउर ह स्वविवेक ठंढा दिमाग से निर्णय रवुवा लिही की टीका लगवावे के चाही की ना?

 

 

 

तारकेश्वर राय ‘तारक’

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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