कोरोना आ लॉकडाउन के बहाने नवका पीढ़ी के अपना संस्कृति से करवाईं परिचय

Ramayan रामायण

Ramayan रामायणन बड़ा दुखाला जब छोट छोट बात प खून के रिश्ता के खून के आंस बहावत देखिला । कबो धन खातिर मान खातीर अपमान खातीर नावा के पावे बदे पुरान मजबुत रिश्ता के बंधन के ढिल होखत टूटत देखिना । कुछ अपवाद के छोड़ दिहल जाव त अधिकांश रिश्ता के फेड़ उहे हरियर बा जहँवा से कुछ मिलत होखे बा मिले के आस होखे । बाकी रिश्ता नाता त मुरझा रहल बा मसुवा रहल बा सोर जमीन छोड़हिं वाला बा हलुके हवा के जरूरत बा । जेके बोले सिखावल रहे उहे डपट के चुप करावे में लागल बा ।

हमनीके लोकसमाज जवना खूबी सँस्कार संस्कृति अउरी बिचारन खातीर सगरे बिश्व में गुरु आ राह देखावे वाला मानल जात रहे । आज काल पछीमा हावा में ना जाने इ गुन कंहवा उधीया गइल । खड़हर लउकता समाज सँस्कार भले आदमी चिकन चाकन आ निमने कमाता खाता ।

कोरोना महामारी के चलते जीनिगी भयभीत बिया लुकाये के मजबूर बिया घर के चारदीवारी में । जिनगी के जरूरत में भारी कमी आइल बा । धन सम्पति गौड़ आ रोटी कपड़ा जइसन मूलभूत जरूरत सबसे ऊपर बा । सँस्कृति के प्रकृति के जइसे नावा कवनो बूटी भेटा गइल होखे एह दुर्दिन में भी पोढ़ बरियार होखत दिखता । अदमी आपन दुख भुला के आपन आस पास के गरीब गुरबा आ चिरई चूरूग पोश परानी के बचावे खातीर सहायता के हाँथ बढावत लउकता । मानवता के एह रूप के नमन बा ।

आफत मुश्किल के चलत झंझावात में राम बड़ी इयाद आवतान । मानवता के जरूरत बा राम के रामत्व के । उहे राम जवन लोक के लोक से जोरलन मिलवन । नान्ह बड़ के देवार के तोड़के निषाद के गरे लगवलन । सबरी के पियार के आपन सर माथे लगवलन । उनकर ब्यक्तित्व एगो पुल रहे, पुल के रखवइया रहनी मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी । राम के नाँव, रूप, धाम, लीला, आचरण में जोड़े के एगो बरियार गुण रहे । उनकरा पुरा जीवन यात्रा में खुबे देखे के भेटाइल । चाहें उहाँ के राजसी ठाट बाट में होंखी भा जंगल झाड़ में कांट कुश पर चलत होंखी अपना सुभाव से सबके जोड़नी मिलवनी ठीक एगो पुल नीयन ।

दरकल, टूटल, छिटाइल, भहराइल, मेहराइल मन दिल दिमाग के पोढ़ बनावे खातीर जरूरत बा राम के चरित्र के आपन जीवन मे अपनावे के अनुशरण के । राम के आपन आदर्श मानेवाले आपन देश सीमा बढावे खातीर भा ब्यापार खातीर ना कबो लड़े ना लड़ावेला ना केहुके तोरेला ना तोरेवालन के वकालत करेला ।

परिस्थिति कवनो कटाह होखे मर्यादा के अँचरा कस के धइला रहला के काम बा । आज रामनवमी ह अवतरण दिवस ह रामजी के । आइ एगो उत्सव के रूप में मनाई जा जरूरी बा ई आपन सँस्कृति से नवका पीढ़ी के बतावे खातीर आपन अतीत पर गौरवान्वित होखे खातीर । राम अउरी रामत्व के आपन जीवन के मूलमन्त्र माने के जरूरत बा । समय बाउर भले बा अबहिं लेकिन डेरा के ना गा बजा के आपन शौक के पूरा क के एह समय के बितावल जाइ ।

परब तेवहार के श्रृंगार रामनवमी के खाँची भर बधाई अउरी शुभ कामना बा ।

अबहिं त सभे फुरसत में ही बा त आईं न सुबह 9-10 बजे अउरी साँझी के 9-10 दूरदर्शन पर रामायण रउरो देंखी अउरी नवकी पीढ़ी के त प्रेरित करी आ जरूर देखाई । आपन संस्कृति के चिन्हाई । रउवा त साँझी के दुवार पर रामायण पढलहिं बानी बाकी नवका पीढ़ी त नहिये पढले होंखी ओके देखाई ।
!!!जय श्री राम !!!

 

✍️तारकेश्वर राय “तारक'”
गुरूग्राम, हरियाणा

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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