6ठा भोजपुरी नाट्य महोत्सव के आरा में भइल आगाज

6ठा भोजपुरी नाट्य महोत्सव के आरा में भइल आगाज

लवकांत सिंह, भोजपुरी समय,आरा: भोजपुरी नाट्यकर्म खातिर समर्पित दिल्ली के संस्था रंगश्री 2013 से लगातार भोजपुरी नाट्योत्सव के आयोजन करत आ रहल बा। हर साल के जइसन एह साल 6ठा भोजपुरी नाट्य महोत्सव के आगाज 1 मार्च के बाबू वीर कुअंर सिंह के पुण्य धरती भोजपुर के बहियारा (चांदी) में भइल। पहिला दिन भोजपुरी के बहुचर्चित नाटक बबुआ गोबरधन के मंचन भइल। पांच दिन तक बहियारा में अलग-अलग पांच नाटक कइला के बाद बिहार के राजधानी पटना के कालीदास रंगालय में दूसरा चरण में तीन प्रस्तुति होई।

नाट्य महोत्सव में प्रस्तुति देत रंगश्री के कलाकार लवकांत सिंह लव, सौमित्र वर्मा आ अन्य

महोत्सव के आगाज एक मार्च के भोजपुर के बहियारा स्थित रामानंदी यज्ञलाल सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रांगण में भइल। क्षेत्र के भोजपुरी प्रेमी लोग पहिला दिन नाटक बबुआ गोबरधन के खूब आनंद लेहलें। बहियारा के आसपास के लोग के जुटान भइल आ भोजपुरी के एगो नया रंग से सभे परिचित भइल। ना खाली परिचित भइल बलुक खूब आनंदो लेहल। पांचो दिन अलग-अलग पांच गो भोजपुरी नाटक ‘बबुआ गोबरधन’, ‘लाचारी ब्रम्हचारी’, ‘बिरजू के बिआह’, ‘मास्टर गनेसी राम’ आ ‘कचोट’ के मंचन कइल जाई। ओकरा बाद टीम पटना में ई सब नाटकन के मंचन करी। भोजपुरी भाषा आन्दोलन में रंगश्री के ई योगदान सभ भाषा प्रेमियन के मनोबल बढ़ावे के साथ-साथ भोजपुरी नाट्यकर्म के भी बढ़ावा देवे के काम करी। जानल जरूरी बा कि रंगश्री साल 1976 से भोजपुरी रंगकर्म में लागल बा। देश भर में घूम-घूम के भोजपुरी नाटकन के मंचन करके साहित्यसेवा कर रहल बा। भोजपुरी साहित्य के समृद्ध करे खातिर हिंदी कहनियन का नाटकन के भोजपुरी में आ भोजपुरी के हिंदी में मंचन करत रहेला।

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