छठ आउर सूर्य पूजा

कार्तिक मास के अमावस मने दियरी के चउथा दिन से शुरु हो जाला प्रकृति आ साय़ात देव भगवान सूर्य के उपासना के महापरब छठ। चार दिन ले चले वाला एह महापरब में भगवान सबर्य के उपासना के का महात्म बा, काहें उनकर पूजा कइल जाला एह पर अपना लेख के माध्यम से प्रकाश डाल रहल बानी भारत से लाखन किलोमीटर दूर रहे वाला श्री रुद्र दुबे जी। त आईं पढ़ल जाव रुद्र दुबे जी के ई आलेखः

 छठ आउर सूर्य पूजा

ओम ह्रीं ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”

छठी मइया भा षष्ठी देवी के पूजा के धार्मिक मान्यता के आधार पर कहल गइल बा कि दियरी(दीपावली) के छव दिन बाद रामराज्य के स्थापना भइल आउर ओह दिन राम जी आउर सीता जी उपवास रखनी जा आउर सीता जी सूर्य षष्ठी / छठ पूजा कइनी जवना के फलस्वरूप लव आ कुश के रुप में दूगो जगप्रतापी पुत्रन के प्राप्ति भइल।

सूर्य पूजा के आध्यात्मिक आउर वैदिक पृष्ठभूमि

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मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, भगवान ब्रह्मा जी कहले बानी कि सूर्यदेव वेदन के केंद्र हवें, जवना से पंच तत्व: पृथ्वी, जल, अग्नि, पवन आउर आकाश के बने आउर प्रक्रम संचालित होखे में सहयोग मिलल। एही तरे ऋग वेद में छठी सूक्त के श्लोक में सूर्य देव के उदित होवे के विषय में बतलावल बा, आउर वर्तमान में सूर्य पूजा में शुभ दिन षष्ठी ह। कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी के जब सूर्य  दक्षिणायन (tilting away of north hemisphere) के तरफ़ यात्रा शुरू करेलन त हमनी सब पर सूर्य के प्रभाव में कमी होखे शुरू हो जाला। एही से हमनी सभ छठ में अर्घ्य दे के भगवान भास्कर से प्रार्थना करिले जा कि हे सूर्यदेव रउआ सभके रोग-व्याधि से बचाईं आउर सबके स्वस्थ आउर समृद्ध राखीं।

अभी कुछ दिन पहिलहीं हमनी धनतेरस (धन्वंतरी त्रयोदशी) आउर दिवाली मनवनी हं जा, आ लक्ष्मी जी के पूजा कइनी हं सं। हमनी के ई जानतानी जा कि एह देवी-देवता लोग के अवतार “दुधिया महासागर” के मंथन से भइल, आउर धन्वंतरी अमृत के एगो घइला के संगे अवतरित भइलन(चरक 43)। बाकि एहसे पहिले की देवता लोग के अमृत मिले, एगो दइत जवना के नांव राहु रहे छल क के देवता लोग से अमृत ले लिहलस। बाकि सूर्य भगवान के मदद से विष्णु जी अपना चक्र से राहु के सिर काट दिहलन(चरक 43)। बाकि एह सभ के बीच में  अमृत राहु के जीभ से छूआ गइल रहे त उनकर सिर अमर हो गइल आउर एही कारण आजो सूर्य ग्रहण के रूप में उनकर प्रभाव लउकेला(चरक 44) । चूंकि सूर्य भगवान देवता लोग के मदद कइले रहनी एहिसे ऊहां के देवतालोग में विशिष्ट मानल बा।

ऋग्वेद के सूर्य सूक्त; 1.35 में उल्लेख बाकि सूर्य देव के उत्पत्ति रोग के दूर करे वाला, बीमारी के इलाज करे वाला, गर्मी प्रदान करे वाला आउर दुनिया के रौशन करे वाला के रुप में भइल बा।

“अद्या देवा उदिता सूर्यस्य निरहंसः पिपृता निरवद्यात् ।

तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः ॥ ६ ॥”

सूर्य देव पर ज्ञान के कुछ प्राचीनतम किताबन के नांव:

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सूर्य के व्याख्या संस्कृत में विभिन्न भारतीय खगोलीय ग्रंथन से पढ़ल जा सकेला जवना में से कुछ किताबन के नांव नीचा दिहल बा:

1) 5 वीं शताब्दी में आर्यभट्ट द्वारा आर्यभटिया

2) 6 वीं शताब्दी में लतादेवा आउर रोमाक, वराहमिहिर द्वारा पंच सिद्धान्त,

३) 7 वीं शताब्दी में खंडखाद्यबक्बी ब्रह्मगुप्त

४) 8 वीं शताब्दी में लल्ला द्वारा सज्जादिवृद्दिदा।

5) एकरा अलावा पूरा दुनिया में सबसे पुरान पुस्तक सूर्य सिद्धान्त (द हिंदू एस्ट्रोनॉमी) ह।

रउआ ई पता होखी कि रोज सबेरे जवन गायत्री मंत्र हमनी पढ़ीले ओहमें में सूर्य देव के ही संबोधित कइल जाला।

सूर्य देव के मंदिर आउर प्राचीन धरोहर:

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कोणार्क के सूर्य मंदिर
गुजरात के मोढ़ेरा में इस्थित सूर्य मंदिर

भारत आ दुनिया के कई अन्य देशन में भगवान सूर्य के कइगो प्राचीन मंदिर आउर मूर्ति बा। एही  कड़ी में विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर जवन भारत के कोणार्क में बा ऊ सूर्य मंदिर एगो रथ पर बनल मंदिर ह, जहाँ सूर्य देवता घोड़ा से सजल रथ पर सवार बाड़न। दूसर प्रसिद्ध मंदिर गुजरात के मोढेरा सूर्य मंदिर ह।

एकरा अलावा सूर्य भगवान के सबसे प्रसिद्ध मंदिरन में से एगो मंदिर बिहार में बा। जी हां हम बात कर रहल बानी बिहार के औरंगाबाद में इस्थित “देव सूर्य मंदिर” (जवन कि नागरी, द्रविड़ आउर वेसरा वास्तुकला के मिश्रण बा)। एएसआई के अनुसार, एह मंदिर के निर्माण पांच से आठ ईसा पूर्व में चंद्रवंशी राजा भैरवेंद्र सिंह करवइले बाड़न। ई मंदिर छठ पूजा आउर सूर्य देव के समर्पित बा। ई मंदिर अद्वितीय ह, काहे से कि दुनिया के ई अकेला अइसन मंदिर बा जवन पूरुब मे ना खुलके पच्छिम के ओर खुलेला के मतलब कि जेने सूर्यास्त होला। एह मंदिर में छठ पूजा कइल बहुत शुभ मानल जाला। इहां के लोग के ई मान्यता बा कि ऐ पृथ्वी पर छठ ख़ातिर सबसे पवित्र स्थान अगर कवनो बा त ऊ ई देव मंदिर ही बा। मंदिर के गर्भगृह में विष्णु, सूर्य आउर अवलोकितेश्वर के सुंदर मूर्ति बा। सबसे महत्वपूर्ण बात कि पूरा विश्व में छठे एगो अइसन पूजा ह जेहमें पहिले डूबत सूरुज के पूजा होला आ बाद में ऊगत सुरुज के। तात्पर्य ई कि अंधकार के आवे आउर लम्बा होखे के इस्थिति अइळो पर हमनी सभ के धैर्य आउर श्रद्धा में कमी ना आवेला। हमनी में से कुछ भाग्यशाली लोग अइसनो होइहें जे एह मंदिर के दर्शन कइले होखिहें, बाकिर जदि रउआ कबो औरंगाबाद क्षेत्र में जाईं, त “देव सूर्य मंदिर” के दर्शन करे के कोशिश ज़रूर करब। एहि निहोरा के संगे रउआ सभे के प्रकृति पूजा आ भगवान सूर्य के महापरब छठ आउर सूर्य पूजा के शुभकामना आ अनघा बधाई।

बिहार के औरंगाबाद में इस्थित देव सूर्य मंदिर
लेखकः रुद्र दुबे, अमेरिका

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