गरदन माला हृदय अघाई

गरदन माला हृदय अघाई माला मालिन बनावेलिन, माली माला बेचेलनि। माला फूल के होला, माला कागज के होला, माला पनही के होला। माला छोट होला, माला मोट होला, माला हलुक होला, माला भारी होला। माला असली होला,माला नकली होला, माला बाली के होला, माला सुग्रीव के होला। माला गुथाला, माला गिनाला, माला जपाला। माला किनाला, माला बेचाला। रामलीला में माला उठेला, मंदिर में माला चढ़ेला, रैली में माला फेकाला । माला जिन्दा पेन्हेला, माला मुर्दा पेन्हेला। माला हार कहाला, बाकि माला जीत के होला। माला गोल होला, माला साल ओढ़ा…

Read More

रेडियो के लोहा सिंह – पद्मश्री रामेश्वर सिंह कश्यप

आज रेडियो के मशहूर नाटक ‘तसलवा तोर की मोर’ के रचयिता आ लोहा सिंह जइसन अमिट छाप छोड़ने वाला किरदार के अपना आवाज से जनमानस के स्मृति पटल पर अंकित करें वाला सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री रामेश्वर सिंह कश्यप जी के जन्मदिन बा, एह अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी आ पत्रकार के संगे संगे साहित्यकार श्री लवकांत सिंह लव जी अपना लेखनी का माध्यम से रामेश्वर जी के श्रद्धासुमन दे रहल बानी। रेडियोके लोहा सिंह – पद्मश्री रामेश्वर सिंह कश्यप     अध्यात्म से लेके विज्ञान तक, जवान से लेके किसान तक,…

Read More

महेंन्द्र मिसिर के नाम पर ई-पुस्तकालय के स्थापना पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन के भइल आयोजन

राम प्रकाश तिवारी,भोजपुरी समय, छपरा: आज जब चारोें ओर भोजपुरी भाषा के मान सम्मान के पुर्नस्थापना, भोजपुरी भाषा में अश्लील गीतन पर रोक लगावे अऊरी एकर बहिष्कार करे के मुहिम चल रहल बा। अइसन में भोजपुरी भाषा के नवका पीढ़ी में रोपे के संगे-संगे पुरनका आ नयका समय के भोजपुरी के कवि, रचयिता,गीतकार आ कलमकार के मान सम्मान खातिर हरदम प्रयत्नशील रहेवाला मंच अखिल भारतीय भोजपुरी संघ भोजपुरी के महान गीतकार, भोजपुरी गीतन के पहचान पूर्वी के जनक आ स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक पंडित महेंनदर मिसिर के नांव पर स्थापित…

Read More

“हमार बबुनी “

हमनी के आजी बहुत पढ़ल लिखल त ना रहली बाकि ठेठ भोजपुरी बोलत रही , हमार गांव गंगा के किनारे बा, जब हमनी सभे गांवे जाईं जा,  त गांव के शंकर के मिठाई, लकठो ( मीठा(गुड़) से निर्मित) , बताशा, फरही, भुंजा खाईं जा , जवन स्वाद एह सभ चीझन के खाए में आवत रहे , ऊ स्वाद चाऊमिन , बर्गर, पिज्जा में कहां? ई वाकया आज से चालीस बरिस पूर्व के बा, गरमी के छुट्टी में गांवे निकल जात रहनी हमनी सभ, ऊंहा पहुंचला के बाद हम दिन-रात धमाचौकड़ी…

Read More

“माई-भउजी” भोजपुरी कहानी

“माई-भउजी” “दीपक अपना घर के दलानी में बइठल ,बैलवन के गर के घण्टी सुनत रहलन। मन अकुलाए–चल जाईं आ तनी बैलन के सुहरा आईं। पर लगले फेरु से बइठ जास,,,,,एहि उहापोह में रहलन की सामने से भउजी आवत लउक गइली आ इनकर रहल-सहल हिम्मत भी जबाब दे देलख। उ पाछा से उनका के जात देखत सोंचे लगलें,,इ उहे भउजी हई जे गोदी में खेलवले रहली ??? दीपक चारी बरिस के रहलें त उनकर भउजी बियाहे अइली।उ हरमेशा बइठल भउजी के निहारत रहस,उनके गोदी में सुतस, उनके से खाना खास,,उनके जरे…

Read More

भोजपुरी भाषा के इतिहास

भोजपुरी बोली/भाषा वैदिक “ब्रीही”संस्कृति क उद्भव जउन क्षेत्र में भइल ओही क्षेत्र में शुद्धोधन क यशस्वी पुत्र गौतमबुद्ध,पालिभाषा के”भात”संस्कृत क्षेत्र में आपन चारिका पूर्ण कइलं,जेके आधुनिक भाषा में “भोजपुरी क्षेत्र”कहल जाला। हालांकि ग्रियर्सन,उदय नारायण तिवारी, डा०बुकान्न वगैरह बिहार स्थित भोजपुर नामक गाँव के नाम पर भोजपुरी भाषा क नामकरण स्वीकार कइले हं।भोजपुर गाँव, भोजपुर नगर अउर भोजपुरी राज्य के नामकरण क आधार इ सब विद्वान धारा नरेश राजा भोज के वंशकरन द्वारा आवर्त मान के भोजपुर नामक स्थान से भोजपुरी भाषा क पैदाइश मनले हं। भाषाई विश्लेषण से ज्ञात होला…

Read More

सेल्फी

आज जब कोरोना महामारी के दोसरका लहर में विश्व के संगे-संगे आपन देश भारत जूझ रहल बा। अइसन विपत्त काल में जब सभे अपना अपना घर में रहे खातिर मजबूर बा, आ अकूला रहल बा त रउआ लोग खातिर भोजपुरी समय लेके आइल बा हास्य-व्यंग्य के रस में सराबोर समसामयिक विषय पर भोजपुरी आ हिन्ही के प्रसिद्ध साहित्यकार आ छंद विधा के जानकार श्री अमरेंद्र कुमार सिंह जी के ई लेख ”सेल्फी” सेल्फी हम चाहे रउआ कइसन लागत बानी, ,ई जाने के सुरूआत कइसे भइल, येकरा बारे में पूरा जानकारी…

Read More

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के मिली हिन्दुस्तानी एकेडेमी के भिखारी ठाकुर भोजपुरी सम्मान

जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के मिली हिन्दुस्तानी एकेडेमी के भिखारी ठाकुर भोजपुरी सम्मान शैलेंद्र कुमार तिवारी, भोजपुरी समयः  देश के प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था हिन्दुस्तानी एकेडेमी प्रयागराज शुक्रवार के अपने राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारन के घोषणा कइलस। एह बेरी भोजपुरी खाति भिखारी ठाकुर भोजपुरी सम्मान ”आखर–आखर गीत” बदे चंदौली जिला के बरहुआं गाँव के बेटा आ वर्तमान में गाजियाबाद में रहे वाला जयशंकर प्रसाद द्विवेदी के दीहल जाई। ए सम्मान के साथे उनुका के संस्था के ओरी से एक लाख रुपीया के धनराशीयो दीहल जाई। भोजपुरी का क्षेत्र में दीहल जाये वाला…

Read More

लुप्त होखत फगुवा

माघ के बसंत पंचमी से शुरु होखे वाला फगुनी बयार आ ओकरा संगे शुरु फगुआ गावे के परंपरा अब बिला रहल बा। एही सभ पर अपना लेखनी के जरिए आपन चिंता जाहिर कर रहल बानी भोजपुरी के सुप्रसिद्ध ई पतिरिका सिरिजन के उपसंपादक श्री तारकेश्वर राय तारक जी। सभके परनाम आ जय भोजपुरी आज गांव के फगुआ के बड़ा इयाद आवता। कबो नीक फगुवा गावल गाँव के इज्जत बढ़ावत रहे, अब उ परम्परा हांफत बीया ओकर दम बन्द होखहीं वाला बा।  अपना अस्तित्व के बंचावे ख़ातिर हाँथ गोड़ पटकत लउकतीया।…

Read More

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान करी दू गो भोजपुरी महिला साहित्यकारन के सम्मानित

भोजपुरी समय, राम प्रकाश तिवारी, गाजियाबादः भोजपुरी के संविधान के आठवां अनुसूची में स्थान दियावे खातिर आंदोलनरत भोजपुरीया समाज खातिर एगो सुखद खबर बा। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान भोजपुरी के दूगो वरिष्ठ महिला साहित्यकारन के अबकी बरिस सम्मानित करे के घोषणक कइले बा। संस्थान से मिलल सूचना के मोताबिक अबकी भोजपुरी से  डॉ. प्रेमशीला शुक्ल आ डॉ. सुमन सिंह के क्रमशः राहुल सांकृत्यायन सम्मान आ भिखआरी ठाकुर सम्मान से सम्मानित करे के निरणय कइले बा। डॉ. प्रेमशीला शुक्ल के उनकरा कहानी संग्रह “जाए के बेरिया” खातिर राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार दिहल जाई।…

Read More