उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान करी दू गो भोजपुरी महिला साहित्यकारन के सम्मानित

भोजपुरी समय, राम प्रकाश तिवारी, गाजियाबादः भोजपुरी के संविधान के आठवां अनुसूची में स्थान दियावे खातिर आंदोलनरत भोजपुरीया समाज खातिर एगो सुखद खबर बा। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान भोजपुरी के दूगो वरिष्ठ महिला साहित्यकारन के अबकी बरिस सम्मानित करे के घोषणक कइले बा। संस्थान से मिलल सूचना के मोताबिक अबकी भोजपुरी से  डॉ. प्रेमशीला शुक्ल आ डॉ. सुमन सिंह के क्रमशः राहुल सांकृत्यायन सम्मान आ भिखआरी ठाकुर सम्मान से सम्मानित करे के निरणय कइले बा। डॉ. प्रेमशीला शुक्ल के उनकरा कहानी संग्रह “जाए के बेरिया” खातिर राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार दिहल जाई।…

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अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

यदि साचों में हमनी के भोजपुरी भा अपनी मातृभाखा के ले के गंभीर बानी जा तऽ हमनी के सोशल मीडिया में भोजपुरी में भले लिखीं जा चाहें ना बाकिर हमनी अपना घर के लइकन से भोजपुरी में बतियावे के चाहीं। बदलल समाज बेवस्था में सरकार के बहुत बरियार जोगदान बा बाकिर सगरी दोख सरकार पऽ डालि दिहला से हमनी के जिम्मेदारी खत्म ना हो जाई। जदि लोग एह बेरा ना चेताई तऽ दोसर भाखा जल्दिए मातृभाखा बनि जइहन सऽ अउरी हमनी के देखते रहि जाइब जा। जदि संभव होखे तऽ हमनी के इवेंड मोड से बहरी निकसि के अपनी मातृभाखा (संस्कृति आ अथाह ज्ञान) के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी ले प्राकृतिक तरीका से हस्तांतरित करीं जा।

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रूपिया के गाछ

रामसेवक आ सीताराम एके ऑफिस में काम करत रहे लो। दूनू जाने लइकाईं के संघतिया रहे लोग आ सब तरे बराबर रहे लो। एक दिने सीताराम कहले कि “भाई रामसेवक, सुनऽ अब हमनी के लइका सेयान होतारे सं। एकनी खातिर कुछ जोड़ बिटोर करे के चाहीं। तु का कहतारऽ बतावऽ” सीताराम के ई बात सुन के रामसेवक कहले कि “हो भाई, बात त तुं नीमन कहतारऽ, हमनी के कुछ करे के चाहीं। अब तुं बताव का करे के तहार विचार बा?”  एह बात पर सीताराम कहले कि “सुनऽ हम कहेब…

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बसंत के नांवे पाती

बीतत जाड़ के संगे संगे प्रकृति में, ऋतु में बदलाव आवे लागेला। ई बदलाव माघ के अंजोरिया में पंचमी जवना के बसंत पंचमीयो कहल जाला के संगे आउर जादा लउके लागेला। बाकिर आजकाल ई बदलाव गांव जवार से लगभग नदारद हो गइल बा। त आईं आज भोजपुरी समय पर पढ़ीं भोजपुरी आ हिन्दी के छंद विधा के सशक्त नांव अमरेंद्र कुमार सिंह के बसंत से ई निहोरा भरल पाती।  हरियर धरती के दगदग पीयर रंग में रंगेवाला, ठूँठ फेंड़ में पचखी फेकावेवाला, सकल चराचर में नया जोस खरोस भर देबेवाला…

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हास्य – व्यंग्य भोजपुरी का आगे बढ़ी !

‘‘खूब भइल । इहे नूँ भोजपुरी के असली कवि सम्मेलन भइल हवे । कुछ लोग हमनी के कविता ना होखे देवे खातिर साजिश रचले रहल हवे । हमनी के ओकरा के विफल कर दिहनी । जय हो ! जय हो !

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भुकभुकवा के छापाखाना

कोरोना महामारी आ एकरा कारण भइल वैश्विक लॉकडाउन के कारण घर में बइठल बइठल सभकर मन अगुता गइल बा। अइसन में जहां सरकार के द्वारा धीरे धीरे लॉकडाउन खोले के प्रक्रिया शुरु हो चुकल बा आ जिनगी के गाड़ी अपना पटरी पर लवट रहल बिया। त एह समय में रउआ सभे के अपना चुटीला हास्य व्यंग्य के रचना से हंसावे आ गुदगुदावे खातिर भोजपुरी समय.कॉम लेके आइल बा दिल्ली एनसीआर में भोजपुरिया कवि के नाम से विख्यात प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि आ भोजपुरी साहित्य सरिता के संपादक आदरणीय जयशंकर प्रसाद द्विवेदी…

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भिखारी ठाकुर जयंती पर जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया आयोजित कइलस ऑनलाइन कार्यक्रम

राम प्रकाश तिवारी,भोजपुरी समय, तिनसुकिया आसामः इतिहास में 18 दिसंबर भोजपुरी के शेक्सपियर कहाए वाला लोक कलाकार भिखारी ठाकुर के जन्मदिन के रुप में दर्ज बा। भिखारी ठाकुर के 133 वां जयंती पर जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया संस्था ऑनलाइन काव्य गोष्ठी सह सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन कइलस। एह कार्यक्रम के शुरुआत सर्वप्रथम संस्था के फरीदाबाद में रहेवाला केंद्रीय अध्यक्ष सतीश कुमार त्रिपाठी दीया जरा के कइलें। एकरा बाद आसाम में रहे वाली वंदना चौबे भिखारी ठाकुर जी के फोटो पर माल्यार्पण करके कार्यक्रम के आगे बढ़वनी। पूजा प्रसाद के सधल आ सुमधुर…

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जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया के कवि सम्मेलन में कविता के सागर में डुबुकी लगवलें श्रोता

राम प्रकाश तिवारी, भोजपुरी समय, अमहीं मिश्र गोपालगंजः साफ सुथरा गीत गवनई आ भोजपुरिया संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से,  साल 2015 में वहाट्सएप पर एगो ग्रुप के रुप में स्थापित आ साल 2017 में न्यास के रुप में देश के राजधानी दिल्ली में पंजीकृत “जय भोजपुरी- जय भोजपुरिया” परिवार के सालाना सांस्कृतिक आ साहित्यिक महोत्सव-3 के आयोजन बिहार के गोपालगंज जिला के अमहीं मिश्र गांव में भइल। ई आयोजन में हर बरिस के जइसे अबकिरो दूगो सत्र राखल गइल रहे। कार्यक्रम के पहिलका सत्र में जहां संस्था के अध्यक्ष…

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पाती के संपादक वरिष्ठ भोजपुरी साहित्यकार डॉ. अशोक द्विवेदी के मिलल साल 2020 के अंजन सम्मान

राम प्रकाश तिवारी, भोजपुरी समय, अमहीं मिश्र गोपालगंजः 23 नवंबर 2020 के कोरोनाकाल का डेग-डेग पर बन्हन का बावजूदो अमहीं मिसिर, भोरे, गोपालगंज में इतिहास रचाइल, जब “जय भोजपुरी- जय भोजपुरिया” के अध्यक्ष सतीश कुमार त्रिपाठी (सपत्नीक) उपस्थित गणमान्य लोग ज्वाला सिंह (अध्यक्ष- सारण भोजपुरिया समाज, वरिष्ठतम सवांग- जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया), विमलेन्दु भूषण पाण्डेय(संस्थापक- सारण भोजपुरिया समाज आ वरिष्ठ परामर्शी- जय भोजपुरी-जय भोजपुरिया), प्रखरवक्ता जीतेन्द्र द्विवेदी, केशव तिवारी (चुन्नू बाबा), भावेश अंजन, राम प्रकाश तिवारी(संपादक, भोजपुरी समय.डॉट कॉम)  आ अन्य का साथे दीया जरवनीं आ महाकवि “अंजन जी” का चित्र…

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‘सूपवा बोले त बोले चलनियों बोले, जेम्मे बाटे बहत्तर छेद’

भोजपुरी साहित्य के सुप्रसिद्ध पत्रिका भोजपुरी साहित्य सरिता के  संपादक, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार के संगे संगे भोजपुरी भाषा के प्रखर पैरोकार श्री जयशंकर प्रसाद द्विवेदी उर्फ जे.पी.भइया के लिखल एगो टटका व्यंग रचना के पढ़ीं आ भोजपुरिया बधार में उपस्थित लक्षणा आ व्यंजना के आनंद उठाईं। का जमाना आ गयो भाया,जेने देखी, भउका भर-भर के गियान बघारल जा रहल बा। गियान बघारे का फेरा में दरोगा, सिपाही से लेके जेब कतरा आ चोरन के सरदारो तक लागल बा लो। अपना लोक में एगो कहाउत पुरनिया लोग क़हत ना अघालें कि…

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