महेंन्द्र मिसिर के नाम पर ई-पुस्तकालय के स्थापना पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन के भइल आयोजन

राम प्रकाश तिवारी,भोजपुरी समय, छपरा: आज जब चारोें ओर भोजपुरी भाषा के मान सम्मान के पुर्नस्थापना, भोजपुरी भाषा में अश्लील गीतन पर रोक लगावे अऊरी एकर बहिष्कार करे के मुहिम चल रहल बा। अइसन में भोजपुरी भाषा के नवका पीढ़ी में रोपे के संगे-संगे पुरनका आ नयका समय के भोजपुरी के कवि, रचयिता,गीतकार आ कलमकार के मान सम्मान खातिर हरदम प्रयत्नशील रहेवाला मंच अखिल भारतीय भोजपुरी संघ भोजपुरी के महान गीतकार, भोजपुरी गीतन के पहचान पूर्वी के जनक आ स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक पंडित महेंनदर मिसिर के नांव पर स्थापित…

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आद्रा नक्षत्र पर विशेष

*आद्रा नक्षत्र पर विशेष* सूरज के आद्रा नक्षत्र में जाए के साथ-साथ ,एह नक्षत्र के शुरुआत हो जाला।ई हर साल 22 जून के 24 घंटा में कवनो समय चाहे भोर में, चाहे दुपहरिया में, चाहे सांझि ले एह नक्षत्र के शुरुआत होला।ई 27 नक्षत्र में से छठवां नक्षत्र ह। जइसे लइकी के अइला पर खीर पूरी बना के स्वागत कइल जाला, ठीक ओसही एह नक्षत्र के भी खीर पुरी के साथ स्वागत कइल जाला। ई नक्षत्र 15 दिन तक रहेला। कवनो कवनो जगह पर अतना दिन तक उत्सव के रूप…

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संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार- डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ उत्तर भारत के मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के क्रांतिकारी संतकवि कबीर के जनम तिथि, जन्म स्थान, परिवार, भासा, मरन तिथि आदि के लेके बिद्वान लोग के एकमत नइखे। आ जदि कबीर अपने चाहे उनका समकालीन उनकर केहू भक्त नइखे लिखले त जनम तिथि, जनम स्थान, परिवार आ मरन तिथि के लेके ठोस सबूत जुटावल कठिन बा। अइसहूं पहिले सम्पन्न परिवार का लरिका के जनम पतरी ना बन पावत रहे। विरले केहू का घरे लरिका पैदा होखे त…

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‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

महान संत कवि कबिर दास जी के जयंती पर पढ़ीं डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ के कबिर दास के सगुनोपासना पर लिखल ई आलेख ‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ संत कबीरदास के बारे ई आम राय बा कि ऊ उत्तर भारत में निरगुन भक्ति धारा के पहिल संतकवि हवें। बाकिर हमरा समझ से कबीरदास खाली निरगुनिए भक्ति धारा के संत नइखन। ऊ सुगुन भक्ति धारा के भक्तो बाड़न। बाकिर ओह तरह से ना जइसे सगुन भक्ति धारा के संतकवि तुलसीदास बाड़न। तबो जे अपना नाम के पाछे दास लगवले…

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नवमी के करीं माई सिद्धिदात्री के पूजा

चैत्र नवरात्र के आज नऊंवां दिन ह। आज देवी दुर्गा के नंऊवा स्वरूप माई सिद्धिदात्री के पूजा कइल जाला। आज साधक के मन निर्वाण चक्र में स्थित रहेला। माई सिद्धिदात्री भगवान विष्णु के अर्धांगिनी हईं| जइसन कि सिद्धिदात्री, नांव से स्पष्ट बा कि माई सिद्धियन के देवे वाला हई। एही से अइसन कहल जाला कि इनकर पूजा कइला से आदमी के हर तरे के सिद्धि प्राप्त होखेला। चूंकि माई अपना एह रुप में कमल पर विराजमान बानी जवना के कारण इहां के कमला माइयो कहल जाला। मधु आ कैटभ के…

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नवरात्र के आठवां दिने माई के महागौरी रुप के उपासना के विधान हऽ

श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ।। नवरात्र के नौ दिन के पावन पर्व अब अपना अंतिम पड़ाव पर बा। नवरात्र के नौ दिन में रोज देवी दुर्गा के नौ रूपन में से एक रुप के पूजा कइल जाला बाकिर नवरात्र के आठवां आ नंउवाँ दिने दुर्गा जी के नौ रूपन के प्रतीक में कन्या पूजन के विधान बा। कन्या पूजन एह पर्व के महत्व के आउर बढ़ा देला। त आईं आज जानल जाओ देवी दुर्गा के आठवां स्वरुप के बारे में । देवी दुर्गाजी के आठवां शक्ति…

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नवरात्र के सातवां दिने करीं महामाई कालरात्रि के उपासना

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।। वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि।। माई दुर्गा के सातवां शक्ति भा स्वरुप के भगवती कालरात्रि के नाम से जानल जाला। देवी कालात्रि के काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी आउर दुर्गा देवी के कइगो विनाशकारी रूप में से एगो मानल जाला। माई के रौद्री आ धुमोरना नाम लोगन में तनी कम प्रसिद्ध नामन में से बा। नवरात्र के सातवां दिने महामाई कालरात्रि के उपासना के विधान बा। अइसन मानल जाला कि जहंवां देवी कालरात्रि के एह रूप में आगमन होला ओजा से…

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नवरात्र के पाँचवाँ दिने देवी स्कंदमाता के उपासना करीं

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया । शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।। नवरात्र के पाँचवाँ दिने देवी स्कंदमाता के उपासना कइल जाला। सभ जीव खातिर मोक्ष के दुआरी खोले वाली माई परम सुखदायी हई। माँ अपना भक्तन के समस्त इच्छा के पूर्ति करेली। शास्त्रन में आइल काथा के मोताबिक भगवान स्कंद “कुमार कार्तिकेय” के नांव से भी जानल जाइले। इहां के प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवता लोग के सेनापति बनल रहनी। पुराणन में इनका के कुमार आउर शक्ति कहके इनका महिमा के वर्णन कइल गइल बा। एही भगवान स्कंद के माई होखला के…

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नवरात्र के चउथा दिने करीं देवी कूष्मांडा के उपासना

ॐ सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कुष्मांडा शुभदास्तु मे। ब्रह्मांड के उत्पन्न करे वाली माई कुष्मांडा नवरात्र में चउथा दिन दूर्गा देवी के कुष्मांडा के रूप में पूजल जाला। अपना मंद-मंद हंसी से अण्ड माने ब्रह्मांड के उत्पन्न कइला के कारण एह देवी के कुष्मांडा नाम से बोलावल जाला। अइसन कहल जाला कि जब सृष्टि ना रहे, चारों ओर अन्हारे अन्हार रहे, तब इहे देवी अपना ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड के रचना कइले रहली। एही से इनका के सृष्टि के आदिस्वरूपा चाहे आदिशक्ति कहल गइल बा। आठगो हाथ के कारण…

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नवरात्र के तीसरका दिने देवी दुर्गा के तीसरा स्वरूप देवी चंद्रघंटा के करीं पूजा-आराधना

जय मां चंद्रघंटा देवी ॐ या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः। नवरात्र के तीसरका दिने देवी दुर्गा के तीसरा स्वरूप देवी चंद्रघंटा के पूजा-आराधना कइल जाला। नवरात्र में दुर्गा-उपासना के तीसरा दिन के पूजा के विशेष महत्व होला। मां दुर्गाजी के तीसरा शक्ति के नाम चंद्रघंटा हऽ। नवरात्र उपासना में तीसरा दिन इन्हीं के विग्रह के पूजन-अर्चन कइल जाला। माई के ई स्वरुप परम शान्तिदायक आउर कल्याणकारी हऽ। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के शरीर के रंग सोना के समान चमकीला बा। इनका मस्तक…

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