संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार- डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ उत्तर भारत के मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के क्रांतिकारी संतकवि कबीर के जनम तिथि, जन्म स्थान, परिवार, भासा, मरन तिथि आदि के लेके बिद्वान लोग के एकमत नइखे। आ जदि कबीर अपने चाहे उनका समकालीन उनकर केहू भक्त नइखे लिखले त जनम तिथि, जनम स्थान, परिवार आ मरन तिथि के लेके ठोस सबूत जुटावल कठिन बा। अइसहूं पहिले सम्पन्न परिवार का लरिका के जनम पतरी ना बन पावत रहे। विरले केहू का घरे लरिका पैदा होखे त…

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चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस

चरमरात बेवस्था- उंखड़त साँस बेशक आपन देश के पहिचान दुनियाँ जहांन में गाँवन के देश के रूप में ही बा। बाकिर आजादी के सात दशक के बादो गाँव आपन बुनियादी जरूरत चिकित्सा, शिक्षा आदि खातीर जूझ रहल बा। गोरन से त आजादी मिल गइल बाकि अपना देश के आपन लोगन के दबंगई से ना मिलल। राम राज्य के कल्पना खाली सपने बनी के रह गइल। राजनीति जनसेवा ना आपन घर भरे के साधन बनी के रह गइल बा, अधिकतर नेता जी लोग खातीर। कुछ लोग अपवाद हो सकता। सरकारी मुलाजिम…

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लौह पाद से प्रवेश करत विक्रम संवत 2078

विक्रमी संवत 2078 के शुरुआत हो रहल बा आज से, एह दिन के सनातन परंपरा के लोग आपन नववर्ष कहेलें। भारत के संगे-संगे दुनिया के कोना-कोना में रहे वाला सनातनी लोग एह दिन के हर्ष आ उल्लास से मनावेलें। त आईं रउओ पढ़ीं नववर्ष पर तारकेश्वर राय तारक जी के लिखल ई आलेख। आज हमनी के हिन्दू रीती के अनुसार नवका साल के समहूत हो रहल बा | विक्रम संवत् 2078 चइत अंजोर एकम, 13 अप्रैल 2021 अर्थात आज पहिला दिन ह नव सवंत्सर के। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार आजे…

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आधार के बिना गरीब काहे बे-आधार, आधार-लिंक ना भइला के सजा गरीबन के काहे?

सुप्रीम कोर्ट

आज से कई बरिस पहिले जब केन्द्र सरकार देश के जनता खातिर आधार कार्ड के बनावे के घोषणा कइलस तऽ कहलस कि ई कार्ड लोग के भलाई आ फायदा खातिर होखी। एकरा बार बाद साल 2014 से केन्द्र में पीएम मोदी के अगुआई में सत्तासीन बीजेपी के सरकार जब आधार कार्ड के सभ प्रकार के सरकारी योजना के लाभ लेवे खातिर जरुरी बनवलस, तऽ लोग में ई उम्मेद जागल कि ऐसे अब गरीब-गुरबा के भलाई होखी। काहे कि एह कड़ी में सरकार से कम दाम चाहे मुफ्त में मिले वाला…

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स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति

इतिहास साक्षी बा आजादी के बादो राजभाषा हिन्दी के पूरा देश मन से सुविकार ना कइलस। हिन्दी के बढ़ावा देखे खातीर समय समय पर सरकार पखवाड़ा प्रोमोशन इनाम जइसन कदम उठावते रहेले। एकरा बावजूद देश के दक्षिणी हिस्सा एकरा के अपना पर बलजोरी थोपले मानेला आ गाहे बगाहे बिरोध के स्वर उठवते रहेला। अइसन माहौल में पश्चिम बंगाल के चुनावी सरगरमी के केंद्र में हिन्दी आ ओहसे जुड़ल मुद्दा बा, त ई संकेत बा बदलाव के। गैर हिन्दी क्षेत्र में हिन्दी से जवन सौतिया डाह रहे ओमें कमी आ रहल…

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अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

यदि साचों में हमनी के भोजपुरी भा अपनी मातृभाखा के ले के गंभीर बानी जा तऽ हमनी के सोशल मीडिया में भोजपुरी में भले लिखीं जा चाहें ना बाकिर हमनी अपना घर के लइकन से भोजपुरी में बतियावे के चाहीं। बदलल समाज बेवस्था में सरकार के बहुत बरियार जोगदान बा बाकिर सगरी दोख सरकार पऽ डालि दिहला से हमनी के जिम्मेदारी खत्म ना हो जाई। जदि लोग एह बेरा ना चेताई तऽ दोसर भाखा जल्दिए मातृभाखा बनि जइहन सऽ अउरी हमनी के देखते रहि जाइब जा। जदि संभव होखे तऽ हमनी के इवेंड मोड से बहरी निकसि के अपनी मातृभाखा (संस्कृति आ अथाह ज्ञान) के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी ले प्राकृतिक तरीका से हस्तांतरित करीं जा।

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आर्थिक गतिविधि महामारी से पहिले वाला स्तर पऽ पहुँचल

आर्थिक गतिविधियन के सूचकांक के साथे गतिशीलता, बिजली के खपत अउरी श्रम भागीदारी जइसन उच्च आवृत्ति वाला संकेतक बतावत बाड़े सऽ कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधि कोरोनाकाल से पहिले वाला स्तर से लगभग खाली 1.9% नीचे रहि गइल बा। लगभग सगरी उच्च आवृत्ति वाला आर्थिक संकेतक बतावत बाड़े कि भारतीय अर्थव्यवस्था जल्दिए पूर्व-महामारी के स्तर के जल्दिए पा जाई। हालांकि कि संगही इहो उम्मीद बा कि गतिशीलता आ श्रम भागीदारी संकेतकन के महामारी से पहिले वाला स्तर के पावे में अभी कुछ समय लागी। गतिशीलता संकेतक महामारी के पहिले…

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वैलेंटाइन डे – एगो नवका तेवहार

एगो नावा टटका पढल लिखल एडभांस युवा होखत समाज में छुवा छूत के बीमारी नीयन फइलत सात दिन से चले वाला प्रेम के समर्पित तेवहार के 14 फरवरी के दिन “वेलेंटाइन डे” के रूप में मनावे के परिपाटी जोर पकड़ रहल बा अपना देश मे। प्यार के समर्पित ई जश्न के ई स्पेशल ऑकेजन अब सप्ताह भर के उत्सव बन गइल बा जेकरा के वेलेंटाइन वीक के नाँव दिहल गईल बा। वेलेंटाइन डे के केहुके प्रति भी अपना प्रीत के दरसावे के परम्परा रहे यूरोपीय देश मे। जरूरी ना रहे…

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बदलत परम्परा

ए जमुना? जमुना…. कहाँ बाड़े रे बचवा? ई त बड़की माई के आवाज ह। आव बड़की माई आ जो… गोड़ धरतानी ये बड़की माई । अरे ! छोटकू तू कब अइलsह बचवा ? बाड़ न ठीक ठाक दुल्हिन आ बाल बच्चा के ना ले अइल हs ? बड़की माई सभे आपन पढ़ाई लिखाई आ काम धन्धा में बाझल बा । अम्मा के तबियत खराब के समाचार मिलल ह देखे आ गइनी हs । बड़ा निमन कइल हs ये बचवा । भगवान जीव जाँगर बनवले राखँस… बड़की माई कहलस । जीजी…

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देशी आंदोलन में लागल बिदेशी तड़का

agriculture in India

देश के बुढ़वा लोकतंत्र में पढ़ल लिखल साहब कहाये वाला समाज से सम्बन्ध राखे वाला लोग के जाहिल नीयन हिंसा के तसवीर पूरा दुनियाँ देखलस आ खुबे किरकिरी आ शिकायत भइल एह कृत्य के। सत्ता हस्तांतरण के समय अइसन उत्पात के नाजिर कमें देखे के मिलेला इतिहास में। शर्मसार भइल अइसन देश जेकर सम्मान आजुवो पूरा दुनियाँ करेला। अभी एह घटना जेहन से मिटल ना रहे । तबे दुनियाँ के बड़हन लोकतंत्र में नावा कृषि कानून के बिरोध में महीनन से देश के राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर धरना पर…

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