उखड़त साँस-वेंटिलेटर पर आपूर्ति तन्त्र

उखड़त साँस-वेंटिलेटर पर आपूर्ति तन्त्र जग जाहिर बा कि हमनीके देश मे प्राणवायु कहाये वाला ऑक्सीजन के माने मेडिकल ऑक्सिजन के उत्पादन खपत से अधिका होला, एक महीना पहिले के उत्पादन के आंकड़ा एकर प्रत्यक्ष प्रमाण बा। लेकिन अइसन का भइल की एकर किल्लत आजकाल देश के मीडिया के सुर्खी बनल बा। समय पर एकर उपलब्धता ना होखला के चलते करीब सैकड़न लोग के असमय जीवन के दिया बुता गइल। स्थानीय प्रसाशन से लेके आला अधिकारी मुख्यमंत्री से लेके प्रधानमंत्री तक के एकर आपूर्ति पर नजर बा। उच्च न्यायालय भी…

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कोरोना पर भारी सतुआन

कोरोना महामारी देश के कुछ हिस्सा में अपना पूरा सबाब पर बा, ताण्डव मचवले बा, के कब एकरा चपेट में आ जाइ केहू नइखे जानत, एहतियात बरतल त जरूरी बटले बा, साथे साथ टीकाकरण भी चल रहल बा, उहो लगावल समय के जरूरत बा । एह धरा धाम पर कुछउ स्थायी नइखे, जे आइल बा ओके जहिं के परी। हं समय अनिश्चित बा। ई कोरोना भी जाइ, जहिं के परी, समय के पंक्षी कहाँ रुके वाला उ त उड़ते रही, अइसन समय में आइल सतुआन, उत्सवधर्मिता त हमनीके नश नश…

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लुप्त होखत फगुवा

माघ के बसंत पंचमी से शुरु होखे वाला फगुनी बयार आ ओकरा संगे शुरु फगुआ गावे के परंपरा अब बिला रहल बा। एही सभ पर अपना लेखनी के जरिए आपन चिंता जाहिर कर रहल बानी भोजपुरी के सुप्रसिद्ध ई पतिरिका सिरिजन के उपसंपादक श्री तारकेश्वर राय तारक जी। सभके परनाम आ जय भोजपुरी आज गांव के फगुआ के बड़ा इयाद आवता। कबो नीक फगुवा गावल गाँव के इज्जत बढ़ावत रहे, अब उ परम्परा हांफत बीया ओकर दम बन्द होखहीं वाला बा।  अपना अस्तित्व के बंचावे ख़ातिर हाँथ गोड़ पटकत लउकतीया।…

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स्वारथ लागि करहिं सब प्रीति

इतिहास साक्षी बा आजादी के बादो राजभाषा हिन्दी के पूरा देश मन से सुविकार ना कइलस। हिन्दी के बढ़ावा देखे खातीर समय समय पर सरकार पखवाड़ा प्रोमोशन इनाम जइसन कदम उठावते रहेले। एकरा बावजूद देश के दक्षिणी हिस्सा एकरा के अपना पर बलजोरी थोपले मानेला आ गाहे बगाहे बिरोध के स्वर उठवते रहेला। अइसन माहौल में पश्चिम बंगाल के चुनावी सरगरमी के केंद्र में हिन्दी आ ओहसे जुड़ल मुद्दा बा, त ई संकेत बा बदलाव के। गैर हिन्दी क्षेत्र में हिन्दी से जवन सौतिया डाह रहे ओमें कमी आ रहल…

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वैलेंटाइन डे – एगो नवका तेवहार

एगो नावा टटका पढल लिखल एडभांस युवा होखत समाज में छुवा छूत के बीमारी नीयन फइलत सात दिन से चले वाला प्रेम के समर्पित तेवहार के 14 फरवरी के दिन “वेलेंटाइन डे” के रूप में मनावे के परिपाटी जोर पकड़ रहल बा अपना देश मे। प्यार के समर्पित ई जश्न के ई स्पेशल ऑकेजन अब सप्ताह भर के उत्सव बन गइल बा जेकरा के वेलेंटाइन वीक के नाँव दिहल गईल बा। वेलेंटाइन डे के केहुके प्रति भी अपना प्रीत के दरसावे के परम्परा रहे यूरोपीय देश मे। जरूरी ना रहे…

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बदलत परम्परा

ए जमुना? जमुना…. कहाँ बाड़े रे बचवा? ई त बड़की माई के आवाज ह। आव बड़की माई आ जो… गोड़ धरतानी ये बड़की माई । अरे ! छोटकू तू कब अइलsह बचवा ? बाड़ न ठीक ठाक दुल्हिन आ बाल बच्चा के ना ले अइल हs ? बड़की माई सभे आपन पढ़ाई लिखाई आ काम धन्धा में बाझल बा । अम्मा के तबियत खराब के समाचार मिलल ह देखे आ गइनी हs । बड़ा निमन कइल हs ये बचवा । भगवान जीव जाँगर बनवले राखँस… बड़की माई कहलस । जीजी…

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देशी आंदोलन में लागल बिदेशी तड़का

agriculture in India

देश के बुढ़वा लोकतंत्र में पढ़ल लिखल साहब कहाये वाला समाज से सम्बन्ध राखे वाला लोग के जाहिल नीयन हिंसा के तसवीर पूरा दुनियाँ देखलस आ खुबे किरकिरी आ शिकायत भइल एह कृत्य के। सत्ता हस्तांतरण के समय अइसन उत्पात के नाजिर कमें देखे के मिलेला इतिहास में। शर्मसार भइल अइसन देश जेकर सम्मान आजुवो पूरा दुनियाँ करेला। अभी एह घटना जेहन से मिटल ना रहे । तबे दुनियाँ के बड़हन लोकतंत्र में नावा कृषि कानून के बिरोध में महीनन से देश के राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर धरना पर…

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बहुते अनोखा बा बहत्तरवां गणतंत्र दिवस

कोविड-19 से उपजल समस्या अउरी कुफुत के बीच देश आपन 72वां गणतंत्र दिवस मना रहल बा। परम्परा के निभावे के त बटले बा लेकिन पारम्परिक भब्यता एह बेर देखे के ना मिलल । दिल्ली में आयोजित मुख्य परेड में सामिल होखे वाला जवान आ झांकी के गिनती भी पहिले के मुकाबला आधे बा अउरी परेड हर साल लाल किला पर खत्म होला एह बेर नेशनल स्टेडियम पर ही खतम हो गइल । जवन पूरा दूरी के आधे रहे। सरकारी फरमान के चलते दर्शक के संख्या भी सीमित रहे। ए बेर…

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घर बदलल जर बदलल – बदल गइल रहन

ई साँच बा कि समय के साथ सोच शरीर आसपास आम खास कुल्हिये कुछ ना कुछ बदली जाला । ई बदलाव देंखि के जीनिगी प्रभावित त होखबे करेले । देंखि ना पिछला कुछ साल में हमनीके समाज खुबे बदलल बा। बदलाव के बयार से शहर पर भार बढ़ल त उ गाँव की ओर लपकल पहिले त सिवान खेत बघार के घोंटलस आ आगे मुहे बढ़े के काम अबहियो चालुये बा। गाँव शहर भइल त माहौल बदलल आ माहौल के बदलाव से अदमी के सोच समझ बदल गइल, धन ज्ञान जजात…

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अफवाह के आग से घिरल कोरोना वैक्सीन

कोरोना महामारी के संक्रमण के चलते अदमी के जिंदगी कटाह बन गइल रहल ह आ अबहियो बिपत ओराइल नइखे। जिन्दगी पर उदासी के बदरी घनघोर घेरले बा। अपना देश मे आपन वैक्सीन ईजाद भइला से उमीद के किरण लउकल बा आ बदरी अब गते गते छँटे लागल बिया। भारत अपना बलबुते दुनिया के सबसे बड़हन टीकाकरण अभियान देश के प्रधानमंत्री मंत्री के हाथे “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे भवन्तु निरामयाः” के महामंत्र के साथे श्री गणेश क के कोरोना के खिलाफ निर्णायक जंग के एलान कई दिहलस। पहिला चरण में करीब…

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