प्राकृतिक आपदा के कारण बा प्रकृति चक्र से छेड़छाड़-अमरेंद्र कुमार सिंह

आज जब समूचा विश्व कोरोना दइसन महामारी से जूझ रहल बा अइसन में एकरा से बचे के उपाय आ एह तरह के प्राकृतिक आ आदमी के बनावल आपदा के कारण पर संक्षेप में चर्चा किले बानी आरा के प्रख्यात कवि आ भोजपुरी के लेखक अमरेंद्र कुमार सिंह, त आईं पढ़ल जाओ ऊंहा के लिखल ही लेख

प्रकृति चक्र से छेड़छाड़ बा आपदा के कारण
ब्रह्माण्ड के प्रकृति चक्र के असंतुलित होखला से, आजु पूरा के पूरा मानव जाति डेराई के घर में लूकाइल बा, जवना के समूचा दोष खुद अदिमी के बा । प्रकृति चक्र के उल्टा काम करे के प्रवृत्ति गते – गते सभ लोग में समा गइल बा । ब्रह्माण्ड के संतुलित राखे खातिर एगो प्रकृति चक्र बा । जदि ओहसे तनिको ऐने – ओने , छेड़ – छाड़ कइल जाई त अइसने बुरा हाल होई । ई कोरोना वायरस, जवन प्रकोप भा कहर बरिसवले बा, ऊ मानव जाति के साफ-साफ सनेस दे रहल बा कि प्रकृति से खेलवाड़ मति करीं । कुदरत समस्त मानव जाति के समय – समय पर हरमेसा सनेस देत रहेला, बाकि जदि हमनी सँ समय रहते येह बात के धेयान ना देबि त का होई ई आज साफ – साफ लउक रहलि बा ।


धन अर्जित करे के फेरा में , अपना स्वार्थ खातिर आज हमनी सँ ऊ सभ अवांछित आचार , आहार , बेवहार अपना लेले बानी जा जवन कि हमनिये खातिर जंजाल हो गइल बा । आजु हमनी के ओहि गाँछ के काटि रहलि बानी जवन हमनी के लगातार छाँह देत रहे । ई बात के दुनिया जानेला कि हमनी के सनातन संस्कृति एकदम से अध्यात्मिक आ वैज्ञानिक ह । हमनी के संस्कृति में छूआछूत के संक्रमण से बचे खातिर एकान्तवास भा आइसोलेसन अइसन पवित्रता के उपाय हजारन साल से बा । हमनी के जीवन – सैली अजेय रहलि बा । पूरा दुनिया के हमनी आयुर्विज्ञान के ज्ञान बँटले बानी जा । आजुवो नवरात्र में, छठ में , दिवाली में हमनी सँ हर साल अपना घर- दुआर के संगे-संगे अपनहूं के सैनेटाइज करेनी जा । अतने ना आजुओ रथ-जात्रा के दौरान हमनी सँ जगन्नाथ जी के 15 दिन ले एकांत में राख के रसोपचार करेनी जा , एह समय में भक्तगण के भगवान में ठेके के मनाही रहेला । ई एक तरह से आइसोलेशन ना हऽ त आउर का हऽ?
बीच -बीच में कतने विदेसी आक्रमणकारी सासक अइलनि जवना के कारन हमनी के अपना रीति , रेवाज आ जीये के तौर तरिका गते – गते भूलत गइनी जा । पछुआ बयार हमनी के भीतर तक पछुआ देलसि । जवना के परिणाम सामने बा। आजु हमनी सँ महामारी के कहर से मरि रहलि बानी। आजु जरूरत बा आपन सभ्यता, प्रथा, रंग -ढंग के अनुसरण करे के । जवना से कि हमनी के अइसन अछय ऊर्जा प्राप्त होई कि कवनो तरह के रोग , व्याधि ,अफतरा आ बलाय के वायरस खुद मरि जाई ।

अमरेन्द्र कुमार सिंह
आरा (भोजपुर) बिहार

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