आधार के बिना गरीब काहे बे-आधार, आधार-लिंक ना भइला के सजा गरीबन के काहे?

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्टआज से कई बरिस पहिले जब केन्द्र सरकार देश के जनता खातिर आधार कार्ड के बनावे के घोषणा कइलस तऽ कहलस कि ई कार्ड लोग के भलाई आ फायदा खातिर होखी। एकरा बार बाद साल 2014 से केन्द्र में पीएम मोदी के अगुआई में सत्तासीन बीजेपी के सरकार जब आधार कार्ड के सभ प्रकार के सरकारी योजना के लाभ लेवे खातिर जरुरी बनवलस, तऽ लोग में ई उम्मेद जागल कि ऐसे अब गरीब-गुरबा के भलाई होखी। काहे कि एह कड़ी में सरकार से कम दाम चाहे मुफ्त में मिले वाला राशन खातिर जरुरी राशन कार्ड के आधार से लिंक करे के बात रहे।

एक ओर जहां फ़रवरी 2017 में संसद में केन्द्र सरकार ई जानकारी दिहलस कि आधार से लिंक करे के प्रक्रिया के बाद तीन करोड़ पनचानबे लाख फर्जी राशन कार्डन के निरस्त कइल गइल बा। बाकिर बाद के जानकारियन से पता चलल कि जवन गरीबन के राशन कार्ड निरस्त कइल गइल, ओहमें से बहुत मामला में तकनीकी,  प्रशासनिक आउर भ्रष्टाचार-जनित अक्षमता एगो बड़हन कारण रहे। अब एही मामला में सुप्रीम कोर्ट सरकार से आपन नाराजगी जतवले बा। कोर्ट के कहनाम बा कि एह कमियन के चलते गरीब के अनाज पावे के अधिकार काहे ख़त्म कइल गइल? कोर्ट के ईहो कहनाम रहे कि जरूरत रहे कि एह कमियन के दूर कइल जाव। एह सन्दर्भ में कोर्ट के सोझा झारखण्ड के सिमडेगा के २८ सितम्बर, २०१७ के एगो मामला आइल जवना में एगो दलित परिवार के राशन कार्ड छव महिना से ऐसे रद्द कर दिहल गइल रहे कि ओह परिवार के कार्ड आधार से लिंक ना रहे। परिवार के कहनाम रहे कि लिंक करे खातिर कई बेर गइला के बादो केन्द्र पर इन्टरनेट ना होखला के कारण बता के लवटा दिहल गइल। ई मामला ओही परिवार के हऽ जवना में 11 बरिस के संतोषी नांव के एगो लइकी खाएक ना मिलला के कारण “भात-भात” रटते मर गइल रहे। ई घटना जभ भइल रहे तब दुर्गा-पूजा के छुट्टी के कारण इस्कूलो बंद रहली सं। ना तऽ कम से कम ओह लइकी के इस्कूल में मिले वाला मध्याह्न भोजनो मिल जाइत तऽ शाएद ओह लइकी के जिनगी बांच जाइत।

जहाँ एक ओर केंद्र सरकार आधार से लिंक न भइल राशन चाहे आउऱी कवनो पहचान पत्रन के फर्जी माने लागल  ओहिजा देश के तमाम राज्यन के सरकारन के एगो मौका मिलल एह मद में होखे वाला खर्चा में कटौती करे के। एकरा अलावा भ्रष्ट अधिकारी-दुकानदार गठजोड़ के एह नांव पर मिले वाला बेहद सस्ता राशन के ऊँच दाम पर बेचे के धंधो के शुरू करे के मौका मिल गइल। जहां एक ओर गरीबन के शिकाइत नक्कार खाना में बाजे वाला तूती के आवाज बन के रहि गइल, ओहिजा दोसरा ओर तमाम भ्रष्ट बेइमान अधिकारी आ दोकानदारन के मालामाल बना दिहलस। बता दीं कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश के दू-तिहाई लोगन के हर महिना एक से तीन रुपीया के भाव पर पांच किलो अनाज मिलेला। सुप्रीम कोर्ट में सरकार तीन साल पहिले कहले रहे कि आधार के औचित्य कल्याणकारी योजनन के सही तरीका से आउर तेजी से लागू करे में बा। कोर्ट अब नाराजगी व्यक्त कइले बा कि जदि सिस्टम त्रुटिपूर्ण बा त गरीबन के सजा काहे?

आर.पी.तिवारी

 

 

 

 

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