आद्रा नक्षत्र पर विशेष

*आद्रा नक्षत्र पर विशेष* सूरज के आद्रा नक्षत्र में जाए के साथ-साथ ,एह नक्षत्र के शुरुआत हो जाला।ई हर साल 22 जून के 24 घंटा में कवनो समय चाहे भोर में, चाहे दुपहरिया में, चाहे सांझि ले एह नक्षत्र के शुरुआत होला।ई 27 नक्षत्र में से छठवां नक्षत्र ह। जइसे लइकी के अइला पर खीर पूरी बना के स्वागत कइल जाला, ठीक ओसही एह नक्षत्र के भी खीर पुरी के साथ स्वागत कइल जाला। ई नक्षत्र 15 दिन तक रहेला। कवनो कवनो जगह पर अतना दिन तक उत्सव के रूप…

Read More

संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार- डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

संतकवि कबीर के जनम आ मृत्यु के तिथि बिचार – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ उत्तर भारत के मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के क्रांतिकारी संतकवि कबीर के जनम तिथि, जन्म स्थान, परिवार, भासा, मरन तिथि आदि के लेके बिद्वान लोग के एकमत नइखे। आ जदि कबीर अपने चाहे उनका समकालीन उनकर केहू भक्त नइखे लिखले त जनम तिथि, जनम स्थान, परिवार आ मरन तिथि के लेके ठोस सबूत जुटावल कठिन बा। अइसहूं पहिले सम्पन्न परिवार का लरिका के जनम पतरी ना बन पावत रहे। विरले केहू का घरे लरिका पैदा होखे त…

Read More

‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’

महान संत कवि कबिर दास जी के जयंती पर पढ़ीं डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ के कबिर दास के सगुनोपासना पर लिखल ई आलेख ‘संत कबीर के सगुनोपासना’ – डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ संत कबीरदास के बारे ई आम राय बा कि ऊ उत्तर भारत में निरगुन भक्ति धारा के पहिल संतकवि हवें। बाकिर हमरा समझ से कबीरदास खाली निरगुनिए भक्ति धारा के संत नइखन। ऊ सुगुन भक्ति धारा के भक्तो बाड़न। बाकिर ओह तरह से ना जइसे सगुन भक्ति धारा के संतकवि तुलसीदास बाड़न। तबो जे अपना नाम के पाछे दास लगवले…

Read More