भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता में बाधा काहे- हृषिकेश चतुर्वेदी

भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता पर आईं पढ़ल जाव भोजपुरी के विद्वान श्री हृषिकेश चतुर्वेदी जी के ई आलेख: सजाऊंगा लुटकर भी तेरे बदन की डाली को:- जगन्नाथ जी के किताब ‘भोजपुरी गजल के विकास यात्रा ‘ पढत घरी एगो बात जगन्नाथ जी के लिखल पढे के मिलल ह। उहाँ के लिखत बानी कि — “तेग अली ‘तेग’ के बाद भोजपुरी गजल तकरीबन 40-50 साल के शुन्यता से गुजरल । दरअसल इ जमाना हिन्दी निर्माण के रहे । सबका एके धुन एके निसा सवार रहे कि केह तरे हिन्दी के समुन्नत…

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