समय के चाक पर नाचत दिल्ली-तारकेश्वर राय “तारक”

दिल्ली में सीएए के विरोध में बवाल

नागरिकता संशोधन अधिनियम सीएए

दिल्ली के सड़क पर जे बरिसो से चलत आ रहल बा उ अदमी के खूब मालूम बा कि ई कबो सुनसान ना होखे हमेशा गुलजार रहेला। राती के कुछ घरी भले तनी भँगुवा जाव लेकिन फिर तरोताजा होके गाड़ी घोड़ा आदमी जन से भरी जाला सड़क । लेकिन दिल वालन के शहर दिल्ली के दिल आजु काल धड़कत नइखे धधकत बा भभकत बा रोवत बा डर से भयभीत बा । कबो देखे सुने के ना मिलल रहे दिल्ली के सड़क पर फ़इलल मुश्मात के माँग नियन सुनसान भकसावन सन्नाटा ।

दिन के टहक्का अंजोर में सुनसान उदास सड़क के देखल एगो बुरा सपना जइसन महसुस होखता । कुछ दिन पहिले तक दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाका शान्ति आ आपन मेल जोल खातिर जानल जात रहे । जहाँ जिनिगी हँसत बिहसत आपन बर्तमान के सुधारे में आ भविष्य के सवारे में बाझल रहे । हाले एगो दंगा के आग अइसन ना धधकल कि ना जाने केतना चमन बीरान हो गइल । काहें बुझाते नइखे ? केहु कहता CAA के बिरोध आ समर्थन करे वाला लोगन के बीच भइल झड़प दंगा के रूप अख्तियार क लिहलस । CAA के बिरोध में प्रदर्शन त दिल्ली के अलावा भारत के अउरी शहरन में भी हो रहल बा, कहीं से हिंसा अउरी आगजनी के कवनों समाचार सुने के त नइखे मिलत । शांति पूर्वक आ अहिंसक रूप से प्रदर्शन जारी बा । दिल्ली के एक भाग में नफरत के आगी में मानवता जरत रहे त दूसर भाग जहवाँ एकर कवनो असर ना रहे लेकिन डर आ असुरक्षा के भावना के चलते ओहीजो आदमी अपना के घर के चार दीवारी में बन्द क ले ले रहे । किसिम किसिम आ मॉडर्न गाड़ी से ठकाठेच भरल सड़क पर गिनल चुनल वाहन के चलत देख के अपना आँखी प बिश्वासे नइखे होत । मन माने के तैयारे नइखे होत के ई दिल्ली के सड़क ह । जवन दिल्ली भयावह पर्यावरण भा हाड़ कँपावे वाली सर्दी भा देह जरावे वाली गरमी भी जेकरा रफतार के ना रोक पावे उ थथमल बा । दहशत में बा आम जिंदगी ।

दंगा में केतने लोग निरंकुश जालिम उपद्रवी भीड़ के हाँथो असमय मौत के गाल में समा गइल सैकड़ों निर्दोष लोग घवाहिल भइल बा | लापता बा । जेकर सवांग आपन घरे ना लौट पवलस ओकर परिजन पहिले हस्पताल के मॉर्चरी के शव में ढूंढ़ रहल बाड़ आपन हित मीत संगी साथी के । केहुके घर जरल त केहु के दर दुकान केहुके सपना खाक हो गइल। गाड़ी घोड़ा जीनिगी के पूँजी पल भर में खाक बन गइल । इस्कूल जरल अस्पताल जरल जन जन के बिश्वास जरल समाजिक सौहाद्र जरल का का बतावल जा ।सीएए के विरोध के दिल्ली में दंगा

देश के राजधानी दिल्ली जहंवा के पुलिस छोट मोट वारदात के त कुछे घण्टा के भीतर सुलझा देले ओकरा नाक के नीचे अइसन दँगा भड़क गइल आ भड़की ना गइल ओकरा आँखी के सोझा उन्मादी भीड़ नौजवानन के पिट पिट के मारत मुआवत रहे तोड़त फोरत जरावत रहे लेकीन उ रोके में नाकामयाब रहे । इ कवनो गाँव गिराव के पुलिस ना दिल्ली के स्मार्ट पुलिस बल रहे । भारतीय लोकतंत्र प्रशासन आ पुलिस के खुफिया विभाग के नाकामी के उदाहरण बा दिल्ली के ई दँगा । आवाम के जान माल के सुरक्षा के जिम्मेदारी त सरकार के ही रहे। जेमा उ सफल ना भइल ।

ए दँगा के भड़कावे के जिम्मेदार उ लोग बा जे संविधान के बचावे खातिर ढेर चिन्तित रहे । ई दँगा अइसन समय मे भड़कल जब हमनी के देश मे अमरीका के राष्ट्रपति मेहमान बन के आइल रहलन आ साथे साथ आइ रहल पूरा दुनियां के मीडिया कर्मी । देश के गरिमा के ठेश पहुँचल बदनाम भइल आपन लोकतंत्र । पहिले देश बा हमनीके चाहे कवनो धर्म के मानेवाला होखी जा । ओकर इज्ज्त के बचावे के जिम्मेवारी सभकर बा जे देश के माटी पर जीयता जागता । कतनो मनमुटाव होखे आपुस में लेकिन बाहर वालन के सामने आपन कटुता के ना देखावे के परम्परा रहल बा अपना समाज मे । इहो परम्परा टुटल दिल्ली के इ दँगा से ।

दिल्ली के नफरत के आगी में झोके वाला एह तरह के मंशा रखे वाला एके जायज ठहरावे वाला एकर समर्थन करे वाला देश के तोड़े के भावना के हावा देवे वालन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही होखे के चाही । उपद्रवी के कवनो धरम ना होला धर्म राजनीति आ ब्यक्तिगत स्वार्थ के कगरी हटा के ओके सख्त से सख्त सजा दियावे में सहयोग कइल सभकर कर्तब्य बा । राजनीति से ऊपर उठी के राज्य सरकार केंद्र सरकार आपसी बेहतर ताल मेल से जीनिगी के पटरी पर लियावे के कोशिश में लागल बा । समाज के हर समुदाय के लोग एह दुखद समय मे दिल्ली वालन के साथ खड़ा बा । केहु भूखा के भोजन करावता त केहु दावा बीरो । जनता के बिश्वास के वापस अपना जगहा में लियावे में त जरूर वक्त लागी बाकी साँच मन से कोशिश कइल प्रशासन आ शासन के कर्तब्य बा जिम्मेदारी बा । संवैधानिक पद पर बइठल सब लोग जब सहयोग करी त इ काम असम्भव बिल्कुल नइखे । जनप्रतिनिधि लोग आपन जुबान पर काबू आ नियंत्रण में राखे के पुरहर कोशिश करी अइसन बिश्वास बा।

बेशक दँगा के आँधी त गुजर गइल आ पीछे छोड़ गइल भयावह मंजर । टुटल फुटल जरल माल असबाब । शर्मसार मानवता । लोकतंत्र के बचावे के आड़ में असंवैधानिक किरियाकलाप । बेशक दिल्ली के इ जख्म वक्त के मरहम से ही भरी । खात पियत नाचत गावत मौज उड़ावत दिल्ली के ना जाने कवन जालीम के नजर लाग गइल ?

✍तारकेश्वर राय “तारक”

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

Related posts

Leave a Comment

13 + 4 =