सरकार कइलस राम मंदिर तीर्थ ट्रस्ट बनावे के घोषणा, ट्रस्ट में 15 सदस्यन के होखी नाम

भोजपुरी समय, दिल्ली/अयोध्या डेस्क:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुध के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण खातिर ट्रस्ट बनावे के एलान कइले। एकरा बाद गृहमंत्री अमित शाह बतवले कि एह ट्रस्ट में पंद्रहगो (15) ट्रस्टी होइहन, जवना में एगो सदस्य दलित समाज के सदस्य होई। गृहमंत्री के एह बेयान के चार घंटा बाद ट्रस्ट से जुड़ल पंदरह सदस्यन के बारे में जानकारी सामने आ गइल बा। हालांकि पहिले जानकारी सामने आइल रहल हऽ कि चारु शंकराचार्य लोग के एह ट्रस्ट में शामिल कइल जाई, बाकिर सरकार ट्रस्ट में खाली प्रयागराज के ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज के ही शामिल कइले बिया। एकरा अलावा ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े के भी अस्थान दिहल बा, बाकिर अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास के ट्रस्ट के मीटिंग में वोटिंग के अधिकार ना होखी।

ई लोग होखी ट्रस्ट में शामिल :-
के. परासरण: इहां के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील बानी। परासरण अयोध्या मामला में नौ साल तक हिंदू पक्ष के पैरवी कइले रहन। इंदिरा गांधी आ राजीव गांधी सरकार में अटॉर्नी जनरल रहले। पद्म भूषण आउर पद्म विभूषण से सम्मानित हो चुकल बाड़ें।
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वतीजी महाराज (प्रयागराज): इहां के बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हईं। हालांकि, इहां के शंकराचार्य बनवला पर विवाद भी रहल बा। ज्योतिष मठ के शंकराचार्य के पदवी के लेके द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती हाईकोर्ट में केस भी दाखिल कइले रहस।
जगतगुरु मध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्नतीर्थ जी महाराज: ई कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के तैंतीसवां पीठाधीश्वर हईं। इहां के दिसंबर 2019 में पेजावर मठ के पीठाधीश्वर स्वामी विश्वेशतीर्थ के मरला के बाद पीठाधीश्वर के पदवी सम्हरले बानी।
युगपुरुष परमानंद जी महाराज: ई अखंड आश्रम हरिद्वार के प्रमुख हईं। वेदांत पर इनके 150 से ज्यादा किताबन के प्रकाशन हो चुकल बा। साल 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आध्यात्मिक नेता लोगन के शिखर सम्मेलन के भी इहां के संबोधित कइले बानी।
स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज: इनकर महाराष्ट्र के अहमद नगर में साल 1950 में जन्म भइल। ई रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत आ अन्य पौराणिक ग्रंथन के देश-विदेश में प्रवचन करीले। स्वामी गोविंद देव महाराष्ट्र के विख्यात आध्यात्मिक गुरु पांडुरंग शास्त्री अठावले के शिष्य हउवन।
विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा: ई अयोध्या राजपरिवार के वंशज बाड़न। रामायण मेला संरक्षक समिति के सदस्य आ समाजसेवी के रूप में काम करेलन । 2009 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ल रहस, बाकिर हार मिलल रहे। एकरा बाद इहां के राजनीति से सन्यास ले लिहनी।
डॉ. अनिल मिश्र, होम्पयोपैथिक डॉक्टर: डॉ. मिश्र मूलरूप से अंबेडकरनगर के निवासी हईं आ अयोध्या के प्रसिद्ध होम्योपैथी डॉक्टर बानी। इहां के होम्योपैथी मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार भी हईं। मिश्रा 1992 में राम मंदिर आंदोलन में पूर्व सांसद विनय कटियार के संगे महत्वपूर्ण भूमिका निभवले बाड़न। वर्तमान में संघ के अवध प्रांत के प्रांत कार्यवाह भी हउवन।
श्री कामेश्वर चौपाल, पटना (एससी सदस्य): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कामेश्वर के पहिला कारसेवक के दर्जा दिहले बा। कामेश्वर साल 1989 में राम मंदिर में शिलान्यास के पहिला ईंटा धइले रहले। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभवले। इनका दलित भइला के नाते ई मौका दिहल गइल बा। 1991 में इहां के रामविलास पासवान के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ चुकल बानी।
महंत दिनेंद्र दास: ई अयोध्या के निर्मोही अखाड़ा के अयोध्या बइठक के प्रमुख हउवन। ट्रस्ट के बइठक में इनका वोटिंग के अधिकार नइखे।

एकरा अलावा ट्रस्ट में केंद्र सरकार द्वारा नामित एगो प्रतिनिधि भी होखी, जे हिंदू धर्म के होखी आ केंद्र सरकार के अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसर होई। ई बेकती भारत सरकार के संयुक्त सचिव के पद से नीचे के नइखे हो सकत। ई एगो पदेन सदस्य भी होइहन।
राज्य सरकार द्वारा नामित एगो प्रतिनिधि, जे हिंदू धर्म के होखी आ उत्तर प्रदेश सरकार के अंतर्गत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसर होई । ई व्यक्ति राज्य सरकार के सचिव के पद से नीचे के नइखे हो सकत। संगहीं इहो एगो पदेन सदस्य होइहें।
एकरा अलावा अयोध्या जिला के कलेक्टर एह ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी होइहन। ईहो हिंदू धर्म के माने वाला होइहन। अगर कवन कारण से मौजूदा कलेक्टर हिंदू धर्म के नइखन, तऽ अयोध्या के एडिशनल कलेक्टर (हिंदू धर्म) पदेन सदस्य होई हैं। राम मंदिर विकास आउर प्रशासन से जुड़ल मामलन के चेयरमैन के नियुक्ति ट्रस्टियन के बोर्ड करी। इनके भी हिंदू होखल अनिवार्य बा।
हई बा नियम: जे ट्रस्टी बा उनका ओरी से (सीरियल नंबर दो से आठ तक के) 15 दिन में सहमति मिल जाए के चाहीं। ट्रस्टी नंबर एक एह दौरान ट्रस्ट के स्थापित कऽके सहमति दे चुका होगा। उनकरा सीरियल नंबर दो से सीरियल नंबर आठ तक के सदस्यन के ओर से ट्रस्ट बनावे के 15 दिन के भीतर सहमति ले लिहलें रही हें।

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