बिहार के जयचन्द से बिहार बदनाम होता

बिहार हमेसा से क्रांति के भूमि रहल बा। अंग्रेजन से आज़ादी खातिर महात्मा गांधी सबके हाथ में क्रान्ति के मशाल दे देहलें आ अपने लाठी लेके आगे-आगे चल देहलें बाकी ध्यान देवे वाला बात ई बा कि उनका के आंदोलन के लाठी बिहार के चंपारण देहलस। ओही लाठी के बल पर एगो वैचारिक आंदोलन शुरू भइल जवन आजादी के कारक बनल। स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार से तिलका मांझी, वीर कुंवर सिंह, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण, मजहरुल हक़, समेत अनेक स्वतंत्रता सेनानी भइलें। बाकी अब बिहार चर्चा में बा चर्चा के कारण नेगेटिव बा। कन्हैया कुमार, शरजील इमाम जइसन जयचंद के कारण बिहार बदनाम हो रहल बा। अइसन लोग के समर्थन करेवाला जनता भी ओतने दोषी बा।

अइसन लोग के बढ़ावे में सबसे ज्यादा स्वार्थी राजनीतिक पार्टियन के हाथ रहेला। कांग्रेस समर्थक वामपंथी दल के पश्चिम बंगाल के किला त पहिलहीं ढह गइल रहे। उनकर ताकत खाली जेएनयू में बाँचल रहे, उहईं से विचारधारा के लड़ाई नाया तरह से शुरू करे खातिर हताश कम्युनिस्ट नवहियन के आकर्षित करे वाला भूख-गरीबी-अशिक्षा से आज़ादी के नारा लगावल शुरू कइलस। आपन तागत के बढ़ावे खातिर वामपंथियन अपने साथे ओह मुस्लिम नवहियन के जोड़ लेलस, जिनका दिमाग में भारत के खिलाफ जहर भरल रहे। नतीजा ई भइल की आज़ादी के ऊ नारा बिगड़ के कश्मीर के आज़ादी से होत , हिन्दु से आज़ादी तक जा पहुंचल।

आज हालत ई बा कि वामपंथी कन्हैया के देहल आज़ादी के नारा भारत के खिलाफ भारत के एकता तूड़े खातिर इस्तेमाल हो रहल बा| शाहीन बाग़ से एगो नया वीडियो सामने आइल बा , जहां धरना पर बइठल औरत कह रहल बारी स कि संसद आ सुप्रीमकोर्ट हिन्दू खातिर काम कर रहल बा, जवना दिने हमनी बहुसंख्यक हो जाएम , ओही दिन हिन्दू के पटक पटक के मारेम स।

शरजील कहता कि चिकेन नेक काट के भारत से आसाम अलग कर दियाई त कोई मुम्बई में जुट के शरजील के सपना के पूरा करे के नारे लगा रहल बा। हास्यास्पद ई बा कि एगो सिरफिरा देसी कट्टा लेके चल जाता त हो हल्ला हो जाता बाकी मुम्बई के हजारों लोग देश तूड़े के समर्थन कर देता तबो केहू कुछ कहत नइखे। खासकर जे मुस्लिम समाज से बा उ चाहे केतनो पढ़ल-लिखल होखे एकदम चुप रहता आ ना त ओकनी के समर्थन में खड़ा ब बाकी विरोध केहू नइखे करत।

मुस्कियाये वाला बात ई बा कि आज से कुछ दिन पहिले तक मुस्लिम समाज के लोग जन गण मन गावे के मन करत रहे। अब शाहीनबाग़ के राष्ट्रीय आन्दोलन बतावे आ आम लोग के आकर्षित करे खातिर जन गण मन गा रहल बा। राष्ट्रीय ध्वज फहरावल जाता। एमे मतलबी आ बिकाइल कुछ दोसरो समाज के लोग शामिल बा। हालांकि एकरा पीछे मुस्लिम संगठन पीऍफ़आई के भूमिका के जांच हो रहल बा।

बिहार के चर्चा शाहीन बाग से जोड़ल ऐसे जरूरी बा काहेकि शाहीन बाग के धरना के मास्टरमाइंड शरजील बिहार से बा आ धरना में बिहारी लोग के भी ठीक-ठाक संख्या बा। जामिया में पढेवाला बहुत छात्र बिहार से बारें।हम खुद जामिया से स्नातक के पढ़ाई कईले बानी
बाकी ओह समय अइसन माहौल ना रहे।

 

 

 

 

 

लव कांत सिंह ‘लव’

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