बजट 2020: आर्थिक मंदी से लड़े के परियास

अर्थव्यवस्था के सूचकांक लगभग ई बतावे शुरू कऽ देले बाड़न सऽ कि सायेद अर्थव्यवस्था के सभसे बाउर दौर खतम होखे वाला बा। अधिकतर सूचकांक पिछिला अवधि के तुलना में या स्थिर हो रहल बाड़न सऽ भा बरियार। बाकिर एह सूचकांक के आधार पऽ ये निरनय पऽ पहुँचल कि अर्थव्यवस्था में गिरावट दौर एकदमे खतम हो गइल बा, जलदीबाजी के बात होई। बेहतर रही कि थोरकी समय ले एह सूचकांकन के अउरी बरियार होखे के इंतजार कइल जाओ। बाकिर सूचकांकन के ट्रेंड देखि के सकारात्मक दिशा लउकत बा।

अर्थव्यवस्था के सगरी क्षेत्रन के 1 फरवरी के वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पेश भइल केन्द्रीय बजट से बहुत उम्मीद रहल हऽ। बजट 2020 लगभग हर क्षेत्र के कुछ उम्मीदन के पूरा कइले बा तऽ कुछ माँगन के पूरा करे में सक्षम नइखे हो पावल। बाकिर ई सामान्य बात बा। केवनो बजट के एगो सीमा होला अउरी ओकरा खाती सगरी माँग पूरा कइल संभव ना होला। सरकार के  संसाधन के सही बंटवारा करे के रहेला अउरी पूरा अर्थव्यवस्था के दशा के आधार पऽ संसाधनन के ई बंटवार होला। बाकिर सरकार के समझ अउरी सोच तय करेला कि केवना क्षेत्र के बेसी महता दिहल जाई अउरी केवना के कम।

एह बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गिरत माँग के काबू करे परियास साफ-साफ लउकत बा। मालूम होखे के चाहीं कि वर्तमान आर्थिक मंदी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गिरत माँग के सभसे बेसी जोगदान बा। एह कारन सरकार के फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था अउरी खेती से जूड़ल कुछ बहुत पुरान बेमारीन के ठीक करे वाला लागत बा। एह बजट में ग्रामीण क्षेत्रन में वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज अउरी ढ़ुलाई के संसाधनन के कमी के पूरा करे के कोशिश नजर आवत बा। बाकिर आखिरी परिनाम एह बजट के सफल तरीका से लागू कइला के बाद लउकी। बाकिर एह बजट के ले के कॉर्पोरेट सेक्टर में बहुत उत्साह जइसन  नइखे लउकत। 1 फरवरी के सेंसेक्स लगभग 1000 अंक गिर के बन भइल। हालाँकि अगिला दू दिन में ई गिरावट रिकवर हो गइल।

एह बजट में कृषि के साथे-साथे आधारभूत संरचनन के विकास पऽ बहुत जोर दिहल बा। सामाजिक विकास, शिक्षा अउरी स्वास्थ्य पऽ पिछिला साल के तुलना में ठीकठाक आवंटन भइल बा बाकिर ये दिसाईं खरच बढ़वला के जरूरत बाऽ। अर्थव्यवस्था के अगिला पड़ाव तक ले जाए खाती सरकार के ए मद में खरच बढ़ावे के परी।

बजट से एक दिन पहिले आइल आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20, आगामी वित्तीय वर्ष 2020-21 खाती सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि के दर 6% – 6.5% अनुमानित कइले बा। जदि चालू वित्तीय वर्ष से एकर तुलना कइल जाओ तऽ ई आंकड़ा उत्साहित करे वाला कहल जा सकत बा। चालू वित्तीय वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के 5% से बढ़े के अनुमान बा। हालाँकि ई बजट वित्तीय वर्ष 2020-21 खाती सकल घरेलू उत्पाद में विकास दर (नॉमिनल) 10.5% अउरी राजकोषीय घाटा 3.8% के अनुमान कइले बा। आगामी वित्तीय वर्ष में ए लक्ष्य पूरा कइल संभव बा। सरकार थोरी अउरी महत्त्वकांक्षी लक्ष्य ले के चले के चाहत रहल हऽ।

पूरा बजट के विवेचन कइला पऽ ई कहल जा सकत बा कि सरकार एगो ठीकठाक बजट पेश कइले बे। खेती खाती ई बजट एगो ड्रीम बजट नियर बा। हालाँकि बहुत कुछ अइसनो बा जेवन सरकार के कम धियान पवले बा। अब सरकार खाती ई महता के बात बा कि सरकार एह बजट के केतना सफल तरीका से लागू कऽ पावत बे। लागू करे के सफलता पऽ अर्थव्यवस्था के दिशा तय होई।

 

 

 

 

राजीव उपाध्याय

राजीव उपाध्याय

आर्थिक विषय के टिप्पणीकार। भोजपुरी, हिन्दी अउरी अंग्रेजी में साहित्य रचना। भोजपुरी के साहित्यिक पत्रिका 'मैना' के संपादक। डेल्ही स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से पीएचडी अउरी दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक।

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