नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पऽ एतना हंगामा काँहे?

भारतीय संसद अउरी ओकरा बाद देश के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद बहुत पहिले नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के संस्तुति दे देले बा लो। देश में ई अधिनियम लागूओ हो गइल बा। बाकिर एह अधिनियम विरोध लगातार जारी बा। पहिले ई विरोध विश्वविद्यालयन से निकलि के सड़क पऽ आइल तऽ बहुत हिंसक रुप धारण कऽ लिहलस अउरी हिंसा के विरोध में पुलिस हिंसक कार्यवाही कइलस। बाकी अब ई विरोध कुछ सीमित स्थानन तक सीमित रहि गइल बा।

दिल्ली के शाहीन बाग में पिछला एक महीना से अधिका समय से बीच सड़क पऽ मूलतः मुस्लिम समुदाय के सैकड़न महिला नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन पऽ ब इठल बाडी। एह लगातार विरोध के कारन शाहीन बाग लोगन के मन में एगो विशेष स्थान बना ले ले बा। मीडिया से लेके सोशल मीडिया अउरी राजनैतिक दलन के तरफ से शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन के संबन्ध में लगातार रिपोर्टिंग, लेख अउरी बयानबाजी हो रहल बा। ई विरोध प्रदर्शन ई बहुत जरूरी कऽ देत बा कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम पऽ खुल के चर्चा होखे।

भारत के नागरिकता अधिनियम 1955 के हिसाब से भारत में नागरिकता मिले चारगो सामान्य अस्थिति बे। केवनो आदिमी भा महिला भारत के नागरिक या तऽ जन्म से बन सकेला भा वंशागत रुप से भा पंजीकरण चाहें प्राकृतीकरण के तरीका से। एगो पाँचवाँ स्थितियो बा। जब भारत केवनो भूभाग के भारत में अधिग्रहित करी तो ओ भूभाग के सगरी नागरिक अपने आप भारत के नागरिक बनि जइहें।

नागरिकता मिले पहिला दू गो प्रकार ओ लोगन पऽ लागू होला जे भारत में पीढ़ीयन से भारत के नागरिक के रूप में रहत आइल बा भा जन्म के समय ओह बेकति के माता-पिता के लगे भारतीय नागरिकता रहे। बाद के नागरिकता पावे के दू गो प्रकार बाहर से आइल लोगन के संबन्ध में बा जे भारत के नागरिक बने चाहत होखे। एह संशोधन में नागरिकता मिले के चौथा प्रकार में कुछ नया प्राविधान जोड़ल गइल बा। ए तरे ई संशोधन कहीं से केहू के नागरिकता सिद्ध करे के नइखे  कहत। बाकिर ई ओकरा से संबन्धित बा जे भारत के नागरिक नइखे अउरी ऊ भारत के नागरिकता खाती आवेदन करत होखे।

नागरिकता देबे के चौथा प्रकार में जेवन बदलाव भइल बा ओकरा हिसाब से पाकिस्तान, बांग्लादेश अउरी अफगानिस्तान के आइल धार्मिक अल्पसंख्यक जेकर धार्मिक स्तर पऽ उत्पीड़न भइल होखे अउरी आदिमी भा महिला भारत में पिछिला पाँच साल से वैध रुप से रहत होखे। वैध के मतलब ई बा कि ओह आवेदक के ए तीन देशन के नागरिक साबित करे के परी अउरी ऊ आवेदन अपनी भारत यात्रा के वैध प्रमाण देबे के परी। नागरिकता अधिनियम के एह नया प्राविधान के उद्देश्य भारत में आइल ए लोगन के राहत दीहल बा।

ई नया प्राविधान कहीं से केहू के भारतीय नागरिकता लेबे से नइखे रोकत। केवनो देश से आवे आला केवनो धर्म के मतावलम्बी भारत में आइला के ग्यारह साल बाद भारत के नागरिकता खाती आवेदन कऽ सकेला। जहाँ तक भारतीय नागरिकन के नागरिकता सिद्ध करे बात बा तऽ सभसे पहले ई स्पष्ट रहे के चाहीं कि एह प्राविधान के अंतर्गत केवनो नागरिक से नागरिकता सिद्ध करे केवनो जरूरत नइखे अउरी एकरा कारन केहू के नागरिकता खत्म ना हो सकेला।

कुछ लोग सवाल करत बा कि ई संशोधन मुस्लमान के संगे धार्मिक आधार पऽ भेदभाव करत बा अउरी ई संविधान के खिलाफ बा। ई बात उथला स्तर पऽ साँच लउकत बा बाकिर जइसहीं धार्मिक अल्पसंख्यक शब्द के पाकिस्तान, बाँग्लादेश अउरी अफगानिस्तान के संबन्ध में व्याख्या होई  तऽ तऽ स्पष्ट हो जाई कि ए तीन देश, जेवन संवैधानिक रुप से इस्लामिक देश बाड़े सऽ, में इस्लाम के माने वाला केहू तरे धार्मिक अल्पसंख्य नइखे। इहो बात स्पष्ट बा कि भारतीय संविधान भारतीय नागरिकन पर लागू होला ना कि केवनो दोसरा देश के नागरिकन पऽ। एसे तकनीकी रूप से ई संशोधन कहीं से संविधान के खिलाफ नइखे। हालाँकि ए संशोधन के ले के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गइल बा। जदि एह संशोधन में केवनो संवैधानिक त्रुटि होई तऽ सुप्रीम कोर्ट ओह संबन्ध में निर्णय लेबे में समर्थ बा अउरी बढ़िया रही कि हर तरह के धरना-प्रदर्शन, भावनात्मक दोहन अउरी राजनीति के छोड़ि के सुप्रीम कोर्ट पऽ विश्वास जतावत इह विषय पऽ सुप्रीम कोर्ट के निर्णय देबे दिहल जाओ।

 

 

 

 

राजीव उपाध्याय

राजीव उपाध्याय

आर्थिक विषय के टिप्पणीकार। भोजपुरी, हिन्दी अउरी अंग्रेजी में साहित्य रचना। भोजपुरी के साहित्यिक पत्रिका 'मैना' के संपादक। डेल्ही स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स से पीएचडी अउरी दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक।

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