डरे डेरात जनता जनार्दन

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम

नागरिकता (संशोधन) अधिनियमनागरिकता संसोधन कानून के बनते देश के कुछ हिस्सा में एकरा बिरोध में जवन हिंसक प्रदर्शन हो रहल बा उ अब चिन्ता के विषय ना चिन्तन के विषय बन गइल बा।

सुने के भेंटाता कि कुछ खास वर्ग के लोग डेरा गइल बा। डर के नीचे दबा गइल बा पिचुरा गइल बा । डर के मारे बेचारन के सांस थमे के घरी आ गइल बा। अचानके उ असुरक्षित महसूस करे लागल बाँड़न अपने सर जमीं पर। बाकी मजा के बात त ई बा की उनके पते नइखे की उ डेरात कवना बात से बाडन? बस डर लागता। भीड़ के पाछे भाग के रास्ता रोक के सरकारी संपत्ति के नुकसान पहुंचा के, अपना डर के बाहर निकाल के दोसरा के डेरवावे ख़ातिर आतुर बा उ लोग। आपन डर के आगे दोसरा के परेशानी से कवनो मतलब नइखे।

डर के डर से डेरा के उ लोग हिंसा के नाय में बइठ के झीझीरी खेलता। डर के फूँक लेवे वाला प्राणी शहर के फूंके के मजा लेता। बिपक्ष डेरवावे में कामयाब लउकता। डर के दोकानी खूब चल रहल बा। कुछ लोग के रोजी रोटी के साधन भेंटा गइल बा त केहु के आपन राजनीति चमकावे के उपाय।

दु महीना से ऊपर हो गइल देश के राजधानी में कुछ डेराइल लोग सड़क के बन्द क के बइठल बा। डर से डेराइल लोग बेखौफ खाकी के, मीडिया के डेरवावता आ जब तब रखेदत लउकता। संविधान के कुल्हिये धारा के हाँथ बन्हाइल बा। मजबूर हो के टुकुर टुकर तकला के अलावे केहू के लगे कवन चारा बा।

पहिला बेर डेराइल आदमी के अइसन चेहरा देखे के भेंटाइल बा। आज जदि ई लोग में डर ना रहित ता का होखित? ई त भगवाने जानस। डर के चरखा पर हिंसा के सूत कताता। अहिंसा के तरफ़दारी करे वाला भी वोट बैंक खिसके के डरे उत्पात के हिंसा माने के बिलकुले तइयार नइखन।

लोकतंत्र के नाँव प हिंसा के एगो नाया परिभाषा दियाता, डेराइल आदमी खाली डेरा सकता ना त उ केहु के डेरवा सकत बा ना त उ हिंसा करे के साहस जुटा सकत बा। जब एह तरह के समर्थन देत लोग के दर्शन होखता त दिल ई पूछता की ये भईया लोकतंत्र के ई कवन परिभाषा ह?

संविधान के रक्षा के दोहाई देत बिपक्ष नागरिकता कानून के खिलाफ एक ओर त सुप्रीम कोर्ट में जाता आ कोर्ट के मनसा जाने बगैर सड़क पर भी उतर जाता, लोग के गलत समझावता आ हिंसा पर उतारू करता।

नागरिकता संसोधन कानून के भारत में रहे वाला कवनो भारतीय से दूर दूर तक कवनो सम्बन्ध नइखे, डर विवाद के कवनो बाते नइखे। एकरा बावजूद एके विवादित कइके देश के हिंसा के आगी में झोंके के कारबार में लागल बा कुछ लोग आ कुछ विपक्षी पार्टी आपन राजनीतिक फायदा ख़ातिर।

तीन तलाक, धारा 370, राम मंदिर जइसन बरिसन पुरान मुद्दा पर देश में अइसन बिरोध देखे के ना भेंटाइल,ना एतना हिंसा लउकल। जेतना ये बेर लउकता। सरकार जनता के एह कानून के बारे में जानकारी देवे में पूर्ण रुप से सफल ना भइल।

नागरिकता कानून के बारे में ढ़ेर लोग अनजान बा। लोगन के न त एह कानून के बारे में जानकारी बा ना एकरा के लियावे के पाछे के मकसद जानता लोग। एहि अज्ञानता के फायदा उठावता बिपक्ष। जागरूक करे के जरूरत बा देश के। एहमे मीडिया के खास भूमिका बा। हाले मिलार्ड के आदेश पर भेजल प्रतिनिधि लोग के बातचीत से भी कवनो रास्ता निकले के उम्मीद नजर नइखे आवत।

डर के वैलिडिटी के खत्म कइके सौहाद्र अउरी भाइचारा के रीचार्ज के जरूरत बा। जागरूकता के मलहम लगा के ही डर के खझुहट से जान बाँच सकता। डर के नगाड़ा पिट के सड़क जाम क के कुछ नइखे भेटाये वाला ई समझावे के परी। सिवाय सस्ती लोकप्रियता के कुछो ना भेटाई ये मालिक। मोहरा बने से बंचला के काम बा।

 

 

 

 

तारकेश्वर राय ‘तारक’

उप सम्पादक

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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