कोरोना वायरस अउरी भारतीय अर्थव्यवस्था

कोरोना वायरस के बढ़त प्रकोप के कारन सगरी देश में लॉकडॉउन लागल बा। एह लॉकडॉउन के कारन शुरूआती दौर में देश के आर्थिक गतिविधि में लगभग 75% ले कमी आ गइल रहल। बाकिर आवश्यक वस्तुन अउरी सेवा के आदान प्रदान प छूट मिलला के बादो भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक गतिविधि में लगभग 60% के कमी बनल बा। जदि 4 मई के लॉकडॉउन खुलियो जाता तब्बो देश के आर्थिक गतिविधि पूरा तरह से शुरू ना हो पाई। एह कारन संभावना बा कि उत्पादन अउरी उपभोग में बहुत ज्यादा कमी आई जेकरा कारन देश के जीडीपी पऽ बाउर असर परी। संभावना बा वर्तमान वित्तीय वर्ष के पहिला तिमाही में अर्थव्यवस्था में लगभग 1-1.5% ले संकुचन हो सकत बा।

अर्थव्यवस्था में आइल एह स्थिति के देखत भारत सरकार, विभिन्न राज्य सरकार अउरी भारत के केन्द्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कई तरह के कदम उठवलें बाड़े। भारत सरकार अउरी राज्य सरकार जहाँ उद्योगन के कई तरह के रियायत आ सुविधा के घोषणा कइले बाड़ी सऽ तऽ ओही जा आरबीआई अपनी एमपीसी के मीटिंग के बाद रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट अउरी सीआरआर में भारी कटौती के घोषणा कइले बे। संगहीं आरबीआई बैंकन से अगिला तीन महीना ले केवनो टर्म लोन के ईएमआई उपभोक्ता से ना लेबे के राय देले बे। एह रियायतन के सिवाय आरबीआई संगही अउरीओ कई तरह के कदम उठा रहल बा जेसे कि अर्थव्यवस्था में धन प्रवाह के कमी ना रहे अउरी लॉकडॉउन खुलका के बाद जल्दी से जल्दी आर्थिक गतिविधि के बढ़ावा मिल सके।

आज अधिकतर बैंक अपना उपभोक्ता के अगिला तीन महीना ले लोन ना देबे के सुविधा दे देले बाड़े। उम्मीद बा कि लॉकडॉउन के कारन लोगन के कमाई में भइल कमी के कारन जरूरी सामानन के उपभोग में बहुत कमी ना आवे। बाकिर ई साफ बा कि एह लॉकडॉउन के कारन समग्र माँग में भारी कमी आई। जेवना के कारन अर्थव्यवस्था में कई तरह के परेशानी आई। एह कारन ना खाली अर्थव्यवस्था में खाली मंदी आई बलुक औसत कमाई में कमी, बेरोजगारी में वृद्धि, व्यापारिक प्रतिष्ठानन के बंदी अउरी बैंकन के एनपीए में भारी इजाफा होई।

एह आपदा के मार कमजोर वर्ग अउरी छोट व्यापारिक प्रतिष्ठानन पऽ सभसे बेसी परे के संभावना बा। आर्थिक मंदी के कारन लाखों लोग बेरोजगार हो जाई अउरी जेकर रोजगार बाँचि जाई ओकरा औसत कमाई में कमी आवे के संभावना बा। कमजोर वर्ग के लाखन लोगन के सोझा ना खाली रोटी के समस्या खड़ा होखे वाला बा बाकिर दोसर आवश्यक सुविधन खाती संघर्ष करे के परी। संगही निम्न मध्यम वर्ग के लाखों लोग बेरोजगारी आ कमाई में कमी आइला के कारन गरीबी अउरी कर्ज के जाल में फँसे के संभावना बा। संगही बहुत बड़ संख्या में छोट व्यापारिक संस्थान बन्द हो जइहन सऽ। जेवना के असर पूरा अर्थव्यवस्था पऽ परी।

एमे अब केवनो दूगो राय नइखे कि भारतीय अर्थव्यवस्था खाती आवे आला समय बहुत मुश्किल होखे आला बा। हालाँकि सही तरीका से एह समस्या के प्रबन्धन कइला पऽ एह आर्थिक मंदी के असर ना खाली घटावल जा सकत बा बाकिर ओकरा अवधि के घटावल जा सकत बा। एकरा खाती जरुरी बा बेरोजगार लोगन के खाती रोजगार के इंतजाम कइल जाओ अउरी काम में मनरेगा अउरी आधारभूत संरचना के विकास में निवेश सभसे कारगर उपाय हो सकेला।

 

 

 

राजीव उपाध्याय

आर्थिक विषय के टिप्पणीकार

 

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