कश्मीर में बहल बदलाव के झकोरा

आम आदमी के ताकत के कमतर आंके वाला के पछताये के परबे करेला । भले उ निर्बल अउरी औसत बुद्धि के लउकेला लेकिन जब उ ठान ले लेला त बड़का बड़बोला लोग के बोलती बंद क देला, सत्ता परिवर्तन क देला। हाल ही में जम्मू- कश्मीर के बिकाश परिषद के चुनाव अउरी नतीजा पर भारते ना समूचा दुनियाँ के नजर लागल रहल ह। पिछला साल 5 अगस्त 2019 के जब धारा 370 अउरी अनुच्छेद 35A के हटावल गइल त पाकिस्तान के साथे पूरा विश्व हक्का बक्का रही गइल । सरकार के लगे चुनौती रहे जनमानस के बिश्वास के जीतल आ मुख्य धारा से जोड़े खातीर राजी कइल। कुछ परिवार के जागीर रहे कश्मीर उहे लोग जइसन मन कइलस वइसे चलवलस । साधारण जनता के सोझा त बेरोजगारी गरीबी आतंकवाद ही तांडव करत नजर आवे उ ओहि मे अनझुराइल रहे बाझल रहे। जान माल आ बहिन बेटी के आबरू बचावल बड़का चुनौती रहे । हमेशा अशांति के माहौल। न दिन चैन न रात चैन । बेरोजगारी चरम सीमा पर रहे। भूखा पेट के फुसलावल आसान होला, एकर खुबे फायदा उठावल अलगाववादी ताकत।

कुछ लोग के मुट्ठी में रहे सत्ता,आपन रसूख के कम होखत कइसे बर्दाश होइ केहु के । पूरा जोर लगा दिहल लोग 370 अउरी अनुच्छेद 35A के बहाल करे खातीर केहु कहलस चीन से मदद मांगे के सार्वजनिक वकालत कइलस त केंहू कहल अगर पुरान स्थिति बहाल ना भइल त तिरंगा उठावे वाला हाँथ ना भेटाई घाटी में।

आजादी के सात दशक बितला के बाद जम्मू-कश्मीर में पहिले बेरी त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली (गांव-ब्लाक-जिला) लागू भइल बा। ओकरा खातीर जइसे चुनाव के घोषणा भइल आवाम में उत्साह अउरी उत्सव के माहौल बनी गइल । सत्ता कुछ लोग के हाँथ से निकल के गाँव गाँव पहुँचल चाहत रहे, ई कश्मीर के लोग खातीर नावा अनुभव रहे । त्रिस्तरीय पंचायत बेवस्था लागू भइला से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र पोढ़ होखी । चुनाव के घोषणा होखते अटकल के बजार गरम हो गइल। निष्पक्ष अहिंसक अउरी शान्ति से चुनाव करावल ही सरकार के सोझा बहुते बड़का चुनौती रहे । बिपक्ष के साथ पूरा दुनिया के नजर रहे एह चुनाव पर।

कश्मीर के सात दल मिल के आपस मे एगो गठबंधन के शक्ल में चुनाव में उतरे के तैयारी के अमली जामा पहिनवलस नाम धराइल गुपकार गठबंधन (पीएजीडी) एकर दावा आ बड़बोलापन माहौल के खराब करे में कवनो कोर कसर ना छोड़ेंलस। देश के बाकी राजनीतिक दल त एमा हिस्सा लेबे कइलस।

कश्मीर के आम आदमी बड़बोलापन अउरी धमकी भरल बयान के जबाब दिहलस आपन मत के ब्यवहार क के मतदान क के। कटाह आ दुरूह परिस्थिति आतंकवादी के खौफ के अपना हियरा से कबार के फेक दिहलस आवाम। आठ चरण अउरी 280 सीट खातीर भइल मतदान में खुबे बढ़ी चढ़ी के हिस्सा लिहलस आ मतदान के प्रतिशत 51.42 फीसदी रहल,लोकतंत्र के महापर्व अपना सफलता के चौखट लाँघ गइल। चुनाव के समय कुछ उम्मीदवार अउरी कार्यकर्ता के जान से मार दिहल गइल तबो अदमी डेरइलन ना आपन मत गोली बन्दूक के जगह बिकास के दिहलन। लोकतंत्र के प्रति आपन बिश्वास के मतदान के माध्यम से दर्ज करवलन।

आतंक अउरी अलग थलक बांटे काँटे के राग अलापे वालन के बात पर कान ना दिहलस जनसाधारण, बिकाश के रस्ता पर बेखौफ फाल बढावे खातीर दृढ़ प्रतिज्ञ लउकता आवाम, एकर सारा श्रेय जाता केन्द्र सरकार के चलावल जा रहल बिकाश के कार्यक्रम रोजगार के योजना अउरी कल्याणकारी गतिविधि के।

लोकतंत्र पर विश्वास के मजबूती देवे खातीर गरीब गुरबा के दुख दर्द के सुने आ ओकरा निदान खातीर सरकार नागरिक के चौखट पर खाड़ बिया। । अधिकारी लोग के प्रशासन से फरमान बा अपना कार्यालय से बहरी जनता के लगे जा के जनता दरबार लगावल जाव अउरी समस्या के समाधान तुरन्त कइल जाव। जम्मू-कश्मीर देश के पहिले प्रदेश बा जहां आम जनता के समस्या सुलझावे बदे “सरकार गाँव की ओर” “मेरा शहर, मेरी शान” “ब्लॉक दिवस” जइसन कार्यक्रम के सिरिजन कइल गइल बा।

पंचायत के चुनाव कराके पंचायत समिति अउरी सरपंच के सत्ता में भागीदारी दिहल जा रहल बा। अब बिकास के योजना पंचायत के मार्फ़त सीधे धरातल पर चहुँपी। जनता में लोकतंत्र के प्रति विश्वास जागी पोढ़ होइ।

सड़क संचार आधारभूत संशाधन के विकास पर लगातार जोर दिहल जा रहल बा। रोजी रोजगार सड़क सुरक्षा जइसन मूलभूत चिझन के ही जरूरत होला जनता के । जनता आतंकवाद से त्रस्त हो गइल बिया ऊबता गइल बिया उ अब खाली शान्ति चाहत बिया बिकास चाहत बिया।

बितल एक बरिस में सरकार अलगाववादी विचारधारा अउरी आतंकी गतिविधि से शक्ति से निपट रहल बिया। सुरक्षा बल आतंकी गतिविधि में सामिल जमात के मुहँ तोड़ जबाब दे रहल बिया मुठभेड़ में मार गिरावल आम बात हो गइल बा । खोज खोज के अततायी शक्ति पर कार्यवाही हो रहल बा। स्थानीय नागरिक के साथ नइखे मिलपावत अलगाववादी ताकत के ।

जम्मू-कश्मीर के बिशेष दर्जा खत्म भइला से सबसे अधिका फायदा मातृशक्ति के भइल बा। आतंक अउरी डर के साया से हटी के शिक्षा अउरी रोजगार खातीर आगे आ रहल बाली जा। 490 से भी अधिका मातृशक्ति के चुनाव में भागीदारी ई देखावत आ बतावत बा की उनकर केतना बिश्वास बा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उ लोग आपन अधिकार जिम्मेदारी के प्रति सजग बा।

साँस के सफर जब तक जारी बा संघर्ष त चलते रही। ई कहल बीलकुले गलत ना कहाई की तमाम रुकावट बाहरी भीतरी दबाब के बावजूद कश्मीर के अवाम में सरकार में उम्मीद के किरण लउकता । जरूरत बा एह बिश्वास के पोढ़ करे के। आपन सहभागिता से कश्मीर के आवाम भी देश के विकास में आपन पुरहर सहयोग दिहन। उम्मीद बा खुशी अउरी खुशहाली अमन चैन के सुरुज के रोशनी में नहा के पवित्र हो जाई धरती के स्वर्ग कश्मीर।

 

 

 

 

तारकेश्वर राय ‘तारक’

तारकेश्वर राय ‘तारक’

एगो बहुराष्ट्रीय संस्थान में प्रबन्धक के रूप में गुरूग्राम में कार्यरत। उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिला के सोनहरीया गाँव में जनम। लालन पालन शिक्षा दीक्षा महानगर में भइला के बादो गाँव गिरांव आ माटी से जुड़ल भोजपुरी रचनाकार।

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